50 गुना बढ़ी ताकत, अमेरिका को पछाड़ भारत सोलर एनर्जी में बना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाजार
जुलाई 2026 में भारत की बिजली खपत में 11% की वृद्धि हुई, जबकि कोल इंडिया ने कोयला आपूर्ति में महत्वपूर्ण योगदान दिया। देश की सौर ऊर्जा क्षमता एक दशक मे ...और पढ़ें

भारत सोलर एनर्जी में बना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाजार।
HighLights
जुलाई 2026 में बिजली खपत में 10.93% की वृद्धि दर्ज।
सौर ऊर्जा क्षमता एक दशक में 50 गुना बढ़कर 1.62 लाख मेगावाट।
भारत सालाना सौर क्षमता वृद्धि में अमेरिका को पछाड़ दूसरा बाजार।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। जुलाई 2026 में भारत की बिजली खपत में लगभग 11 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई, जबकि मानसून के बावजूद कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने कोयला उत्पादन और आपूर्ति में उल्लेखनीय प्रदर्शन करके बिजली आपूर्ति व्यवस्था को बनाये रखने में अहम भूमिका निभाई है। साथ ही सौर ऊर्जा क्षेत्र में भी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई।
देश की स्थापित सौर क्षमता में पिछले एक दशक में 50 गुना वृद्धि हुई है और भारत सालाना क्षमता वृद्धि के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़कर दुनिया का दूसरा सबसे तेज बढ़ता सौर ऊर्जा बाजार बन गया है।
आंकड़ें बता रहे हैं कि उच्च आर्द्रता के कारण कूलिंग उपकरणों की मांग बढ़ी है जिसने बिजली की खपत और पीक डिमांड को बढ़ाया है, जबकि घरेलू कोयला आपूर्ति ने ताप बिजली संयंत्रों को मजबूती दी है व नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र ने नई ऊंचाइयां छू लीं। ऐसे में बिजली मंत्रालय की नजर अगस्त माह में बिजली आपूर्ति को चुस्त बनाने पर है।
बिजली मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार जुलाई 2026 में देश की कुल बिजली खपत 170.70 अरब यूनिट (बीयू) रही, जो पिछले वर्ष जुलाई 2025 के 153.88 बीयू की तुलना में 10.93 प्रतिशत अधिक है।
विशेषज्ञों का कहना है कि देश के कई हिस्सों में उच्च आर्द्रता के कारण वास्तविक तापमान से अधिक गर्मी महसूस की गई है। इस वजह से एयर कंडीशनर जैसे कूलिंग उपकरणों का उपयोग तेजी से बढ़ा और बिजली की मांग व खपत दोनों में इजाफा हुआ। पीक पावर डिमांड भी जुलाई में 270.20 गीगावाट पहुंच गई, जो जुलाई 2025 के 220.74 गीगावाट से काफी अधिक है। यह स्तर मई में दर्ज किए गए रिकार्ड मांग 270.82 गीगावाट के लगभग करीब रहा।
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पिछले साल मई में पीक डिमांड 230.99 गीगावाट थी, जबकि जून 2025 में यह 242.77 गीगावाट रही थी। वैसे सरकार ने इस साल अधिकतम 277 गीगावाट बिजली की मांग जाने का अनुमान लगाया हुआ है।
कोयला क्षेत्र में भी जुलाई में मजबूत प्रदर्शन देखने को मिला। भारत का कोयला उत्पादन जुलाई 2026 में सालाना आधार पर 7.51 फीसद बढ़कर 6.97 करोड़ टन पहुंच गया, जबकि कोयला डिस्पैच (ताप बिजली संयंत्रों को आपूर्ति) में 17 फीसद की तेजी देखी गई है। यह 8.63 करोड़ टन रहा। इसका श्रेय कोल इंडिया को प्रमुख तौर पर जाता है।
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उत्पादन की तुलना में डिस्पैच में ज्यादा वृद्धि थर्मल पावर की मजबूत मांग को दिखाता है। इस दौरान पावर प्लांट्स के भंडारण बढ़ा है, पिटहेड इन्वेंटरी का दबाव कम हुआ और कई हिस्सो में मानसून के देर से पहुंचने का भी फायदा मिला है। घरेलू उपलब्धता बढ़ने से महंगे आयातित कोयले पर निर्भरता घटी, जिससे सीमेंट, स्टील और कैप्टिव पावर प्लांट्स जैसे उद्योगों को फायदा हुआ है। पावर एक्सचेंज (जैसे आईईएक्स) पर ग्रिड बिजली की स्पाट कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।
आंकड़ें बताते हैं कि इस माह सौर ऊर्जा क्षेत्र में भी नई ऊंचाइयां गढ़ी गई हैं। सरकार की तरफ से जारी फैक्टशीट के अनुसार, भारत की स्थापित सौर बिजली क्षमता 2014 में मात्र 3000 मेगावाट (तीन गीगावाट) से बढ़कर 30 जून 2026 तक 1.62 लाख मेगावाट पहुंच गई है, जो 50 गुना ज्यादा है।
वर्ष 2025 में अकेले 37 गीगावाट सौर क्षमता जोड़ी गई, जिससे भारत सालाना वृद्धि के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़कर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सौर ग्रोथ मार्केट बन गया। भारतीय सौर ऊर्जा प्लांट में टैरिफ में जितनी गिरवाट आई है, उतनी और किसी देश में नहीं देखी गई। 2010 में लगभग 18 रुपये प्रति यूनिट से घटकर यह 2.44 रुपये प्रति यूनिट पर आ गया है।