IDBI Bank Disinvestment: देश की सबसे बड़ी FDI डील को मिली हरी झंडी! जानिए 15 सवालों में सब कुछ
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने IDBI बैंक में 60.72% हिस्सेदारी कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की सहायक कंपनी को बेचने की मंजूरी ...और पढ़ें

IDBI बैंक FDI से जुड़ी सारी जानकारी
HighLights
IDBI बैंक में 60.72% हिस्सेदारी बेचने को मंजूरी मिली।
कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की सहायक कंपनी खरीदार।
यह भारत का सबसे बड़ा वित्तीय क्षेत्र का FDI सौदा है।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। 6 दशक से भी पुराने भारतीय बैंक को बेचने की मंजूरी दे दी गई है। केंद्रीय मंत्रिमंडल (CCEA) की ओर 14 अक्टूबर 2026 को IDBI बैंक में 60.72% हिस्सेदारी कनाडा की कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स (Fairfax Financial Holdings) की सब्सिडियरी कंपनी को बेचने की मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा, "हमें ऐसे संगठनों की जरूरत है जो उद्यमियों के लिए ग्रोथ कैपिटल की जरूरतें पूरी कर सकें।" बता दें कि ये भारत के वित्तीय क्षेत्र का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) सौदा है।
इस FDI से जुड़ी 15 महत्वपूर्ण बातें जान लेते हैं।
सवाल 1. IDBI बैंक का नया रणनीतिक खरीदार कौन है?
जवाब: IDBI बैंक के लिए कनाडा की कंपनी 10955230 Canada Inc. को रणनीतिक खरीदार के रूप में मंजूरी दी गई है। इसकी मूल कंपनी Fairfax Financial Holdings Ltd. है।
सवाल 2. IDBI बैंक का यह सौदा कितने रुपये में हुआ है?
जवाब: इस सौदे की कुल कीमत ₹52,878.08 करोड़ है। इसके तहत बैंक की 60.72 फीसदी हिस्सेदारी बेची जा रही है।
सवाल 3. इस सौदे में केंद्र सरकार और LIC की कितनी-कितनी हिस्सेदारी बिकेगी?
जवाब: केंद्र सरकार अपनी 30.48% और LIC अपनी 30.24% हिस्सेदारी बेचेगी। दोनों की कुल 60.72 फीसदी हिस्सेदारी बेची जा रही है। सौदे से मिलने वाली रकम भी दोनों को उनकी बेची गई हिस्सेदारी के अनुपात में मिलेगी।
सवाल 4. IDBI बैंक को खरीदने की प्रक्रिया में कितनी कंपनियों ने हिस्सा लिया?
जवाब: शुरुआत में पांच कंपनियों या पक्षों ने बैंक को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई थी। इनमें से चार निर्धारित शर्तों पर खरे उतरे। बाद में दो पक्षों ने तकनीकी और वित्तीय बोलियां जमा कीं और योग्य बोलीदाता बने।
सवाल 5. IDBI बैंक की कीमत तय करने के लिए कौन-से तरीके अपनाए गए?
जवाब: बैंक की कीमत का आकलन करने के लिए दो तरीके अपनाए गए।
- मार्केट मल्टीपल मेथड: दूसरे बैंकों के बाजार मूल्यांकन से तुलना करके कीमत का आकलन करना।
- एसेट वैल्यूएशन मेथड: बैंक की संपत्तियों और देनदारियों का मूल्यांकन करके उसकी वास्तविक शुद्ध संपत्ति का मूल्य निकालना।
सवाल 6. IDBI बैंक की कीमत का इवैलुएशन किसने किया?
जवाब: बैंक का मूल्यांकन (Evaluation) करने के लिए दो स्वतंत्र और Professional valuation agencies नियुक्त की गई थीं। प्रक्रिया में गोपनीयता की शर्तों के कारण इन एजेंसियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
सवाल 7. IDBI बैंक के शेयर की बाजार कीमत को Evaluation में आधार क्यों नहीं बनाया गया?
जवाब: बैंक के शेयर की बाजार कीमत में काफी उतार-चढ़ाव था। मूल्यांकन की अवधि में शेयर की कीमत 61.01 रुपये से 118.38 रुपये के बीच रही। सरकार के मुताबिक, केवल इस कीमत के आधार पर बैंक का सही मूल्य तय करना उचित नहीं था। इसलिए दूसरे पब्लिक सेक्टर के बैंकों से तुलना करने वाले तरीके का इस्तेमाल किया गया।
सवाल 8. IDBI बैंक की जमीन और दूसरी संपत्तियों की कीमत कैसे तय की गई?
जवाब: बैंक की जमीन, इमारतों और दूसरी मूर्त एवं अमूर्त संपत्तियों (Tangible and intangible assets) के साथ उसकी देनदारियों का भी मूल्यांकन किया गया। इसके लिए 31 मार्च 2026 तक के ऑडिट किए गए खातों का इस्तेमाल किया गया।
सवाल 9. IDBI बैंक के सौदे के लिए बेंचमार्क कीमत कितनी तय की गई?
जवाब: बैंक के एक शेयर की बेंचमार्क कीमत 75.99 रुपये तय की गई। यह कीमत दोनों स्वतंत्र मूल्यांकन एजेंसियों के आकलन का औसत थी। सरकार के मुताबिक, सफल बोली इस बेंचमार्क कीमत और दोनों एजेंसियों के उचित मूल्य के अनुमान से अधिक थी।
सवाल 10. बेंचमार्क कीमत कैसे तय की गई?
जवाब: पहले मार्केट मल्टीपल मेथड से बैंक का उचित बाजार मूल्य निकाला गया। फिर एसेट वैल्यूएशन मेथड से उसकी शुद्ध संपत्ति का उचित मूल्य निकाला गया। इन दोनों मूल्यों का औसत निकालकर प्रति शेयर 75.99 रुपये की बेंचमार्क कीमत तय की गई।
सवाल 11. अब IDBI बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया में आगे क्या होगा?
जवाब: सफल बोलीदाता को अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सामने अपनी पात्रता और विश्वसनीयता से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। उसे नियामकीय शर्तों का पालन करने के लिए एक रोडमैप भी देना होगा। इसके बाद संबंधित मंजूरियों और शर्तों के अनुसार आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
सवाल 12. सौदे के बाद केंद्र सरकार और LIC के पास कितनी हिस्सेदारी बचेगी?
जवाब: सौदे के बाद केंद्र सरकार के पास IDBI बैंक की 15 फीसदी और LIC के पास 19 फीसदी हिस्सेदारी रहेगी। दोनों अपने नामित प्रतिनिधियों को बैंक के निदेशक मंडल से वापस बुलाएंगे और सार्वजनिक शेयरधारक बन जाएंगे।
सवाल 13. सरकार और LIC अपनी बची हुई हिस्सेदारी का क्या करेंगी?
जवाब: केंद्र सरकार अपनी बची हुई हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा या पूरी हिस्सेदारी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार खुले बाजार में बेच सकती है। इसके लिए मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने वैकल्पिक व्यवस्था को अधिकार दिए हैं। LIC अपनी बची हुई हिस्सेदारी का प्रबंधन अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं के अनुसार करेगी, लेकिन उसे संबंधित नियामकीय निर्देशों का पालन करना होगा।
सवाल 14. IDBI बैंक के निजीकरण का बैंकिंग सेक्टर और अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?
जवाब: सरकार को उम्मीद है कि निजीकरण के बाद IDBI बैंक सरकारी सहायता पर निर्भर हुए बिना पूंजी जुटा सकेगा। नए रणनीतिक खरीदार से बैंक में निजी पूंजी, नई तकनीक और बेहतर प्रबंधन व्यवस्था आने की उम्मीद है। इससे बैंक को कर्ज देने, जमा जुटाने और दूसरे बैंकों से प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिल सकती है।
सवाल 15. मौजूदा वैश्विक और भू-राजनीतिक तनाव के बीच इस सौदे का भारत के विदेशी निवेश पर क्या असर होगा?
जवाब: सरकार के मुताबिक, यह भारत के वित्तीय क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) होगा। इससे आर्थिक सुधारों के प्रति निवेशकों का भरोसा बढ़ाने और देश में निवेश के माहौल को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सोर्स: PIB
