स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आई बड़ी खुशखबरी! लाखों टन यूरिया से लदा जहाज भारत की ओर निकला
पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण फंसे फर्टिलाइजर जहाजों में से एक यूरिया जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से भारत के लिए रवाना हो गया है। अगले 7-9 दिनों में इसके ...और पढ़ें

युद्ध में फंसा खाद से लदा जहाज भारत की तरफ निकला (AI Image)
HighLights
एक यूरिया जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से भारत के लिए रवाना।
अगले 7-9 दिनों में पूर्वी तट पर पहुंचने की उम्मीद।
सरकार ने 17 लाख टन यूरिया आयात को मंजूरी दी।
नई दिल्ली| खरीफ सीजन की बुवाई से पहले भारत के किसानों को बड़ी खुशखबरी मिली है। पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से फर्टिलाइजर से लदे 16 जहाज रास्ते में फंसे हैं। जिनमें से एक जहाज यूरिया ले कर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होकर चल पड़ा है। अगले 7-9 दिनों में पूर्वी तट के किसी बंदरगाह पर पहुंचने की उम्मीद है। इंडस्ट्री के सूत्रों ने बताया कि यूरिया ले जा रहे 7 और जहाज भी अगले कुछ दिनों में भारत के लिए रवाना होंगे।
3 लाख टन यूरिया भारत पहुंचने की उम्मीद
बिजनेसलाइन में छपी खबर के अनुसार इंडस्ट्री के एक सूत्र ने कहा, "यूरिया लाने वाला पहला जहाज, जिसके मार्च के बीच में आने की उम्मीद थी वो युद्ध के कारण फंस गया। यह यूरिया RCF के उस इंपोर्ट टेंडर का हिस्सा है जिसे सरकार ने फरवरी के बीच में मंजूरी दी थी। एक बार जब यह होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर लेगा, तो दूसरे जहाज भी चलने लगेंगे।" उन्होंने आगे कहा कि 15 जुलाई तक 3 लाख टन (lt) इंपोर्टेड यूरिया भारत पहुंच सकता है।
अलग-अलग तरह के फर्टिलाइजर (खाद) ले जा रहे 16 जहाज जिनमें 8 में 3.3 लाख टन यूरिया, 4 में 2.6 लाख टन DAP, 3 में 1.1 लाख टन सल्फर और 1 जहाज में अमोनिया था। ये सभी जहाज भारत पहुंचने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने का इंतजार कर रहे थे।
17 लाख टन खाद इंपोर्ट के टेंडर को मंजूरी
रिपोर्ट के मुताबिक खाद मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी वंदना प्रेयशी ने पहले कहा था कि 1 मार्च से भारतीय कंपनियों ने 50 लाख टन खाद इम्पोर्ट करने का कॉन्ट्रैक्ट किया है, जिसमें से 21.95 लाख टन यूरिया और 4.18 लाख टन DAP देश में आ चुका है। उन्होंने यह भी कहा था कि सरकार NFL के 17 लाख टन और खाद के इम्पोर्ट टेंडर के लिए मंजूरी की प्रक्रिया पूरी कर रही है। NFL, सरकारी खाते पर यूरिया इम्पोर्ट करने वाली तीन कैनालाइजिंग एजेंसियों में से एक है।
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8 जून को NFL की ओर से बोलियां खोले जाने के बाद, ट्रेडर्स/सप्लायर्स की तरफ से दी गई सबसे कम दरें वेस्ट कोस्ट के लिए $449 प्रति टन और ईस्ट कोस्ट डिलीवरी (CFR) के लिए $445 प्रति टन थीं। ये दरें अप्रैल के टेंडर की तुलना में काफी कम थीं, जब सरकार ने वेस्ट कोस्ट के लिए $935 प्रति टन और ईस्ट कोस्ट डिलीवरी के लिए $959 प्रति टन की दर से 25 लाख टन यूरिया इम्पोर्ट करने पर सहमति जताई थी।
सबसे कम दरों पर यूरिया आयात को मंजूरी
सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने NFL के जरिए सबसे कम दरों पर लगभग 17 लाख टन यूरिया आयात करने की मंजूरी दे दी है। व्यापारिक सूत्रों का यह भी कहना है कि 8 जून को मिली दरों की तुलना में आयातित यूरिया की कीमत में लगभग $15 प्रति टन की और गिरावट आई है, जिससे मौजूदा दर जून 2025 के स्तर पर आ गई है, जब औसत FOB दर $395 प्रति टन थी। हालांकि, कुछ अन्य लोगों का कहना है कि अब तक गिरावट इतनी ज्यादा नहीं है। लेकिन सभी ने माना कि एशिया में यूरिया की आयात मांग धीमी हो गई है और ऑस्ट्रेलिया ने पहले ही घोषणा कर दी है कि वह मौजूदा फसल सीजन में आयात नहीं करेगा।
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मार्च- 14 जून तक 39.36 लाख टन आयात
सरकार ने पहले कहा था कि भारत ने इस साल 1 मार्च से 14 जून के बीच कुल 39.36 लाख टन फर्टिलाइजर का आयात किया और 123.65 लाख टन का घरेलू उत्पादन किया, जिससे इनकी उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिली। भारत ने ओमान, मलेशिया, वियतनाम, जॉर्जिया, नाइजीरिया, रूस, फ़िनलैंड, मिस्र, अल्जीरिया, तुर्की और नीदरलैंड से यूरिया की सप्लाई हासिल की है, जबकि युद्ध के बाद रूस, मोरक्को, मिस्र, अमेरिका, जॉर्डन, दक्षिण कोरिया, ट्यूनीशिया और सऊदी अरब से DAP और कॉम्प्लेक्स (N, P, K, S पोषक तत्वों का मिश्रण) फर्टिलाइजर का आयात किया गया है।