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MMDR बिल पास होने से क्यों खुश हैं अनिल अग्रवाल? 50% बिक्री सीमा हटी, वेदांता जैसी माइनिंग कंपनियों के लिए क्या बदलेगा

Updated: Fri, 14 Aug 2026 06:36 PM (IST)

Anil Agarwal on MMDR Bill: मॉनसून सत्र में MMDR अमेंडमेंट बिल 2026 पास होने से वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल खुश हैं। यह बिल कैप्टिव माइंस से खनिज बेचने की 50% सीमा हटाता है और महत्वपूर्ण खनिजों की खोज व उत्पादन को बढ़ावा देगा।

MMDR बिल पास होने से क्यों खुश हैं अनिल अग्रवाल?

MMDR बिल पास होने से क्यों खुश हैं अनिल अग्रवाल? 

HighLights

  1. कैप्टिव माइंस से खनिज बिक्री की 50% सीमा हटी।

  2. महत्वपूर्ण खनिजों की खोज और उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा।

  3. अनिल अग्रवाल ने सरकार के कदम की सराहना की।

नई दिल्ली| मॉनसून सत्र के दौरान संसद में एक बिल पास हुआ। जिसका नाम है- MMDR अमेंडमेंट बिल 2026 । अब इसे लेकर वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल भी चर्चा में आ गए हैं। क्या है पूरा मामला? चलिए समझते हैं।

दरअसल, राज्यसभा ने गुरुवार, 13 अगस्त को माइन्स एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026 को मंजूरी दी। इससे एक दिन पहले लोकसभा ने इसे पास किया था। अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून बन जाएगा। इसका मकसद खास तौर पर क्रिटिकल और स्ट्रैटेजिक मिनरल्स की खोज और उत्पादन बढ़ाना है।

नए कानून से क्या बदल जाएगा?

संसद से MMDR Amendment Bill 2026 पास होते ही वेदांता के अनिल अग्रवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को बधाई दी। दरअसल, नए कानून में कैप्टिव माइंस से खनिज बेचने की 50% सीमा हटाने समेत ऐसे कई बदलाव किए गए हैं, जो माइनिंग कंपनियों के कारोबार का दायरा बढ़ा सकते हैं।

बिल में माइनिंग लीज धारकों को मौजूदा लीज में दूसरे खनिज जोड़ने की ज्यादा आजादी दी गई है। इसके लिए वे राज्य सरकार से संपर्क कर सकेंगे। खास बात यह है कि लिथियम, ग्रेफाइट, निकेल, कोबाल्ट, सोना और चांदी जैसे क्रिटिकल और तय खनिजों को मौजूदा लीज में शामिल करने पर अतिरिक्त रकम नहीं देनी होगी।

दूसरे खनिजों के लिए लागू रॉयल्टी के बराबर रकम देनी होगी। नीलामी वाली खदानों में अतिरिक्त खनिज पर लागू ऑक्शन प्रीमियम भी देना होगा। केंद्र सरकार नोटिफिकेशन के जरिए भुगतान की शर्तों में बदलाव कर सकेगी।

बिल नेशल मिनरल्स एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट (National Mineral Exploration Trust) का दायरा भी बढ़ाता है। अब यह सिर्फ खनिज खोज के बजाय खदानों और खनिजों के विकास के लिए भी फंड कर सकेगा और इसका नाम नेशनल मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट (National Mineral Exploration and Development Trust) किया जाएगा।

200 मीटर से ज्यादा गहराई में मिलने वाले खनिजों के लिए लीज क्षेत्र को एक बार बढ़ाने की भी अनुमति होगी। कंपोजिट लाइसेंस में क्षेत्र 30% और माइनिंग लीज में 10% तक बढ़ाया जा सकेगा।

साथ ही खनिजों और धातुओं की इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग के लिए Mineral Exchange को रजिस्टर और रेगुलेट करने वाली अथॉरिटी बनाने का प्रस्ताव है। सरकार का दावा है कि इन बदलावों से खनिज संसाधनों का आधार बढ़ेगा और क्रिटिकल मिनरल्स की खोज व उत्पादन को रफ्तार मिलेगी।

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नए कानून पर बोले अनिल अग्रवाल?

यही वजह है कि वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने सरकार के इस कदम की तारीफ की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि,

भारत के जमीन के नीचे मौजूद संसाधनों में जबरदस्त क्षमता है और सरकार उस क्षमता को इस्तेमाल करने पर ध्यान दे रही है। बदलावों से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बेहतर होगा, उत्पादन बढ़ेगा, बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होंगे और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।"