GST Council ने छोटे कारोबारियों को दी बड़ी राहत, जीएसटी जुर्माना ₹25000 से घटाकर ₹10000, डिमांड नोटिस पर भी रिलीफ
जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक में छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत मिली है। जीएसटी जुर्माना 25,000 से घटाकर 10,000 रुपये ...और पढ़ें

HighLights
जीएसटी जुर्माना 25,000 से घटाकर 10,000 रुपये किया गया।
छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत, पंजीकरण प्रक्रिया भी हुई आसान।
मुकदमा चलाने की सीमा 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये।
नई दिल्ली। जीएसटी काउंसिल (GST Council) की 57वीं बैठक में कई बड़े निर्णय लिए गए। इनमें सबसे अहम फैसला जीएसटी पर जुर्माने से जुड़ा है, जिसे कम करके छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत दी गई है। जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि जीएसटी जुर्माना 25000 रुपये से घटाकर 10000 रुपये कर दिया गया है, साथ ही 10000 रुपये से कम के डिमांड पर कारण बताओ नोटिस नहीं मिलेगा। आसान और ऑटोमेटिक रजिस्ट्रेशन प्रोसेस पर मुहर लगा दी गई है।
हालांकि, जीएसटी दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। एक साल में एक बार दरों की समीक्षा की जाएगी। जीएसटी दरों में बदलाव 1 अप्रैल से लागू होगा।
GST Council के बड़े फैसले
- 10 दिनों के अंदर रिफंड को मंजूरी मिलेगी। एक्नॉलेजमेंट के बाद 3 दिनों के अंदर रिफंड मिलेगा।
- मुकदमा चलाने की सीमा 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये कर दी गई है।
- 1 नवंबर से फार्मा और FMCG को भी आईटीसी मिलेगा।
- जीएसटी काउंसिल ने Power of Arrest खत्म किया।
रिफंड प्रोसेस में बड़ा बदलाव
जीएसटी काउंसिल की बैठक में सबसे बड़ा बदलाव रिफंड प्रोसेस को लेकर हुआ है। रिफंड क्लेम को स्वीकार करने की समय-सीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन कर दी जाएगी। अगर उस समय के अंदर न तो कोई एक्नॉलेजमेंट (स्वीकृति) और न ही कोई डेफिशिएंसी मेमो (कमी के बारे में सूचना) जारी किया जाता है, तो क्लेम को स्वीकार मान लिया जाएगा।
आसान और ऑटोमैटिक रजिस्ट्रेशन प्रोसेस
काउंसिल ने GST रजिस्ट्रेशन और उसमें बदलाव की प्रक्रिया को और ज़्यादा ऑटोमेटेड बनाने का प्रस्ताव भी दिया है। अभी, कम जोखिम वाले आवेदक बिना किसी अधिकारी के दखल के, सिस्टम के ज़रिए तीन कामकाजी दिनों में रजिस्ट्रेशन पा सकते हैं। कुल रजिस्ट्रेशन में से 61 प्रतिशत इसी तरीके से होते हैं।
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इनपुट टैक्स क्रेडिट पर बड़ी राहत
जीएसटी काउंसिल ने कई सेक्टर्स में इनपुट टैक्स क्रेडिट का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। अब कर्मचारियों के लिए लिए गए हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस, टेलीकम्युनिकेशन टावर और फैक्ट्रियों के बाहर बिछाई गई पाइपलाइनों पर क्रेडिट मिलेगा। ITC फ्री सैंपल और एक्सपायरी के कारण राइट-ऑफ किए गए स्टॉक पर भी मिलेगा, जहां कानून के तहत सामान को नष्ट करना ज़रूरी है।
