Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    सावन में दुर्लभ संयोग: 30 जुलाई से माह का शुभारंभ, इस बार चारों सोमवार को शिव आराधना का विशेष योग

    Updated: Thu, 23 Jul 2026 04:44 PM (IST)

    Shravan Maas Start Date: श्रावण मास 30 जुलाई से 28 अगस्त तक चलेगा, जिसमें चार सोमवार का विशेष संयोग बन रहा है, जो शिव आराधना के लिए अत्यंत शुभ है। 25 ...और पढ़ें

    News Article Hero Image
    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    संवाद सूत्र, बगहा (पश्चिम चंपारण)। Chaturmas Start Date: भगवान शिव की आराधना का सर्वाधिक पवित्र और पुण्यदायी माना जाने वाला श्रावण मास इस वर्ष 30 जुलाई से शुरू हो रहा है।

    यह पावन महीना 28 अगस्त तक रहेगा और इस दौरान शिवालयों में जलाभिषेक व रुद्राभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ेगी।

    चार सोमवार का बन रहा संयोग

    आचार्य डॉ. अशोक मिश्रा के अनुसार इस बार श्रद्धालुओं को चार श्रावण सोमवार का विशेष पुण्य लाभ प्राप्त होगा। श्रावण मास के चारों सोमवार 3 अगस्त, 10 अगस्त, 17 अगस्त और 24 अगस्त को पड़ेंगे, जिस दिन व्रत रखना अति उत्तम माना गया है।

    Ashok Mishra

    चातुर्मास में बंद रहेंगे मांगलिक कार्य

    25 जुलाई को हरिशयनी एकादशी के साथ ही भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाएंगे और चातुर्मास शुरू हो जाएगा। 20 नवंबर तक चलने वाले चातुर्मास के दौरान विवाह, मुंडन, यज्ञोपवीत और गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्य पूरी तरह स्थगित रहेंगे।

    जल चढ़ाने की पौराणिक परंपरा

    धार्मिक मान्यता है कि समुद्र मंथन से निकले विष का पान करने के बाद देवताओं ने इसी महीने भगवान शिव का जलाभिषेक किया था। तभी से श्रावण मास में शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करने की परंपरा निरंतर चली आ रही है।

    रुद्राभिषेक से दूर होंगे दोष

    आचार्य ने बताया कि रुद्रसूक्त और महामृत्युंजय मंत्र से किया गया रुद्राभिषेक ग्रह दोष, रोग और मानसिक तनाव को दूर करता है। इस अनुष्ठान को विधि-विधान से करने पर परिवार में सुख-शांति, समृद्धि, आरोग्य और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

    खबरें और भी

    सात्विक जीवन अपनाने का संदेश

    श्रावण मास केवल पूजा का ही नहीं, बल्कि संयम, सेवा, दान और पूरी तरह सात्विक जीवन अपनाने का भी संदेश देता है। इस अवधि में क्रोध, असत्य, नशा और तामसिक भोजन से दूर रहकर 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का नियमित जाप करना लाभदायक होता है।