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'भारत के सामने बहुत बड़ी चुनौती', वेदांता वाले अनिल अग्रवाल की AI पर चेतावनी, Copper पर सरकार को दी क्या सलाह?

Published: Wed, 14 Oct 2026 11:58 AM (IST)Updated: Wed, 14 Oct 2026 12:53 PM (IST)

Anil Agarwal on Copper: वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने AI और डेटा सेंटर्स के बढ़ते चलन से 2027 के बाद ...और पढ़ें

अनिल अग्रवाल की बड़ी चेतावनी: AI और डेटा सेंटर्स से बढ़ेगी तांबे की मांग, भारत के लिए बड़ा अवसर

अनिल अग्रवाल की बड़ी चेतावनी: AI और डेटा सेंटर्स से बढ़ेगी तांबे की मांग, भारत के लिए बड़ा अवसर

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बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| दुनिया भर में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस यानी एआई (AI) और डेटा सेंटर्स के बढ़ते चलन के बीच अब एक नए तरह के संकट की आहट सुनाई दे रही है। यह संकट है- तांबा यानी कॉपर (copper shortage 2027) का। वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal Vedanta) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर चेतावनी भी दी है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कॉपर की डिमांड कच्चे तेल (Crude Oil) की तरह ही बढ़ने वाली है। हालांकि, इसे लेकर उन्होंने बड़ी सलाह भी दी। अनिल अग्रवाल ने कहा कि भारत इस चुनौती को एक बड़े मौके में बदल सकता है।

कॉपर की कीमतों में आएगा भारी उछाल

वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने अपने पोस्ट (Anil Agarwal tweet on copper) में सीधा सवाल उठाया है कि क्या कॉपर अगला तेल बनने जा रहा है? उन्होंने खुद इस पर सहमति जताते हुए कहा कि मांग के नजरिए से यह बात बिल्कुल सच है।

अग्रवाल के मुताबिक, AI के विस्तार, डेटा सेंटरों के बढ़ने और दुनिया भर में तेजी से हो रहे विद्युतीकरण के कारण कॉपर की मांग में भारी और तेज उछाल आने वाला है। सप्लाई के मुद्दे पर बात करते हुए अग्रवाल ने कच्चे तेल से इसकी तुलना की। उन्होंने कहा कि,

दुनिया में कच्चे तेल की कोई बुनियादी कमी नहीं है, इसकी सप्लाई केवल कुछ भू-राजनीतिक घटनाओं से ही प्रभावित होती है। लेकिन कॉपर के मामले में स्थिति बिल्कुल अलग होने वाली है। उन्होंने साफ किया कि कॉपर में एक स्ट्रक्चरल शॉर्टेज यानी ढांचागत कमी होने जा रही है, जो अगले 5 से 10 सालों में लगातार बढ़ती जाएगी।"

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भारत के सामने आ रही क्या बड़ी चुनौती?

आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2027 के बाद से ही कॉपर की सप्लाई में भारी कमी आनी शुरू हो जाएगी। भारत के सामने मौजूद चुनौती पर जोर देते हुए अनिल अग्रवाल ने बताया कि दुनिया को कॉपर में निवेश करने की सख्त जरूरत है। उन्होंने कहा कि,

भारत के सामने बहुत बड़ी चुनौती है, क्योंकि हम अपनी जरूरत का 95% कॉपर बाहर से आयात (import) करते हैं। हालांकि, उन्होंने इसे एक बड़े अवसर के रूप में भी देखने को कहा है, क्योंकि भारत ने अभी तक अपनी कॉपर की क्षमताओं को पूरी तरह से खोजना शुरू ही नहीं किया है।"

अपने पोस्ट में अनिल अग्रवाल ने सरकार और युवाओं को रास्ता दिखाते हुए कहा कि अगर नीतियों में कुछ सही बदलाव किए जाएं, तो देश के युवा कॉपर की खोज (copper exploration) के क्षेत्र में आ सकते हैं। यह काम बहुत ज्यादा महंगा नहीं है और इसमें फायदे की अपार संभावनाएं हैं।

अग्रवाल का मानना है कि हमारी मौजूदा संपत्तियां भी पहले से 10 गुना ज्यादा उत्पादन कर सकती हैं, खासकर तब जब इनकी जवाबदेही सीधे तौर पर पब्लिक शेयरधारकों के प्रति हो।

दुनिया में कहां होता है कॉपर का सबसे ज्यादा प्रोडक्शन?

  • चिली (Chile)
  • कॉन्गो (DR Congo)
  • पेरू (Peru)
  • चीन (China)
  • रूस (Russia)
  • अमेरिका (United States)
  • जांबिया (Zambia)
  • ऑस्ट्रेलिया (Australia)
  • इंडोनेशिया (Indonesia)
  • कजागिस्तान (Kazakhstan)

अभी कहां ट्रेड कर रहा है कॉपर?

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कॉपर में आज 0.20% की तेजी आई। कीमत 2.80 रुपए तेज होकर 1,419 रुपए प्रति किलोग्राम (copper price today) पर कारोबार कर रहा है। कारोबार सत्र के दौरान इसका हाई लेवल 1,422 रुपए और लो लेवल 1,418 रुपए प्रति किलोग्राम (copper rate today) रहा। पिछले दिन यह 1,416 रुपए पर क्लोज हुआ था।

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