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मुकेश अंबानी का FMCG में बड़ा दांव: ₹30000 करोड़ से पलटेंगे बाजी! सप्लाई चेन और इंफ्रास्ट्रक्चर का बदलेगा नक्शा

Published: Mon, 20 Jul 2026 08:56 AM (IST)

मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज के FMCG बिजनेस का EBITDA पहली बार पॉजिटिव हुआ है, जो कंपनी के लिए एक ...और पढ़ें

FMCG में भारी निवेश की तैयारी (AI फोटो)

FMCG में भारी निवेश की तैयारी (AI फोटो)

HighLights

  1. रिलायंस FMCG बिजनेस का EBITDA पहली बार पॉजिटिव

  2. कंपनी का लक्ष्य FY 2030 तक 1 लाख करोड़

  3. सप्लाई चेन और डार्क स्टोर्स पर भारी निवेश

नई दिल्ली। मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज के FMCG (तेजी से बिकने वाले कंज्यूमर गुड्स) बिजनेस का EBITDA पहली बार पॉजिटिव हो गया है। यह कंपनी के लिए बहुत खास उपलब्धि है, क्योंकि वह तेजी से अपने कंज्यूमर ब्रांड बिजनेस को बढ़ा रही है। कंपनी के मैनेजमेंट को उम्मीद है कि सप्लाई-चेन में निवेश पूरा होने और बिक्री बढ़ने के साथ मुनाफा और बेहतर होगा।
FMCG बिजनेस, रिलायंस इंडस्ट्रीज की सब्सिडियरी कंपनी 'रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड' (RCPL) के तहत ऑपरेट किया जाता है। RCPL के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर केतन मोदी के अनुसार फिलहाल कंपनी का फोकस मार्केट शेयर हासिल करने पर है, लेकिन बिजनेस पहले ही EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन से पहले की कमाई) के लेवल पर 'ब्रेक-ईवन' (यानी बिना मुनाफे या नुकसान की स्थिति) तक पहुँच चुका है।

'EBITDA में सुधार होगा'

मोदी के अनुसार "जैसे-जैसे हम अपना दायरा बढ़ाएंगे और पूरी सप्लाई चेन तैयार हो जाएगी, EBITDA में सुधार होगा। अभी हमारा ध्यान मुख्य रूप से मार्केट शेयर हासिल करने पर है।" RCPL, जिसके पास कैम्पा कोला जैसे ब्रांड हैं, ने मार्च 2026 को खत्म हुए चार महीनों में 125 करोड़ रुपये का नेट लॉस दर्ज किया। यह दिसंबर में डीमर्जर के बाद पहली रिपोर्टिंग अवधि थी।
बता दें कि जून तिमाही में ग्रॉस रेवेन्यू दोगुने से अधिक बढ़कर 8,600 करोड़ रुपये हो गया, हालांकि कंपनी ने इस अवधि के लिए EBITDA या नेट प्रॉफिट का खुलासा नहीं किया।

30 हजार करोड़ रुपये का दांव

मोदी ने कहा, "हम सभी कैटेगरी में अपनी लीडरशिप बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। हमारा लॉन्ग-टर्म लक्ष्य FY 2030 तक इस बिजनेस को 1,00,000 करोड़ रुपये का बनाना है। हम अपनी क्षमताएं बढ़ा रहे हैं और लीडरशिप हासिल करने की दिशा में काम कर रहे हैं।"
RCPL सप्लाई चेन और मैन्युफैक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए 30,000 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है, जिसमें से 10,000 करोड़ रुपये पहले ही निवेश किए जा चुके हैं।

रिलायंस रिलायंस का डार्क स्टोर्स पर फोकस

वहीं रिलायंस ग्रुप की रिलायंस रिटेल अगले 9-12 महीनों में मार्केट में अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए 'डार्क स्टोर्स' का नेटवर्क बढ़ाना जारी रखेगी। साथ ही इन्वेस्टमेंट के मामले में सोच-समझकर कदम उठाएगी। ई-कॉमर्स में देर से कदम रखने के बावजूद, रिलायंस ने पिछले तीन-चार क्वार्टर में ऑर्डर वॉल्यूम में 100% से ज्यादा की ग्रोथ दर्ज की है।
ऑनलाइन चैनलों का बढ़ता योगदान कुल रेवेन्यू ग्रोथ को तेज करेगा, भले ही ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स में इन्वेस्टमेंट का असर शॉर्ट टर्म में मार्जिन पर पड़ रहा हो। पिछले क्वार्टर तक, ग्रॉसरी की बिक्री में ऑनलाइन का हिस्सा 13% से अधिक और कपड़ों व फुटवियर की बिक्री में 27% था।

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