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    भारत-नेपाल में फिर कड़वाहट, लिपुलेख व भंसार के बाद गंडक में एकतरफा खनन से बढ़ा तनाव

    Updated: Fri, 22 May 2026 05:30 PM (IST)

    India Nepal Border Dispute: भारत और नेपाल के बीच गंडक नदी में नेपाल द्वारा एकतरफा खनन से तनाव बढ़ गया है, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है। यह वि ...और पढ़ें

    बी गैप बांध के पास उत्खनन स्थल पर वार्ता करते नेपाल तथा उत्तरप्रदेश के अधिकारी। फोटो सौ. ग्रामीण

    बी गैप बांध के पास उत्खनन स्थल पर वार्ता करते नेपाल तथा उत्तरप्रदेश के अधिकारी। फोटो सौ. ग्रामीण 

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    संवाद सूत्र, वाल्मीकिनगर (पश्चिम चंपारण)। Gandak River Mining: भारत और सदियों पुराने मित्र देश नेपाल के द्विपक्षीय संबंधों में इन दिनों स्थिरता का अभाव साफ देखा जा रहा है।

    पड़ोसी देश नेपाल में हाल ही में नई सरकार के गठन के बावजूद सीमावर्ती और कूटनीतिक मुद्दों पर कोई सकारात्मक बदलाव महसूस नहीं हो रहा है।

    उत्तराखंड सीमा से सटा ऐतिहासिक लिपुलेख विवाद अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि अब बिहार और उत्तर प्रदेश की सीमा पर बहने वाली गंडक नदी में नेपाल की तरफ से किए जा रहे एकतरफा उत्खनन (माइनिंग) ने दोनों देशों के बीच कड़वाहट को और ज्यादा बढ़ा दिया है।

    India Nepal Border Dispute Gandak mining

    बिना समन्वय गंडक नदी में अंधाधुंध माइनिंग

    ताजा विवाद नेपाल के पश्चिम नवलपरासी जिला अंतर्गत आने वाली सुस्ता गांवपालिका की एकतरफा प्रशासनिक कार्रवाई से शुरू हुआ है।

    सुस्ता गांवपालिका ने स्थापित अंतरराष्ट्रीय नियमों और भारतीय पक्ष से बिना किसी आपसी समन्वय या पूर्व सूचना के, गंडक नदी की मुख्य धारा से बालू, पत्थर और ग्रेवल (नदी जन्य पदार्थों) को निकालने का एक बड़ा ठेका जारी कर दिया है।

    'बी गैप बांध' के बेहद संवेदनशील सुरक्षा जोन के पास चल रहे इस भारी उत्खनन कार्य को लेकर उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग (महराजगंज खंड) ने अपनी गंभीर और आधिकारिक आपत्ति दर्ज कराई है।

    सीमावर्ती बांधों को पहुंचा भारी खतरा

    उत्तर प्रदेश सिंचाई खंड द्वितीय (महराजगंज) के सहायक अभियंता रंजीत सिंह के अनुसार, सुस्ता गांवपालिका ने सभी स्वीकृत मापदंडों को ताक पर रखकर 'बज्र गुरु महालक्ष्मी जे.भी.' नामक निजी कंपनी को इस खनन का जिम्मा सौंपा है।

    यह कदम 'भारत-नेपाल जॉइंट कमेटी ऑन कोशी गंडक प्रोजेक्ट' की काठमांडू में 30 अप्रैल 2026 को हुई उच्चस्तरीय बैठक के फैसलों का खुला उल्लंघन है।

    उस बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया था कि बिना एक संयुक्त समन्वय समिति के गठन के गंडक नदी क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति से छेड़छाड़ करने वाला कोई भी कार्य नहीं किया जाएगा।

    संयुक्त टीम का औचक निरीक्षण

    बी गैप बांध के ठोकर नंबर 15 और 16 के पास जब भारतीय और नेपाली इंजीनियरों की संयुक्त टीम औचक निरीक्षण के लिए पहुंची, तो वहां बड़े पैमाने पर हाईवा गाड़ियों से उत्खनन किया जा रहा था।

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    भारतीय अधिकारियों ने मौके पर मौजूद सुस्ता गांवपालिका के अध्यक्ष (मेयर) टेक नारायण उपाध्याय को दोटूक शब्दों में सचेत किया कि इस बेतरतीब खनन के कारण गंडक नदी की प्राकृतिक धारा बदल जाएगी, जिससे सुस्ता बांध, गंडक मुख्य बांध और भारत के सीमावर्ती मैदानी इलाके बाढ़ के भारी जोखिम में आ जाएंगे।

    पिछले साल भी इसी तरह के खनन के चलते नदी का तेज बहाव सुस्ता और नरसही क्षेत्र की तरफ मुड़ गया था, जिससे बड़ी तबाही की स्थिति बन गई थी।

    इस हठधर्मी रुख के बाद उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के शीर्ष अधिकारियों ने भू-आर्जन कार्यालय के लाइजन ऑफिसर शोभित हलुवाई के साथ मिलकर नेपाल के नवलपरासी जिला के जिलाधिकारी (सीडीओ) से मुलाकात की है और इस विवादित खनन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की मांग की है।

    संप्रभुता के मसले पर भड़की कूटनीतिक चिंगारी

    गंडक नदी के इस ताजे तनातनी के समानांतर ही दोनों देशों के बीच सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील 'लिपुलेख दर्रा' विवाद भी दोबारा सुलग उठा है। विशेष रूप से अप्रैल-मई 2026 में नेपाल की बागडोर नई सरकार के हाथों में आने के बाद से इस मुद्दे पर कूटनीतिक तल्खी बढ़ गई है।

    भारत, चीन (तिब्बत) और नेपाल के त्रि-जंक्शन (Tri-junction) पर स्थित लिपुलेख को भारत जहां उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले का अटूट हिस्सा मानता है, वहीं नेपाल का नया राजनीतिक नेतृत्व इस पर अपना दावा जता रहा है।

    मई 2026 में उपजा कूटनीतिक तनाव

    इस ठंडे पड़े विवाद को हवा तब मिली जब अप्रैल 2026 के अंतिम सप्ताह में भारत और चीन के बीच लिपुलेख दर्रे के पारंपरिक मार्ग से 'कैलाश मानसरोवर यात्रा' को पूर्ण रूप से पुनर्जीवित करने पर एक महत्वपूर्ण सहमति बनी।

    भंसार विवाद से भारी आर्थिक गतिरोध

    भौगोलिक सीमाओं के इन विवादों के बीच, जमीनी स्तर पर दोनों देशों के बीच सीमा शुल्क यानी 'भंसार नियमों' को लेकर चल रही आर्थिक रार ने आग में घी का काम किया है। इस नीतिगत टकराव ने सीमावर्ती इलाकों के स्थानीय व्यापार को भारी नुकसान पहुंचाया है। हालांकि कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इस पर रोक लग गई है।

    नदी जन्य पदार्थों का संरक्षण करना और अपने क्षेत्र से राजस्व का संकलन करना सीधे तौर पर गांवपालिका के संवैधानिक अधिकार क्षेत्र का हिस्सा है। सीमावर्ती हुलाकी राजमार्ग (हुलाकी हाईवे) के निर्माण कार्य के लिए आवश्यक ग्रेवल और निर्माण सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ही यह ठेका दिया गया है।

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    टेक नारायण उपाध्याय, अध्यक्ष, सुस्ता गांवपालिका