GST काउंसिल की बैठक में रिन्यूएबल एनर्जीज पर होगा बड़ा फैसला? EPC कॉन्ट्रैक्ट्स 18% टैक्स हटाकर 5% करने की मांग
जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के EPC कॉन्ट्रैक्ट्स पर जीएसटी दर 18% से घटाकर 5% करने ...और पढ़ें

EPC कॉन्ट्रैक्ट्स से GST दर घटाने की मांग
HighLights
EPC कॉन्ट्रैक्ट्स पर GST 18% से 5% करने पर विचार।
इनपुट टैक्स क्रेडिट की समस्या कम होगी, लागत घटेगी।
नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को मिलेगा बढ़ावा, विवाद घटेंगे।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| GST काउंसिल की 57वीं बैठक 7 अक्टूबर को नई दिल्ली में होनी है। बता दें 56वीं बैठक साल 2025 को सितंबर के पहले हफ्ते में हुई थी, जिसके बाद देश में जीएसटी की दरों में बदलाव किया गया था। अब अगली बैठक से पहले कई नए और बड़े बदलावों को लेकर चर्चा तेज है। नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए जीएसटी काउंसिल अपनी अक्टूबर में होने वाली बैठक में इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (EPC) कॉन्ट्रैक्ट्स पर कर स्ट्रक्चर में बदलाव पर विचार कर सकती है।
मीडिया के सरकारी सूत्रों के अनुसार, काउंसिल इन कॉन्ट्रैक्ट्स के सेवा (Services) हिस्से पर लगने वाले 18 प्रतिशत जीएसटी को घटाकर 5 प्रतिशत करने के प्रस्ताव पर चर्चा कर सकती है, जिससे इसे नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों पर लागू 5 प्रतिशत जीएसटी दर के बराबर लाया जा सके।
ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर अभी कितना टैक्स?
EPC कॉन्ट्रैक्ट बड़े बुनियादी ढांचा और ऊर्जा परियोजनाओं में इस्तेमाल होने वाला मॉडल है, जिसमें एक ही ठेकेदार परियोजना की डिजाइनिंग, उपकरणों की खरीद, निर्माण और उसे पूरी तरह चालू हालत में सौंपने तक की पूरी जिम्मेदारी संभालता है।
वर्तमान में EPC कॉन्ट्रैक्ट्स पर प्रभावी GST दर 8.9 प्रतिशत है। नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable energy) और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में 70:30 के फार्मूले के आधार पर टैक्स लगाया जाता है। इसके तहत कुल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू का 70% हिस्सा वस्तुओं (Goods) की आपूर्ति माना जाता है, जिस पर 5% GST लगता है। वहीं, बचे हुए 30% हिस्से को सेवाओं (Services) की आपूर्ति माना जाता है, जिस पर 18% जीएसटी देना होता है।
एक सरकारी सूत्र ने मीडिया को बताया कि उद्योग लंबे समय से पूरे EPC कॉन्ट्रैक्ट पर समान 5% जीएसटी दर की मांग कर रहा है और इस मुद्दे पर अगली जीएसटी काउंसिल बैठक में चर्चा होने की संभावना है।
ITC जमा होने की समस्या
नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में इस्तेमाल होने वाले इनपुट वस्तु और सेवाओं पर प्रभावी कर 8.9% तक पहुंच जाता है, जबकि बिजली के उत्पादन और आपूर्ति पर जीएसटी नहीं लगता। चूंकि बिजली जीएसटी से फ्री है, इसलिए प्रोजेक्ट डेवलपर्स अपने इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का उपयोग आउटपुट टैक्स देनदारी के खिलाफ नहीं कर पाते। सरकारी सूत्रों का कहना है कि यदि GST दर घटाकर 5% की जाती है तो ITC के अनावश्यक संचय में कमी आएगी और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर की समस्या भी कम होगी।
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि उद्योग ने लंबे समय से इस मुद्दे को उठाया है। जब इनपुट पर कर की दर आउटपुट से अधिक होती है तो बड़ी मात्रा में इनपुट टैक्स क्रेडिट जमा हो जाता है, जिससे पूंजी फंसती है।
टैक्स व्यवस्था को आसान बनाने पर चर्चा
उद्योग का कहना है कि वर्तमान कर स्ट्रक्चर में कई प्रमुख इनपुट जैसे ग्लास और मेटल पर 18% GST लगता है, जबकि सोलर पैनल पर 5 प्रतिशत जीएसटी लागू है और EPC सेवाओं पर 18 प्रतिशत टैक्स है। ऐसे में टैक्स दरों में अंतर लागत और कंप्लायंस दोनों को प्रभावित करता है।
GREW Solar के निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनय थडानी ने मीडिया से कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों पर GST में की गई कटौती प्रोजेक्ट्स की लागत के लिहाज से पॉजिटिव रही है। हालांकि, EPC कॉन्ट्रैक्ट्स पर टैक्स व्यवस्था को और सरल बनाने तथा स्पष्टता बढ़ाने की आवश्यकता है ताकि लागत का बेहतर अनुमान लगाया जा सके और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं का तेजी से विस्तार हो सके।
सितंबर 2025 से पहले थी 13.8% प्रभावी दर
सितंबर 2025 से पहले EPC कॉन्ट्रैक्ट्स पर प्रभावी GST 13.8% थी। उद्योग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यदि सेवाओं के हिस्से को भी 5 प्रतिशत जीएसटी दर के तहत लाया जाता है तो इससे न केवल नवीकरणीय ऊर्जा प्रोजेक्ट्स पर कर का बोझ कम होगा बल्कि EPC कॉन्ट्रैक्ट्स के कर निर्धारण को लेकर स्पष्टता भी बढ़ेगी और विवादों की संभावना घटेगी।
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70:30 फार्मूला बन रहा विवाद की वजह
मीडिया सूत्रों के अनुसार, 70:30 अनुपात का आवंटन मॉडल लागू होने के कारण अक्सर यह विवाद पैदा हो जाता है कि सिविल वर्क, इंस्टॉलेशन और इंजीनियरिंग जैसी सेवाओं का वास्तविक मूल्य कुल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू के 30% से अधिक है या नहीं। इसी वजह से कई मामलों में कर विवाद और मुकदमेबाजी होती है।
टाटा पावर का मामला भी चर्चा में
हाल ही में आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जीज के खिलाफ सोलर पावर जनरेटिंग सिस्टम की सप्लाई पर लगाए गए 18% जीएसटी दावे को खारिज कर दिया था। टैक्स विभाग का तर्क था कि कंपनी ने वस्तुओं और सेवाओं के लिए अलग-अलग इनवॉइस जारी किए थे, इसलिए 70:30 का फार्मूला लागू नहीं होगा। हालांकि अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और कर विभाग की मांग को निरस्त कर दिया।
यदि जीएसटी काउंसिल अक्टूबर की बैठक में सेवा हिस्से पर कर घटाने का फैसला करती है, तो इससे सौर और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की लागत कम हो सकती है, कर विवाद घट सकते हैं और भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में निवेश को नई गति मिल सकती है।
