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जिन कारणों का हवाला देकर चीन ने लौटाए थे भारतीय चावल, अब उसी में घिरा चाइना; EU ने दिया तगड़ा झटका! लौटाई खेपें

Published: Fri, 17 Jul 2026 12:29 PM (IST)Updated: Fri, 17 Jul 2026 12:32 PM (IST)

चीन ने जिन GMO कारणों का हवाला देकर भारतीय चावल की खेपें लौटाई थीं, अब यूरोपीय यूनियन ने उन्हीं कारणों ...और पढ़ें

GMO के अंश मिलने के कारण EU ने चीनी चावल के आटे की खेप लौटाई (AI Image)

GMO के अंश मिलने के कारण EU ने चीनी चावल के आटे की खेप लौटाई (AI Image)

HighLights

  1. यूरोपीय यूनियन ने चीन के चावल आटे की खेप लौटाई।

  2. खेप में जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गनिज़्म (GMOs) की पुष्टि हुई।

  3. चीन ने पहले भारतीय चावल को GMO बताकर अस्वीकार किया था।

नई दिल्ली| इस साल की शुरुआत में चीन ने भारत के चावल की खेपों को रेजेक्ट कर लेने से इंकार कर चुका है। चीन ने कई बार GMO का हवाला देते हुए भारतीय खेपों को अस्वीकार किया, जिससे भारतीय निर्यातकों को ना सिर्फ नुकसान पहुंचा बल्कि भारतीय उत्पादों पर भी सवालिया निशान लगे। अब यूरोपीय यूनियन (EU) ने चीन को एक तगड़ा झटका दिया है। चीन की व्यापारिक इमेज को चोट पहुंची है।

दरअसल EU के 'रैपिड अलर्ट सिस्टम फॉर फूड एंड फीड' (RASFF) की एक सूचना के अनुसार, इस हफ्ते यूरोपियन यूनियन ने चीन से आए चावल के आटे की खेप को रिजेक्ट करते हुए वापस लौटा दिया। बता दें कि चीन चावल से बने प्रोडक्ट का बड़ा निर्यातक देश है।

EU ने क्यों लौटाई चीन की खेप?

RASFF के मुताबिक यूरोपियन यूनियन ने चीन (China) से निर्यात किए गए चावल के आटे की एक खेप को रिजेक्ट कर दिया। और बताया कि जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गनिज़्म (GMOs) पाए गए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बीते दिनों EU की एक सूचना में कहा गया कि नीदरलैंड्स को अनाज और बेकरी उत्पादों के तहत यूरोप भेजे गए हाइड्रोलाइज्ड चावल के आटे में GMOs मिले थे। नीदरलैंड्स ने खेप में 35S प्रमोटर और T-Nos की मौजूदगी के कारण संभावित जोखिम की सूचना दी।

क्या होते हैं 35S प्रमोटर और T-Nos?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक 35S प्रमोटर, कॉलीफ्लावर मोजेक वायरस से लिया गया है। यह एक एक्टिव कॉन्स्टिट्यूटिव प्रमोटर है, जिसका इस्तेमाल प्लांट बायोटेक्नोलॉजी में लगभग सभी प्लांट टिशूज में डाले गए जीन्स के लगातार और हाई-लेवल एक्सप्रेशन के लिए किया जाता है। जेनेटिकली मॉडिफाइड फसलों में यह सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला रेगुलेटरी एलिमेंट है। वहीं T-Nos (नोपालिन सिंथेस टर्मिनेटर) एक छोटा जेनेटिक सीक्वेंस है जो मिट्टी के बैक्टीरिया एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमेफेसिएंस से लिया गया है।

चीन ने किया था भारतीय खेपों को रिजेक्ट

EU की ओर से ये झटका चीन को ऐसे समय में लगा है, जब बीजिंग भारत से आने वाले गैर-बासमती चावल के कंसाइनमेंट को यह कहकर खारिज कर रहा है कि उनमें GMO हैं, जबकि भारत में GM चावल की खेती नहीं होती है।

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इस साल की शुरुआत में, चीन ने भारत से आए गैर-बासमती चावल के लगभग 70 कंसाइनमेंट को उनमें कथित तौर पर GMO होने की बात कहकर खारिज कर दिया था, जबकि भारत में ही एक चीनी एजेंसी ने इन शिपमेंट्स को मंजूरी दी थी।

EU लगातार कर चुका है चीनी राइस प्रोडक्ट को रिजेक्ट

Businessline के मुताबिक नानजिंग यूनिवर्सिटी ऑफ इन्फॉर्मेशन साइंस एंड टेक्नोलॉजी के स्कूल ऑफ बिजनेस के चीनी स्कॉलर्स की एक स्टडी में यह बताया गया है कि EU ने पहले चीन से आने वाले राइस नूडल्स और काले चावल के आटे को रिजेक्ट कर चुका था। इस स्टडी में बताया गया है कि चीन से यूरोप भेजे जाने वाले चावल से बने प्रोडक्ट्स को GM सामग्री की वजह से बार-बार तकनीकी व्यापार बाधाओं का सामना करना पड़ा है।

2001 से 2017 के बीच, RASFF का ऐसे व्यापार पर काफी नकारात्मक असर पड़ा। हालांकि चीन के चावल से बने प्रोडक्ट्स का कुल निर्यात बढ़ा, लेकिन 2008 के बाद से EU को होने वाले निर्यात में गिरावट आई।