अनिल अग्रवाल की वेदांता को बड़ी राहत, प्रमोटर ग्रुप ने चुकाया कर्ज; कंपनी पर लगी सभी पाबंदियां हटीं
वेदांता लिमिटेड को बड़ी राहत मिली है क्योंकि प्रमोटर ग्रुप ने अपना कर्ज चुका दिया है, जिससे कंपनी पर लगी सभी परिचालन पाबंदियां हट गई हैं। ...और पढ़ें

प्रमोटर ग्रुप ने वेदांता लिमिटेड का कर्ज चुकाया।
HighLights
प्रमोटर ग्रुप ने वेदांता लिमिटेड का कर्ज चुकाया।
कंपनी पर लगी सभी परिचालन पाबंदियां अब हटीं।
वेदांता अब स्वतंत्र रूप से व्यावसायिक निर्णय ले सकेगी।
नई दिल्ली। दिग्गज माइनिंग और रिसोर्स कंपनी वेदांता लिमिटेड (Vedanta Limited) के लिए एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। कंपनी के प्रमोटर ग्रुप द्वारा कर्ज का भुगतान किए जाने के बाद, वेदांता लिमिटेड के कामकाज पर लगी सभी पुरानी पाबंदियां अब पूरी तरह से समाप्त हो गई हैं।
अनिल अग्रवाल की वेदांता लिमिटेड ने स्टॉक एक्सचेंज को बताया कि उसके प्रमोटर ग्रुप की संस्थाओं, जिनमें वेदांता रिसोर्सेज लिमिटेड (Vedanta Resources Limited) शामिल है, ने 30 दिसंबर, 2025 को हुए एक 'फैसिलिटी एग्रीमेंट' (ऋण सुविधा समझौते) के तहत लिए गए कर्ज का पूरा भुगतान कर दिया है।
इस समझौते के तहत, बैंक ऑफ महाराष्ट्र (GIFT सिटी ब्रांच) ने ऋणदाता (Lender) के रूप में काम किया था। हालांकि वेदांता लिमिटेड खुद इस समझौते का हिस्सा नहीं थी, लेकिन प्रमोटर ग्रुप की संस्थाओं ने गारंटी दी थी कि वेदांता लिमिटेड कुछ विशिष्ट गतिविधियों या कार्यों को तब तक नहीं करेगी जब तक कि समझौते के मापदंडों के तहत अनुमति न मिले।
पाबंदियों से मिली आजादी
कंपनी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, कर्ज के पुनर्भुगतान (Repayment) के बाद अब इस 'फैसिलिटी एग्रीमेंट' को रद्द (Rescission) कर दिया गया है। इसका सीधा परिणाम यह हुआ है कि वेदांता लिमिटेड पर जो भी प्रतिबंध या सीमाएं 2 जनवरी, 2026 के पिछले खुलासे के तहत लागू थीं, वे अब पूरी तरह से हटा ली गई हैं।
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अब कंपनी अपने व्यावसायिक निर्णय लेने और परिचालन गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
एक बिजनेस पत्रकार के नजरिए से देखें तो प्रमोटर ग्रुप द्वारा कर्ज चुकाना और कंपनी के ऊपर से परिचालन संबंधी प्रतिबंधों का हटना निवेशकों के भरोसे को मजबूत करता है। इससे यह संकेत मिलता है कि ग्रुप की वित्तीय स्थिति में सुधार हो रहा है और मुख्य कंपनी (Vedanta Ltd) अब बिना किसी बाहरी दबाव या ऋण शर्तों के अपने रणनीतिक लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकेगी।
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह सूचना सेबी (SEBI) के लिस्टिंग नियमों (LODR Regulations, 2015) के तहत दी गई है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
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