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    बिहार में एक स्कूल ऐसा भी, जहां बाघ और भालू के खौफ में झुंड बनाकर स्कूल पहुंचते हैं बच्चे

    Updated: Sun, 09 Aug 2026 04:09 PM (IST)

    बाघ के हमले में दो लोगों की मौत के बाद बगहा-2 प्रखंड में दहशत का माहौल है, जिससे जंगल से सटे इलाकों के विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति घट गई है। बिन ...और पढ़ें

    जंगल के बीच बिना बाउंड्री वॉल के राजकीय प्राथमिक विद्यालय बटेसरा। जागरण

    जंगल के बीच बिना बाउंड्री वॉल के राजकीय प्राथमिक विद्यालय बटेसरा। जागरण

    HighLights

    1. बाघ के हमले में दो लोगों की मौत से दहशत।

    2. बिना बाउंड्री वाले स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा चिंता।

    3. बाघ के डर से स्कूलों में बच्चों की संख्या घटी।

    संवाद सूत्र, बगहा (पूर्वी चंपारण)। हाल के दिनों में बाघ के हमले में दो लोगों की मौत के बाद वाल्मीकिनगर जंगल क्षेत्र से सटे बगहा दो प्रखंड में दहशत का माहौल है। जंगल और उसके आसपास रहने वाले ग्रामीणों में बाघ का भय इस कदर बढ़ गया है कि अब लोग अकेले घर से बाहर निकलने से भी परहेज करने लगे हैं।

    पशुओं के लिए चारा लाने और उन्हें चराने जंगल की ओर जाने वाले ग्रामीण बड़ी संख्या में समूह बनाकर निकल रहे हैं। वहीं, चारा काटने के लिए जंगल अथवा आसपास के इलाकों में जाने वाले लोग भी अधिक से अधिक संख्या में एक साथ जाने को मजबूर हैं।

    बाघ के हमले के बाद इसका असर अब ग्रामीण जीवन के साथ-साथ विद्यालयों पर भी दिखाई देने लगा है। बगहा दो प्रखंड के ऐसे विद्यालय, जहां अभी तक बाउंड्री वॉल का निर्माण नहीं हुआ है, वहां बच्चों और अभिभावकों में भय का माहौल बना हुआ है।

    जंगल क्षेत्र में स्थित कई विद्यालयों के आसपास आए दिन भालू, सांप और अन्य जंगली जानवरों के दिखने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। ऐसे में बाघ के हमले की खबर ने बच्चों के डर को और बढ़ा दिया है।

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     बिना बाउंड्री वाले विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा बनी चिंता

    बगहा दो प्रखंड में करीब सौ ऐसे विद्यालय बताए जा रहे हैं, जहां अभी तक बाउंड्री वॉल नहीं है। इनमें कई विद्यालय जंगल क्षेत्र अथवा जंगल से सटे इलाकों में संचालित हो रहे हैं।

    इन विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को विद्यालय आने-जाने के दौरान जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है।बाघ के हमले की घटना के बाद कई अभिभावक अपने बच्चों को विद्यालय भेजने में भी आशंकित हैं।

    इसका असर विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति पर पड़ने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब जंगल क्षेत्र में बाघ के मौजूद होने की चर्चा हो और विद्यालय परिसर भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो तो छोटे बच्चों को स्कूल भेजने में डर स्वाभाविक है।

    बटेसरा स्कूल में भी दिखा बाघ का खौफ

    राजकीय प्राथमिक विद्यालय बटेसरा में भी बाघ की दहशत का असर साफ दिखाई दे रहा है। विद्यालय में बाउंड्री वॉल नहीं होने के कारण बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रधानाध्यापक और अभिभावक चिंतित हैं।

    बाघ के भय और इलाके में फैली अफवाहों के कारण विद्यालय में बच्चों की संख्या घटने की बात सामने आई है।विद्यालय के प्रधानाध्यापक मो. रिजवान ने बताया कि बाघ के हमले में दो लोगों की मौत के बाद बच्चों और अभिभावकों में भय का माहौल है।

    विद्यालय में चहारदीवारी नहीं है। इस संबंध में बगहा दो बीईओ को पत्र के माध्यम से जानकारी दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि बाघ के भय के कारण विद्यालय में बच्चों की संख्या में कमी आई है।

    दो वर्ष पहले सांप के काटने से छात्रा की हुई थी मौत

    बटेसरा विद्यालय में जंगली जानवरों का खतरा कोई नई बात नहीं है। करीब दो वर्ष पहले इसी विद्यालय में सांप के काटने से एक छात्रा की मौत हो चुकी है।

    इस घटना के बाद भी विद्यालय में चहारदीवारी नहीं होने से बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब बाघ के हमले के बाद अभिभावकों की चिंता और बढ़ गई है।विद्यालय प्रबंधन की ओर से इस पूरे मामले से शिक्षा विभाग को अवगत कराया गया है। साथ ही संबंधित अधिकारियों को भी स्थिति की जानकारी दी गई है।

    बाघ के भय से रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित

    बाघ के हमले के बाद केवल विद्यालय ही नहीं, बल्कि जंगल से सटे गांवों में लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं। पशुओं के लिए चारा लाने, लकड़ी अथवा अन्य जरूरत का सामान लेने जाने वाले ग्रामीण अब अकेले जाने से बच रहे हैं। कई लोग समूह बनाकर ही जंगल अथवा जंगल से सटे इलाकों में जा रहे हैं।

    हमारे गांव के आसपास बाघ के घूमने की बात सुनकर डर लगता है। स्कूल में चहारदीवारी भी नहीं है। इसलिए घर से स्कूल आने में भी डर बना रहता है।
    प्रियांशु कुमार, पांचवीं छात्र

    बाघ के हमले में दो लोगों की मौत की बात सुनकर हम लोग काफी डर गए हैं। जंगल के पास से होकर स्कूल आना पड़ता है। कई बार रास्ते में जंगली जानवर भी दिखाई देते हैं।
    राहुल कुमार, चौथा छात्र

    स्कूल में बाउंड्री नहीं होने के कारण डर लगता है कि कोई जंगली जानवर परिसर में न आ जाए। घर वाले भी स्कूल भेजने से पहले कई बार सोचते हैं।

    अंकिता कुमारी, पांचवी छात्रा

    पहले सांप और दूसरे जंगली जानवरों को लेकर डर लगता था, अब बाघ की खबर से डर और बढ़ गया है। हम चाहते हैं कि स्कूल में जल्द बाउंड्री वॉल बनाई जाए, ताकि सुरक्षित होकर पढ़ाई कर सकें।
    नेहा कुमारी, पांचवी छात्रा

     बोले एचएम

    बाघ के हमले में दो लोगों की मौत हुई है, मेरे विद्यालय में चहारदीवारी नहीं है, इसकी जानकारी पत्र के माध्यम से बगहा दो बीईओ को दी जा चुकी है। विद्यालय में भी बाघ के भय से बच्चों की संख्या घटी है।
    मो रिजवान, प्रधानाध्यापक, राजकीय प्राथमिक विद्यालय बटेसरा

    विभाग की ओर से जिन विद्यालय में बाउंड्री वॉल नहीं है उन विद्यालय की सूची मांगी गई थी और सूची विभाग को भेज दी गई है।
    फूदन राम, बीईओ ,बगहा दो।