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साल के अंत तक टाटा संस को मिल सकता है नया चेयरमैन, रेस में टाटा स्टील और टाटा पावर के CEO

Updated: Fri, 14 Aug 2026 12:26 PM (IST)

टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल 2027 में समाप्त होने से पहले नए उत्तराधिकारी की तलाश शुरू हो गई है। टाटा ट्रस्ट्स इस साल के अंत तक नए चे ...और पढ़ें

टाटा संस के नए चेयरमैन की तलाश शुरू हो गई है।

टाटा संस के नए चेयरमैन की तलाश शुरू हो गई है।

HighLights

  1. टाटा संस के नए चेयरमैन की तलाश शुरू हो गई है।

  2. इस साल के अंत तक मिल सकता है नया चेयरमैन।

  3. टाटा स्टील और टाटा पावर के CEO संभावित उम्मीदवार।

नई दिल्ली। टाटा समूह की कंपनियों को मैनेज करने वाली संस्था टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के इस्तीफे (Tata Sons N Chandrasekaran) के बाद इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि आखिर अब उनकी जगह कौन लेगा। टाटा संस के नए बॉस की खोज शुरू हो चुकी है।

रिपोर्ट के अनुसार टाटा ट्रस्ट्स इस साल के अंत तक टाटा संस के नए चेयरमैन का चुनाव कर सकता है। यानी इस साल के अंत तक टटा संस को नया बॉस मिल सकता है। सर्च कमेटी के औपचारिक रूप से बनने के बाद, इस प्रक्रिया को पूरा करने में उसे डेढ़ से दो महीने से ज्यादा समय नहीं लगने की उम्मीद है।

इन्हें मिल सकती है टाटा संस की कमान

टाटा ट्रस्ट्स ग्रुप और उसके गवर्नेंस स्ट्रक्चर से वाकिफ किसी अंदरूनी उम्मीदवार को चुनने पर भी विचार कर सकता है। मनी कंट्रोल ने सूत्रों के हवाले से बताया कि जिन नामों पर विचार किया जा सकता है, उनमें टाटा स्टील के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर टी वी नरेंद्रन (61) और टाटा पावर के CEO और MD प्रवीर सिन्हा (64) वगैरह शामिल हैं। हालांकि, अभी कोई शॉर्टलिस्ट तैयार नहीं की गई है और औपचारिक प्रक्रिया शुरू होने पर सिलेक्शन कमेटी कई अंदरूनी और बाहरी उम्मीदवारों पर विचार कर सकती है।

एक सूत्र ने बताया कि काफी समय है। कमेटी बनने के बाद, सही उत्तराधिकारी खोजने में इसके गठन के समय से डेढ़ से दो महीने से ज्यादा समय नहीं लगना चाहिए।

फरवरी 2027 में खत्म होगा एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल

चंद्रशेखरन का कार्यकाल फरवरी 2027 तक है, जिससे टाटा संस को उत्तराधिकारी चुनने और बदलाव की प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए पर्याप्त समय (Tata Sons New Chairman) मिल जाएगा। इस मामले से जुड़े लोगों का मानना है कि यह प्रक्रिया 2026 के आखिर तक पूरी हो जाएगी, बशर्ते सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) से जुड़ी कोई कानूनी अड़चन न आए।

महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के निर्देश के बाद ट्रस्ट को बैठकें बुलाने से रोक दिया गया है। टाटा ट्रस्ट्स ने मई में कहा था कि यह निर्देश एकतरफा (ex parte) जारी किया गया था, जिसमें SRTT को न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही सुनवाई का मौका। और उनका मानना था कि यह निर्देश सिर्फ उसी ट्रस्ट पर लागू होता है।

यह रोक उत्तराधिकार की प्रक्रिया के लिए अहम है क्योंकि SRTT दो मुख्य टाटा ट्रस्ट्स में से एक है, और दूसरा सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) है। सूत्रों का कहना है कि सर रतन टाटा ट्रस्ट की भागीदारी बहुत जरूरी है, क्योंकि सिलेक्शन कमिटी के सदस्यों को फाइनल करने के लिए SRTT और SDTT के बोर्ड को बैठक करनी होगी।

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