सर्च करे
Home
फोकस

Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    नवरत्न शिपबिल्डर कंपनी को मिला अब तक का सबसे बड़ा टेंडर, ₹6858 करोड़ में बनाएगी 6 महाकाय जहाज

    By Jagran BusinessEdited By: Ashish Kushwaha
    Updated: Sat, 08 Aug 2026 07:19 PM (IST)

    भारतीय नौवहन कंपनी एससीआई ने 6,858 करोड़ रुपये की लागत से 6 आधुनिक कंटेनर जहाजों के निर्माण के लिए अब तक का सबसे बड़ा वैश्विक टेंडर जारी किया है। ...और पढ़ें

    एससीआई ने जारी किया 6858 करोड़ का सबसे बड़ा जहाज निर्माण टेंडर भारतीय शिपयार्ड को मिलेगा बढ़ावा

    एससीआई ने जारी किया 6858 करोड़ का सबसे बड़ा जहाज निर्माण टेंडर भारतीय शिपयार्ड को मिलेगा बढ़ावा

    HighLights

    1. एससीआई ने 6,858 करोड़ रुपये का सबसे बड़ा वैश्विक टेंडर जारी किया।

    2. छह आधुनिक 8,000 टीईयू कंटेनर जहाजों का होगा निर्माण।

    3. भारतीय शिपयार्ड्स को मिलेगी विशेष प्राथमिकता, 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा।

    नई दिल्ली (आईएएनएस)। देश की प्रमुख सरकारी नौवहन कंपनी शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एससीआई) ने अब तक का सबसे बड़ा वैश्विक जहाज निर्माण टेंडर जारी किया है। कंपनी ने लगभग 720 मिलियन डॉलर (करीब 6,858 करोड़ रुपये) की लागत से छह आधुनिक कंटेनर जहाजों के निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय निविदा आमंत्रित की है। इस कदम को भारत की समुद्री परिवहन क्षमता बढ़ाने और घरेलू जहाज निर्माण उद्योग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    मरीन इनसाइट की रिपोर्ट के अनुसार, इस टेंडर के तहत 6 सेल्युलर कंटेनर पोत बनाए जाएंगे, जिनमें से प्रत्येक की क्षमता 8,000 ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट (टीईयू) होगी। टीईयू कंटेनर जहाजों की माल ढुलाई क्षमता मापने की एक मानक इकाई है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, छह जहाजों में से दो जहाजों का ऑर्डर पक्का होगा, जबकि शेष चार जहाज वैकल्पिक श्रेणी में रखे गए हैं। इससे एससीआई को भविष्य की जरूरतों और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार अतिरिक्त जहाजों का ऑर्डर देने की सुविधा मिलेगी।

    टेंडर की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें भारतीय शिपयार्ड्स को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इसके लिए राइट ऑफ फर्स्ट रिफ्यूजल (आरओएफआर) व्यवस्था लागू की गई है। इस व्यवस्था के तहत यदि किसी विदेशी शिपयार्ड की बोली सबसे कम रहती है, तो योग्य भारतीय शिपयार्ड को उस कीमत का मिलान करने का अवसर दिया जाएगा।

    खबरें और भी

    यदि पहला पात्र भारतीय शिपयार्ड विदेशी कंपनी की बोली से मेल नहीं खा पाता, तो यह अवसर अगले योग्य भारतीय शिपयार्ड को दिया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य घरेलू जहाज निर्माण उद्योग को प्रोत्साहित करना और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच भारतीय कंपनियों को मजबूत बनाना है।

    एससीआई ने उन भारतीय शिपयार्ड्स के लिए भी रास्ता खोला है, जिनके पास बड़े कंटेनर जहाज बनाने का पूर्व अनुभव नहीं है। ऐसे शिपयार्ड अनुभवी विदेशी जहाज निर्माताओं के साथ तकनीकी साझेदारी कर इस टेंडर में भाग ले सकते हैं।

    टेंडर की शर्तों के अनुसार, विदेशी तकनीकी साझेदार ने पिछले 10 वर्षों में कम से कम दो कंटेनर जहाज (5,000 टीईयू या उससे अधिक क्षमता वाले) सफलतापूर्वक बनाए और डिलीवर किए हों। साथ ही वे जहाज वर्तमान में संचालन में होने चाहिए। विदेशी साझेदार को निर्माण प्रक्रिया के दौरान बुनियादी और विस्तृत डिजाइन सहायता भी प्रदान करनी होगी।

    सेल्युलर कंटेनर जहाज विशेष रूप से मानकीकृत कंटेनरों के परिवहन के लिए डिजाइन किए जाते हैं, जिनमें ऊर्ध्वाधर गाइड रेल और स्लॉट होते हैं, जिनकी मदद से 20 फुट और 40 फुट के कंटेनरों को सुरक्षित रूप से एक के ऊपर एक रखा जा सकता है। इससे माल परिवहन अधिक सुरक्षित और कुशल बनता है।

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस परियोजना में भाग लेने वाले भारतीय शिपयार्ड केंद्र सरकार की 24,736 करोड़ रुपए की शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस स्कीम (एसबीएफएएस) का लाभ उठा सकते हैं। इस योजना के तहत प्रत्येक जहाज के निर्माण पर 15 से 25 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

    यह योजना वर्ष 2025 में घोषित 69,725 करोड़ रुपए के समुद्री क्षेत्र पैकेज का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भारतीय शिपयार्ड्स की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाना और उन्हें वैश्विक जहाज निर्माण कंपनियों के मुकाबले मजबूत बनाना है।