पिछले 25 साल में क्यों गायब हो गईं भारत की ये बड़ी कंपनियां? कभी थीं बाजार की शान, आज सिर्फ इतिहास का हिस्सा
भारतीय उद्योग जगत में कई ऐसी कंपनियां रहीं जिन्होंने एक समय बड़ी सफलता हासिल की, लेकिन पिछले 25 वर्षों में ...और पढ़ें

खत्म हो गया कई कंपनियों का वजूद
HighLights
कई बड़ी भारतीय कंपनियां बाजार से गायब हो गईं
किंगफिशर, जेट एयरवेज, हिंदुस्तान मोटर्स प्रमुख विफल कंपनियां
बढ़ता कर्ज, प्रतिस्पर्धा और गलत फैसले बने पतन का कारण
नई दिल्ली। भारतीय उद्योग जगत में कई ऐसी कंपनियां रही हैं, जिन्होंने एक समय अपने-अपने क्षेत्र में मजबूत पहचान बनाई। इनमें से कुछ निवेशकों की पसंद थीं, कुछ लाखों ग्राहकों के भरोसे का नाम थीं, तो कुछ ने भारतीय उद्योग को नई दिशा दी। लेकिन बदलते बाजार, बढ़ती प्रतिस्पर्धा, गलत कारोबारी फैसलों, कर्ज के बोझ, तकनीकी बदलाव और रेगुलेटरी चुनौतियों के कारण कई बड़ी कंपनियां धीरे-धीरे बाजार से गायब हो गईं या उनका अस्तित्व दूसरे ग्रुप्स में समा गए।
आइए जानते हैं ऐसी कुछ प्रमुख भारतीय कंपनियों के बारे में, जिन्होंने कभी बड़ी सफलता हासिल की, लेकिन पिछले 25 वर्षों में उनका कारोबार बंद हो गया या उनकी स्वतंत्र पहचान खत्म हो गई।
हिंदुस्तान मोटर्स
1942 में उद्योगपति बी. एम. बिड़ला ने हिंदुस्तान मोटर्स की स्थापना की थी। कंपनी की पहचान एम्बेसडर कार से बनी, जिसे कभी भारत की सबसे प्रतिष्ठित कार माना जाता था। लेकिन 1990 के दशक के बाद विदेशी कंपनियों की एंट्री, नई तकनीक और ग्राहकों की बदलती पसंद के सामने एम्बेसडर टिक नहीं सकी।
लगातार घटती बिक्री और वित्तीय संकट के चलते 2014 में उत्तरपाड़ा स्थित फैक्ट्री बंद हो गई और कंपनी का ऑटोमोबाइल कारोबार लगभग समाप्त हो गया।
किंगफिशर एयरलाइंस
किंगफिशर एयरलाइंस की शुरुआत 2005 में विजय माल्या ने की थी। शानदार सर्विसेज और प्रीमियम एक्सपीरियंस के कारण एयरलाइन ने तेजी से लोकप्रियता हासिल की, लेकिन जरूरत से ज्यादा विस्तार, एयर डेक्कन को खरीदने के बाद इसका कर्ज बढ़ा और कैश संकट कंपनी पर भारी पड़ा
2012 में एयरलाइन का ऑपरेशन बंद हो गया और उसका लाइसेंस भी रद्द कर दिया गया। आज किंगफिशर भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास की सबसे चर्चित विफलताओं में गिनी जाती है।
जेट एयरवेज
1993 में नरेश गोयल द्वारा शुरू की गयी जेट एयरवेज लंबे समय तक भारत की लीडिंग प्राइवेट एयरलाइन रही। बेहतर सेवा और मजबूत नेटवर्क इसकी सबसे बड़ी ताकत थे। लेकिन बढ़ते परिचालन खर्च, ईंधन की ऊंची कीमत, कड़ी प्रतिस्पर्धा और भारी कर्ज ने कंपनी की वित्तीय स्थिति कमजोर कर दी।
अप्रैल 2019 में जेट एयरवेज ने अपनी उड़ानें बंद कर दीं। बाद में इसे दोबारा शुरू करने की कोशिश हुई, लेकिन वह सफल नहीं हो सकी और इसकी पुरानी पहचान लगभग समाप्त हो गई।
गो फर्स्ट
गंभीर आर्थिक संकट के कारण, गो फर्स्ट ने मई 2023 में अपना कामकाज बंद कर दिया और स्वेच्छा से दिवालिया प्रोसेस शुरू करने के लिए आवेदन किया। कंपनी के बंद होने की मुख्य वजह अमेरिकी इंजन निर्माता प्रैट एंड व्हिटनी के साथ लंबे समय से चली आ रही सप्लाई चेन की समस्या थी। कंपनी न तो इंजन की सप्लाई कर पाई और न ही समय पर मेंटेनेंस की सुविधा दे पाई।
डीएचएफएल (डीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड)
1984 में कपिल और धीरज वधावन के परिवार द्वारा शुरू की गयी डीएचएफएल देश की प्रमुख हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों में शामिल थी। मिडिल क्लास को होम लोन उपलब्ध कराना इसकी खासियत थी। लेकिन वित्तीय अनियमितताओं के आरोप, बढ़ते एनपीए और नकदी संकट के कारण कंपनी गंभीर मुश्किलों में आ गई। 2019 के बाद कंपनी दिवाला प्रक्रिया में चली गई और आखिरकार किसी अन्य कंपनी ने खरीद लिया।
रिलायंस कम्युनिकेशंस
2004 में अनिल अंबानी की रिलायंस कम्युनिकेशंस ने भारतीय टेलीकॉम बाजार में तेजी से विस्तार किया। शुरुआती वर्षों में कंपनी ने लाखों ग्राहक जोड़े, लेकिन 4जी तकनीक की दौड़, कड़े प्राइस कॉम्पिटीशन, भारी कर्ज और बदलते बाजार के साथ तालमेल न बैठा पाने के कारण इसका कारोबार लगातार गिरता गया। 2019 में कंपनी दिवाला प्रक्रिया में पहुंच गई और उसकी पहचान लगभग समाप्त हो गई।
भूषण स्टील और एस्सार स्टील
ये दोनों ही स्टील की बड़ी कंपनियाँ थीं, जिन्हें दिवालिया की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा और 'इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी बोर्ड ऑफ इंडिया' के तहत बड़ी कंपनियों (क्रमशः टाटा स्टील और आर्सेलर-मित्तल) ने इन्हें खरीद लिया।
