पश्चिम चंपारण की हरहा नदी में फंसा ट्रैक्टर, समय पर इलाज नहीं मिलने से गर्भवती की मौत
पश्चिम चंपारण के दोन इलाके में हरहा नदी में ट्रैक्टर फंसने से 27 वर्षीय गर्भवती सुमन देवी की समय पर इलाज न मिलने के कारण मौत हो गई। बरसात में पुल-पुलि ...और पढ़ें

सुमन देवी (फाइल फोटो) और हरहा नदी के पास एकत्रित ग्रामीण। फोटो: जागरण
संवाद सूत्र, रामनगर (पश्चिम चंपारण)। Harha River Incident: गोबरहिया थाना क्षेत्र के दोन इलाके के सिंगड़हवा गांव में रास्ते की कठिनाइयों और समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण 27 वर्षीय गर्भवती सुमन देवी की रविवार को मौत हो गई।
प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद स्वजन उसे ट्रैक्टर से हरनाटांड़ पीएचसी ले जा रहे थे। इसी दौरान बढ़े जलस्तर के कारण हरहा नदी में ट्रैक्टर फंस गया।
नदी में फंसा ट्रैक्टर
मृतका के चाचा राजेश कुमार उरांव ने बताया कि सुमन को प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद ट्रैक्टर से हरनाटांड़ ले जाने लगे।हरहा नदी में जलस्तर बढ़ा हुआ था, इसलिए कुछ देर तक पानी कम होने का इंतजार किया गया।
पानी कुछ कम होने पर प्रसव पीड़ा को देखते हुए ट्रैक्टर को नदी में उतारा गया, लेकिन नदी का रास्ता काफी खराब होने के कारण वाहन बीच रास्ते में फंस गया।
हालत बिगड़ती गई
काफी प्रयास के बाद भी ट्रैक्टर को समय पर नदी से नहीं निकाला जा सका। इस दौरान प्रसव पीड़ा से तड़प रही सुमन की हालत बिगड़ती गई और रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। नौरंगिया पंचायत के मुखिया गौरी शंकर प्रसाद ने घटना की पुष्टि की है।
पुल पुलिया का अभाव
मुखिया ने बताया कि दोन क्षेत्र में नदियों पर पुल-पुलिया का अभाव लोगों के लिए बड़ी समस्या है। बरसात के दिनों में आवागमन और भी मुश्किल हो जाता है।
गंभीर मरीजों और गर्भवतियों को समय पर अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन जाता है। सुमन की शादी ढोलबजवा गांव निवासी संजीत उरांव से हुई थी। यह उसका दूसरा बच्चा था और उसका पहले से एक बच्चा है। पिछले कुछ दिनों से वह अपने मायके सिंगड़हवा दोन में रह रही थी।
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हरनाटांड़ 21 किलोमीटर दूर
सिंगड़हवा दोन से रामनगर प्रखंड मुख्यालय की दूरी करीब 48 किलोमीटर है, जबकि हरनाटांड़ करीब 21 किलोमीटर दूर है। चिकित्सा सुविधा के लिहाज से हरनाटांड़ नजदीक और प्रमुख केंद्र होने के कारण दोन क्षेत्र के लोग इलाज के लिए वहीं जाते हैं, लेकिन बरसात के दिनों में हरहा नदी बड़ी बाधा बन जाती है।
ग्रामीणों के अनुसार, यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी बरसात के दौरान समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने के कारण कई गर्भवतियों की जान जा चुकी है।