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Yamuna Expressway बनाने वाली JP ग्रुप की स्टोरी: सरकारी इंजीनियर का साम्राज्य, आज अदाणी के हाथों में कमान

Published: Sat, 07 Nov 2026 12:23 PM (IST)Updated: Sat, 07 Nov 2026 02:19 PM (IST)

जयप्रकाश गौड़ द्वारा स्थापित जेपी एसोसिएट्स, जिसने यमुना एक्सप्रेसवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट बनाए, कर्ज के बोझ तले दबकर दिवालिया हो ...और पढ़ें

जयप्रकाश गौड़ ने सरकारी नौकरी छोड़ जेपी एसोसिएट्स स्थापना की थी।

जयप्रकाश गौड़ ने सरकारी नौकरी छोड़ जेपी एसोसिएट्स स्थापना की थी।

HighLights

  1. जयप्रकाश गौड़ ने सरकारी नौकरी छोड़ जेपी एसोसिएट्स की स्थापना की।

  2. कंपनी ने यमुना एक्सप्रेसवे जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बनाए।

  3. भारी कर्ज के कारण जेपी एसोसिएट्स दिवालिया हुई, अदाणी ने अधिग्रहण किया।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड यानी जेपी समूह का नाम अब खत्म हो चुका है। यह कंपनी दिवालिया होकर गौतम अदाणी के हाथों बिक चुकी है। लेकिन एक समय था जब उत्तर भारत में इस कंपनी की तूती बोलती थी। एक समय था जब जयप्रकाश एसोसिएट्स (JP Associates) का नाम देश की बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों में शामिल था। सड़क, बांध, बिजली, सीमेंट, रियल एस्टेट और होटल जैसे कई क्षेत्रों में कंपनी का कारोबार फैला हुआ था। उत्तर प्रदेश को आगरा से जोड़ने वाला यमुना एक्सप्रेसवे भी इसी ग्रुप की कंपनी ने बनाया था। लेकिन जिस कंपनी ने देश में बड़े-बड़े प्रोजेक्ट खड़े किए, वह एक दिन खुद कर्ज के बोझ तले दब गई।

यह कंपनी एक नाम नहीं बल्कि लोगों का इमोशन थी। इसमें बहुत से रिटेल निवेशकों ने पैसा लगाया था। इसके साथ इस कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों ने अपने मालिक पर भरोसा करके निवेश किया था। मालिक उनके भरोसे पर खरा उतरने की पुरजोर कोशिश की। लेकिन कर्ज के जाल में कंपनी ऐसा डूबी कि फिर उबर नहीं पाई और अंतत: बैंकों ने कंपनी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया चलाने के लिए NCLT में अपील की और उनकी अपील को मंजूर भी कर लिया गया। और आखिर में 2025 में अदाणी ग्रुप ने इसे खरीदने की बोली जीती और मार्च 2026 में NCLT ने फाइनल मंजूरी दी। लेकिन आज जानेंगे कि कैसे यह कंपनी शुरू हुई और किसने शुरू की और कैसे इसका अंत हुआ।

UP का सरकारी इंजीनियर बना बिजनेसमैन

जयप्रकाश गौड़ का जन्म 1931 में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में हुआ था। उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा हासिल किया और इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर नौकरी शुरू की।

सरकारी नौकरी के दौरान उन्होंने कई निर्माण परियोजनाओं को करीब से देखा। लेकिन उनके मन में अपना कारोबार शुरू करने की इच्छा थी। करीब सात साल नौकरी करने के बाद उन्होंने सरकारी सेवा छोड़ दी और ठेकेदारी के काम में उतर गए।

शुरुआत आसान नहीं थी। गौड़ ने अपनी करीब 10 हजार रुपये की जमापूंजी से छोटे-मोटे सड़क और निर्माण कार्यों के ठेके लेने शुरू किए। धीरे-धीरे उन्हें बड़े प्रोजेक्ट मिलने लगे। साल 1979 में उन्होंने जयप्रकाश एसोसिएट्स की नींव रखी। शुरुआत में कंपनी का मुख्य काम निर्माण और इंजीनियरिंग से जुड़ा था।

आगे चलकर कंपनी ने बड़े बांध और हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम किया। टिहरी बांध और विष्णुप्रयाग जैसी जलविद्युत परियोजनाओं से जेपी ग्रुप की पहचान मजबूत हुई। इसके बाद कंपनी ने सीमेंट, बिजली, होटल और रियल एस्टेट जैसे कारोबार में भी कदम रखा।

यमुना एक्सप्रेसवे JP ने था बनाया

जेपी ग्रुप के लिए सबसे बड़ा मोड़ साल 2003 में आया, जब उसे ग्रेटर नोएडा से आगरा तक यमुना एक्सप्रेसवे बनाने का प्रोजेक्ट मिला। करीब 165 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का निर्माण जेपी इंफ्राटेक ने किया। परियोजना के साथ एक्सप्रेसवे के आसपास रियल एस्टेट विकसित करने के अधिकार भी मिले।

इस प्रोजेक्ट ने जेपी ग्रुप को देशभर में पहचान दिलाई। साल 2012 में यमुना एक्सप्रेसवे आम लोगों के लिए खोल दिया गया। इसके बाद कंपनी ने रियल एस्टेट, सीमेंट, बिजली और होटल कारोबार में तेजी से विस्तार किया।

ग्रुप ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बड़े रियल एस्टेट प्रोजेक्ट शुरू किए। इसके अलावा ग्रेटर नोएडा में बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट भी बनाया, जहां फॉर्मूला-1 रेस का आयोजन हुआ। कंपनी का कारोबार लगातार बढ़ रहा था और एक समय जेपी ग्रुप देश के बड़े कारोबारी घरानों में गिना जाने लगा।

शुरू हुआ डाउनफाल

साल 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी ने कंपनी की मुश्किलें बढ़ा दीं। इसके बाद भारतीय रियल एस्टेट बाजार में भी सुस्ती आने लगी। घरों की बिक्री प्रभावित हुई और निर्माण परियोजनाओं से पैसा आने में देरी होने लगी।

दूसरी तरफ बिजली और सीमेंट कारोबार में भी कंपनी को उम्मीद के मुताबिक कमाई नहीं हो रही थी। बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट जैसे बड़े प्रोजेक्ट में किया गया निवेश भी कंपनी पर आर्थिक दबाव बढ़ाने वाला साबित हुआ।

कर्ज चुकाने के लिए कंपनी को अपनी कई संपत्तियां और कारोबार बेचने पड़े। इसके बावजूद उसकी वित्तीय स्थिति में सुधार नहीं हुआ। कंपनी की सबसे बड़ी समस्या यह थी कि उसके पास कर्ज चुकाने के लिए पर्याप्त नकदी नहीं बची थी।

घर खरीदारों से लेकर बैंकों तक, हर तरफ बढ़ी परेशानी

जेपी ग्रुप की मुश्किलें केवल बैंकों तक सीमित नहीं रहीं। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कंपनी के कई रियल एस्टेट प्रोजेक्ट भी प्रभावित हुए।

खासकर जेपी विशटाउन जैसे प्रोजेक्ट में हजारों घर खरीदारों का पैसा फंस गया। कई लोगों ने घर खरीदने के लिए अपनी जीवनभर की बचत लगा दी थी, लेकिन उन्हें तय समय पर मकान नहीं मिल पाए।

और शुरू हुई दिवालिया प्रक्रिया़

कंपनी की सहायक इकाई जेपी इंफ्राटेक के खिलाफ अगस्त 2017 में दिवालिया प्रक्रिया शुरू हुई। बाद में सुरक्षा ग्रुप ने इस कंपनी के समाधान की जिम्मेदारी संभाली।

हालांकि, मुसीबत यहीं खत्म नहीं हुई। ग्रुप की प्रमुख कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) भी भारी कर्ज के कारण संकट में आ गई। 3 जून 2024 को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की इलाहाबाद पीठ ने कंपनी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया। इस मामले में वित्तीय लेनदारों ने करीब 57,185 करोड़ रुपये के बकाये का दावा किया था।

कर्जदाताओं ने अदाणी को चुना

सितंबर 2025 में खबर आई थी कि वेदांता ग्रुप ने 17,000 करोड़ रुपये से अधिक की बोली लगाकर अदाणी ग्रुप को पीछे छोड़ दिया है। उस समय ऐसा लग रहा था कि कंपनी की कमान अनिल अग्रवाल के हाथों में जाएगी।

हालांकि, बाद में दिवालिया समाधान प्रक्रिया में तस्वीर बदल गई। नवंबर 2025 में कर्जदाताओं ने अदाणी एंटरप्राइजेज की 14,535 करोड़ रुपये की समाधान योजना को मंजूरी दे दी। अदाणी ग्रुप को कर्जदाताओं के करीब 89 फीसदी वोट मिले।

इसके बाद 17 मार्च 2026 को NCLT की इलाहाबाद पीठ ने अदाणी एंटरप्राइजेज की समाधान योजना को मंजूरी दे दी। इस तरह जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण का रास्ता अदाणी ग्रुप के लिए साफ हो गया। हालांकि, वेदांता ने इसे नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) चैलेंज किया। NCLAT ने वेदांता की अपील को मई में रिजेक्ट कर दिया।

अब अदाणी ग्रुप चला रहें जेपी एसोसिएट्स

जेपी एसोसिएट्स की कंपनियों को अब अदाणी ग्रुप चला रहे हैं। अदाणी ग्रुप ने अपनी अलग-अलग कंपनियों के जरिए जेपी की कंपनियों में हिस्सेदारी ले रहे हैं। जैसे अदाणी पावर ने जेपी पावर में जेपी एसोसिएट्स की 24 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी। इसके अलावा अदाणी ने जेपी के मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ सीमेंट प्लांट डालमिया को बेच दिया। कुलमिलाकर अब जेपी समूह का नाम खत्म हो चुका है। अब अदाणी इसके मालिक हैं।

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