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    बैंक का ये 125 साल पुराना नियम होगा खत्म! संसद में पेश होगा नया बिल; जानिए क्या-क्या बदलने वाला है?

    Updated: Mon, 03 Aug 2026 02:29 PM (IST)

    Bankers' Books evidence bill 2026: सरकार 125 साल पुराने 'बैंकर्स बुक्स एविडेंट एक्ट, 1891' को बदलने के लिए संसद में 'बैंकर्स बुक्स एविडेंट बिल, 2026' ...और पढ़ें

    बैंकिग से जुड़ा होगा बड़ा बदलाव!

    बैंकिग से जुड़ा होगा बड़ा बदलाव!

    HighLights

    1. 'विशेष कारण' अवधारणा से बैंक अधिकारियों को बेवजह मुकदमों से सुरक्षा।

    2. 'बैंकर्स बुक्स' की परिभाषा में सभी डिजिटल रिकॉर्ड शामिल होंगे।

    3. इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की प्रामाणिकता के लिए मानकीकृत प्रावधान लाए जाएंगे।

    नई दिल्ली: अदालतों में बैंक रिकॉर्ड्स को सबूत के तौर पर पेश करने से जुड़े 125 साल से भी ज्यादा पुराने औपनिवेशिक युग (colonial era) के कानून को सरकार अब बदलने जा रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज संसद में "बैंकर्स बुक्स एविडेंट बिल, 2026 (bankers' books evidence bill 2026) " पेश करेंगी। यह नया बिल 1891 के 'बैंकर्स बुक्स एविडेंट एक्ट' की जगह लेगा।

    नया कानून लाने की जरूरत क्यों पड़ी?

    यह बिल ऐसे समय में लाया जा रहा है जब डिजिटल बैंकिंग का तेजी से विस्तार हुआ है और साइबर वित्तीय धोखाधड़ी (जैसे ऑनलाइन स्कैम और डिजिटल अरेस्ट के मामले) में भारी वृद्धि हुई है। इसका उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड-कीपिंग और डिजिटल फाइनेंशियल लेनदेन की वास्तविकताओं को दर्शाने के लिए बैंकिंग साक्ष्य (evidence) से जुड़े कानूनी ढांचे को आधुनिक बनाना है। 3 अगस्त के 'लिस्ट ऑफ बिजनेसेस' के अनुसार, प्रस्तावित कानून का उद्देश्य बैंकरों की किताबों के संबंध में साक्ष्य से संबंधित कानून प्रदान करना और इसे समकालीन (contemporary) डिजिटल बैंकिंग प्रथाओं के साथ जोड़ना है।

    बिल के मुख्य प्रावधान


    1. विशेष कारण

    इस प्रस्तावित कानून की एक प्रमुख विशेषता 'विशेष कारण' (Special Cause) की अवधारणा (concept) को पेश करना है। इसके तहत, यदि बैंक खुद किसी मुकदमे का हिस्सा (party) नहीं है, तो अदालत केवल एक लिखित आदेश के माध्यम से ही किसी बैंक अधिकारी को बैंक के रिकॉर्ड पेश करने या गवाह के रूप में उपस्थित होने के लिए मजबूर कर सकती है। इससे बैंक अधिकारियों को बेवजह मुकदमों में घसीटे जाने से बचाया जा सकेगा, यह सुनिश्चित करते हुए कि उन्हें केवल इसलिए कोर्ट में नहीं बुलाया जा रहा क्योंकि उनके पास ग्राहकों का रिकॉर्ड है।

    'विशेष कारण' में वो परिस्थितियां शामिल हैं जहां बैंक की किताबों में दर्ज किसी प्रविष्टि (entry) की सटीकता या प्रामाणिकता पर संदेह हो, या ऐसा लगे कि बैंक की सामान्य रिकॉर्ड-कीपिंग प्रक्रिया बाधित हुई है, या बैंक किसी कानूनी आदेश का पालन करने में विफल रहा हो। अदालतों को वास्तविक मामलों में बैंकिंग रिकॉर्ड तक पहुंच मिलती रहेगी, लेकिन ऐसा करने के लिए उन्हें विशिष्ट कारण दर्ज करने होंगे।

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    2. 'बैंकर्स बुक्स' की नई परिभाषा

    नए कानून में 'बैंकर्स बुक्स' की परिभाषा का दायरा बढ़ा दिया गया है। अब इसमें फिजिकल, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, वर्चुअल, क्लाउड-बेस्ड या किसी भी अन्य रूप में रखे गए रिकॉर्ड शामिल होंगे। यह एक टेक्नोलॉजी-न्यूट्रल कानूनी ढांचा तैयार करेगा जो भविष्य में बैंकिंग में होने वाली एडवांसमेंट को भी अकोमोडेट कर सकेगा।

    3. इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की प्रामाणिकता

    इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के उपयोग को सुविधाजनक बनाने के लिए, यह बिल मानकीकृत (standardised) सर्टिफिकेशन फॉर्मेट प्रदान करता है। यह मैनुअल, डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर के माध्यम से प्रमाणीकरण (authentication) की अनुमति देता है। इन इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग रिकॉर्ड्स को अदालत में फिजिकल या इलेक्ट्रॉनिक दोनों रूपों में पेश किया जा सकेगा।

    4. सरकार को अतिरिक्त अधिकार

    बिल का एक अन्य प्रावधान केंद्र सरकार को यह अधिकार देता है कि वह निर्धारित शर्तों के अधीन, वित्तीय क्षेत्र में काम करने वाली अन्य संस्थाओं या संस्थाओं के वर्गों पर भी इस कानून को लागू कर सकती है।

    पुराना कानून क्या था?

    मौजूदा अधिनियम 1891 में इसलिए लागू किया गया था ताकि मूल लेजर (original ledgers) पेश किए बिना ही बैंक रिकॉर्ड की प्रमाणित प्रतियों (certified copies) को अदालतों में साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जा सके।

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