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'फंडामेंटल्स पूरी तरह ठीक, लेकिन...', भारतीय बाजार से क्यों पैसा निकाल रहे ग्लोबल इन्वेस्टर्स? वित्त मंत्री ने गिनाईं वजहें

Published: Mon, 19 Oct 2026 02:49 PM (IST)Updated: Mon, 19 Oct 2026 06:31 PM (IST)

Nirmala Sitharaman IMG Speech: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की निकासी का कारण बताया, ...और पढ़ें

भारतीय बाजार से क्यों निकल रहा विदेशी पैसा? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताई असली वजह

भारतीय बाजार से क्यों निकल रहा विदेशी पैसा? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताई असली वजह

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बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ समय से जारी भारी गिरावट और विदेशी निवेशकों (FPIs) की लगातार बिकवाली ने हर किसी की धड़कनें बढ़ा दी हैं। अगर आप भी सोच रहे हैं कि निफ्टी और सेंसेक्स लगातार क्यों गोते लगा रहे हैं और बाजार संभल क्यों नहीं रहा है, तो खुद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसकी असली वजह दुनिया के सामने रख दी है।

बैंकॉक में आईएमएफ-वर्ल्ड बैंक (IMF-World Bank) की बैठक के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने कहा कि बाजार में मौजूद आसान लिक्विडिटी यानी नकदी की आसान उपलब्धता ही निवेशकों को तेजी से बाजार से बाहर निकलने का मौका दे रही है।

12% तक गिर चुके इंडेक्स

दरअसल, पिछले दो सालों में सेंसेक्स और निफ्टी निवेशकों को पॉजिटिव रिटर्न देने में नाकाम रहे हैं। मजबूत आर्थिक विकास के बावजूद व्यापारिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक झटकों के कारण जनवरी से अब तक भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स करीब 12% तक गिर चुके हैं। सीतारमण ने साफ किया कि भारत के आर्थिक फंडामेंटल्स पूरी तरह ठीक हैं, लेकिन उन्होंने लगातार हो रही पूंजी निकासी को 2027 के लिए देश के सामने एक बड़ा जोखिम बताया है।

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9 साल का निवेश साफ

विदेशी निकासी के आंकड़े डराने वाले हैं। अक्टूबर 2024 से अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से लगभग 63.6 अरब डॉलर निकाल लिए हैं। इस भारी बिकवाली ने पिछले 9 सालों में आए कुल निवेश (63.5 अरब डॉलर) को पूरी तरह से साफ कर दिया है।

NSDL के आंकड़ों के अनुसार, इस साल बिकवाली और तेज हुई है। 2025 में 18.9 अरब डॉलर निकालने के बाद, 2026 में विदेशी निवेशकों ने अब तक 32.8 अरब डॉलर निकाल लिए हैं। इसमें सबसे बड़ी निकासी मार्च (12.7 अरब डॉलर) में हुई, जिसके बाद अप्रैल और जून में भी अरबों डॉलर बाजार से बाहर गए।

क्यों भाग रहे हैं विदेशी निवेशक?

बाजार से पैसा निकलने के पीछे कई ग्लोबल फैक्टर काम कर रहे हैं। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का बढ़ना, डॉलर का मजबूत होना और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें इसके प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा, ग्लोबल इन्वेस्टर्स का पैसा अब तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर सेक्टर की तरफ जा रहा है।

भारत में अभी AI थीम का एक्सपोजर कम है, जिसका सीधा फायदा ताईवान और दक्षिण कोरिया को मिल रहा है। MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स में ताइवान की हिस्सेदारी बढ़कर 29% और दक्षिण कोरिया की 22% हो गई है, जबकि भारत की हिस्सेदारी 19% से गिरकर 10% रह गई है।

घरेलू निवेशकों ने संभाला मोर्चा

विदेशी निवेशकों के जाने के बावजूद भारतीय घरेलू निवेशक (म्यूचुअल फंड्स) बाजार को लिक्विडिटी देकर लगातार संभाले हुए हैं। हालांकि, इसी घरेलू नकदी का फायदा उठाकर विदेशी कंपनियां और प्राइवेट इक्विटी फंड्स महंगे प्रीमियम पर अपना हिस्सा बेचकर आसानी से एग्जिट कर पा रहे हैं।

ग्लोबल 'AI बबल' फूटने के डर पर वित्त मंत्री ने आश्वस्त किया है कि अगर ऐसा होता है तो भारत पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि हमारे यहां अभी दुनिया की तरह अंधाधुंध AI निवेश नहीं आया है। साथ ही उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भारत अब फ्यूचर टेक्नोलॉजी में पीछे नहीं है और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में तेजी से निवेश कर रहा है।

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