भारत में 'चीनी मिट्टी का शहर', जहां के बर्तनों के दीवाने जापान-UAE समेत 45 देश! मुगलों से भी पुराना यहां की कला का इतिहास
खुर्जा, उत्तर प्रदेश का एक शहर, भारत की 'सिरेमिक सिटी' के रूप में जाना जाता है, जहाँ 500 से अधिक ...और पढ़ें

बुलंदशहर का खुर्जा है सिरेमिक सिटी ऑफ इंडिया
HighLights
खुर्जा को भारत की 'सिरेमिक सिटी' कहा जाता है
यहां 500 से अधिक सिरेमिक फैक्ट्रियां मौजूद हैं
खुर्जा पॉटरी को 2008 में जीआई टैग मिला
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। आपने 'सिरेमिक' शब्द सुना है? जरूर सुना होगा। जिन लोगों ने सिरेमिक न सुना हो तो उन्होंने चीनी मिट्टी शब्द जरूर सुना होगा। सिरेमिक उन अकार्बनिक, नॉन-मेटालिक सॉलिड मैटेरियल्स को कहते हैं, जो प्राकृतिक या सिंथेटिक यौगिकों (जैसे मिट्टी या खनिजों) को आकार देकर और फिर उन्हें उच्च तापमान पर गर्म करके बनाए जाते हैं।
सिरेमिक से कई आइटम्स बनाए जाते हैं, जिनमें रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले बर्तन से लेकर इंडस्ट्रियल और सजावटी सामान तक शामिल हैं। इनमें प्लेट्स, कटोरे और बड़ी थालियाँ शामिल हैं। भारत में सिरेमिक आइटम्स का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। पर क्या आप जानते हैं कि भारत के किस शहर को सिरेमिक सिटी कहा जाता है? आइए बताते हैं।
ये है 'सिरेमिक सिटी ऑफ इंडिया'
खुर्जा यूपी का एक शहर है, जिसे "सिरेमिक सिटी" के नाम से जाना जाता है। भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के बुलंदशहर जिले का एक मशहूर शहर है खुर्जा, जहां बड़े पैमाने पर सिरेमिक और इससे बनी चीजों का उत्पादन होता है। यहाँ 500 से ज्यादा सिरेमिक फैक्ट्रियाँ हैं, जो भारत की पॉटरी, टेबलवेयर और इलेक्ट्रिकल इंसुलेटर का एक बड़ा हिस्सा बनाती हैं।
फारसी और मध्य एशियाई तकनीकों
खुर्जा दिल्ली से लगभग 85 किलोमीटर दूर, गंगा-यमुना के उपजाऊ इलाके में स्थित है। यहां सिरेमिक की कला छह सदियों से भी ज्यादा पुरानी है, यानी 14वीं या 15वीं सदी की और इसमें शुरुआती बसने वालों द्वारा लाई गई फारसी और मध्य एशियाई तकनीकों के साथ-साथ शाही डिजाइन का भी मेल है।
600 साल पुराना इतिहास
रिपोर्ट्स के अनुसार खुर्जा में ग्लेज्ड पॉटरी (चमकदार मिट्टी के बर्तन) की 600 साल पुरानी परंपरा है, जिसमें अक्सर हल्के सफेद बैकग्राउंड पर हाथ से बने नीले और भूरे रंग के फूलों के खास डिजाइन होते हैं। मजबूती और नैचुरल चमक के लिए इसमें स्थानीय मिट्टी के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों से लाई गई क्वार्ट्ज और फेल्डस्पार का इस्तेमाल किया जाता है।
इन देशों में होता है निर्यात
खुर्जा में EU REACH और FDA के मानकों को पूरा करने के लिए पर्यावरण के अनुकूल ग्लेज और लेड-फ्री फिनिश का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। खुर्जा से अमेरिका, UK, UAE, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, जापान और फ्रांस समेत 45 से अधिक देशों में एक्सपोर्ट किया जाता है।
रोजगार और टोटल बिजनेस
खुर्जा में जितनी सिरेमिक फैक्ट्रियां हैं, उनमें 25000 से अधिक लोग काम करते हैं। यहां से सालाना कई अरब रुपये का काम होता है। 2008 में, खुर्जा पॉटरी को भारत के GI एक्ट और अंतरराष्ट्रीय TRIPS समझौते के तहत रजिस्टर करके 'जियोग्राफिकल इंडिकेशन' (GI) टैग दिया गया था।
GI टैग ऐसी कला या शिल्प को मान्यता देता है जो किसी खास जगह से जुड़ी हो और जिसे पारंपरिक या क्षेत्रीय तरीकों से बनाया गया हो।
