बिहार में दो नदियों के बीच कैद हैं छह गांव व हजारों लोग, एक पुल बदल सकता है पूरी तस्वीर
पश्चिमी चंपारण के कई गांव बरसात में भपसा और मनोर नदियों पर पुल न होने से टापू बन जाते हैं, जिससे बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच बाधित होती है। मनोर नदी पर ...और पढ़ें

पश्चिम चंपारण के हरनाटांड़ में गांवों के दोनों तरह हैं नदी।
HighLights
बरसात में भपसा, मनोर नदियों से गांव टापू बन जाते हैं।
पुलों के अभाव में शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी सेवाएं प्रभावित होती हैं।
मनोर नदी पर पुल निर्माण शुरू, भपसा पर भी पुल की मांग।
अर्जुन जायसवाल, हरनाटांड़ ( पश्चिम चंपारण)। विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का सपना संजोए बगहा दो प्रखंड के चंपापुर गोनौली और महुअवा कटहरवा पंचायत के हजारों ग्रामीण आज भी बरसात के दिनों में बुनियादी संपर्क व्यवस्था के अभाव का दंश झेलने को विवश है।
भपसा और मनोर जैसी दो पहाड़ी नदियों के बीच बसे मलकौली, गोड़ार, सखुअनवा, पिपरा, धुमवाटांड़ समेत करीब आधा दर्जन गांव हर वर्ष मानसून आते ही टापू में तब्दील हो जाते हैं।
नदियों में उफान के साथ ही इन गांवों का संपर्क प्रखंड मुख्यालय, प्रमुख बाजार और स्वास्थ्य सेवाओं से लगभग कट जाता है।
हालांकि मनोर नदी पर पुल निर्माण कार्य शुरू होने से थोड़ी राहत की उम्मीद है, लेकिन ग्रामीणों की मांग है कि भपसा नदी पर भी पुल निर्माण किया जाए तो इस परेशानी से काफी हद तक राहत मिलेगी। वर्षा के दिनों में स्कूल जाने वाले बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है।
किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में परेशानी होती है। बीमार मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता। सबसे अधिक संकट गर्भवतियों और गंभीर रोगियों के सामने खड़ा हो जाता है।
कई बार उन्हें अस्पताल पहुंचाने के लिए स्वजन उफनती नदी पार करने का जोखिम उठाने को मजबूर हो जाते हैं। लोगों को गोनौली और चंपापुर होकर 15 से 18 किलोमीटर तक का लंबा रास्ता तय करना पड़ता है।
भपसा नदी पर भी पुल निर्माण हो तो होगा विशेष लाभ
ग्रामीण नितेश कुमार, चंदन सिंह, धर्मेंद्र कुमार, संतोष कुमार, लालबाबू काजी, दिलराज कुमार, मोहन महतो, तिलक महतो, सोहन महतो आदि बताते हैं कि बरसात के दौरान गोनौली, चम्पापुर, वाल्मीकिनगर, हरनाटांड़ और बगहा तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं होता।
कई बार अचानक जलस्तर बढ़ जाने से लोग घंटों नदी किनारे फंसे रहते हैं, जबकि आपातकालीन स्थिति में यह समस्या और भी गंभीर रूप धारण कर लेती है। वर्षों से क्षेत्रवासी भपसा और मनोर नदी पर पुल निर्माण की मांग करते आ रहे हैं।
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लंबे संघर्ष और जनप्रतिनिधियों के प्रयासों के बाद अब मनोर नदी पर पुल निर्माण का कार्य शुरू हो चुका है। वाल्मीकिनगर के पूर्व विधायक धीरेंद्र प्रताप सिंह उर्फ रिंकू सिंह की पहल से शुरू हुए इस निर्माण कार्य ने ग्रामीणों में नई उम्मीद जगा दी है।
लोगों को विश्वास है कि पुल बनने के बाद कम से कम एक बड़ी बाधा समाप्त होगी और बरसात में भी सुरक्षित आवागमन संभव हो सकेगा।
हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र की तस्वीर पूरी तरह तब बदलेगी जब धुमवाटांड़ और महुअवा के बीच भपसा नदी पर भी पुल का निर्माण होगा।
उनका तर्क है कि भपसा नदी पर पुल बनने से धुमवाटांड़ से हरनाटांड़ की दूरी घटकर मात्र पांच किलोमीटर रह जाएगी, जबकि वर्तमान में लोगों को गोनौली और चम्पापुर होकर 15 से 18 किलोमीटर का लंबा रास्ता तय करना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के दशकों बाद भी वे हर बरसात में उसी समस्या से जूझ रहे हैं। उनके लिए पुल केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सुरक्षित जीवन से जुड़ने का माध्यम है।
क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि सरकार उनकी वर्षों पुरानी मांग पर गंभीरता से विचार करेगी और दोनों नदियों पर पुल निर्माण कर हजारों लोगों को बरसाती अलगाव से मुक्ति दिलाएगी।