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    कंधे पर बेटे को बैठाकर नदी पार करता दिखा पिता, बिहार के वीडियो ने खोली बदहाली की पोल

    Updated: Thu, 16 Jul 2026 02:50 PM (GMT+05:30)

    पश्चिम चंपारण के दोन क्षेत्र में एक पिता अपने बेटे को कंधे पर बिठाकर उफनती हरहा नदी पार करते हुए दिखे, जिसका वीडियो वायरल हो गया है। ...और पढ़ें

    संवाद सूत्र, हरनाटांड़। पश्चिम चंपारण जिले के रामनगर प्रखंड अंतर्गत सुदूरवर्ती दोन क्षेत्र से सामने आई एक तस्वीर और वीडियो ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। बीते सोमवार को बनाया गया वीडियो गुरुवार को इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हुआ। 

    उफनाती नदी, तेज बहाव, जानलेवा खतरा और पिता के कंधे पर बैठा बेटा। यह दृश्य केवल एक परिवार की मजबूरी नहीं, बल्कि उन अधूरे विकास दावों की सच्चाई है, जिनके बीच आज भी हजारों लोग जीवन जीने को विवश हैं। 

    लगातार हो रही वर्षा के कारण गंडक, मसान, हरहा, कोशिल और झिकरी समेत कई पहाड़ी नदियां उफान पर हैं। बरसात शुरू होते ही रामनगर प्रखंड का दुर्गम दोन क्षेत्र एक बार फिर मुख्यधारा से कटने लगा है।

    बेटे को कंधे पर बिठाकर किया नदी पार

    वीडियो में गोबरहिया थाना क्षेत्र के ढोकनी दोन गांव निवासी देवराज महतो अपने पुत्र शुभम कुमार को कंधे पर बैठाकरहरहा नदी पार करते नजर आ रहे हैं। नदी का बहाव इतना तेज है कि एक छोटी सी चूक किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती थी, लेकिन बेटे की पढ़ाई बाधित न हो, इसलिए पिता ने अपनी जान जोखिम में डाल दी। 

    दरअसल, विद्यालय की छुट्टियां समाप्त होने के बाद देवराज महतो अपने बेटे को बेलाटांडी माडल आवासीय विद्यालय छोड़ने जा रहे थे। वहां वह तीसरी कक्षा में पढ़ता है। गांव से विद्यालय की दूरी लगभग सात किलोमीटर है। रास्ते में हरहा नदी पड़ती है, जिस पर आज तक पुल नहीं बन सका है। नतीजतन, बरसात के दिनों में नदी पार करना ग्रामीणों की मजबूरी बन जाती है।

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    पढ़ाई के लिए करना पड़ता है दो नदी को पार

    देवराज महतो बताते हैं कि ढोकनी दोन बड़ा गांव है, जहां दो प्राथमिक विद्यालय तो हैं, लेकिन मध्य विद्यालय और उच्च विद्यालय का अभाव है। बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए दो-दो नदियां पार कर गोबरहिया जाना पड़ता है। इसका सबसे अधिक असर छात्राओं पर पड़ता है। 

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    बरसात के दिनों में जब हरहा नदी में बाढ़ आती है, तब कई छात्राएं स्कूल पहुंचने के लिए कपड़े संभालते हुए जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को विवश होती हैं। यह स्थिति न केवल कष्टदायक बल्कि बेहद शर्मनाक भी है। दोन क्षेत्र के लोगों के लिए यह कोई नई समस्या नहीं है।

    बरसात में पानी से घिर जाते हैं 22 गांव

    हर वर्ष मानसून के दौरान करीब 22 गांव चारों ओर से पानी से घिर जाते हैं। पुलों और बेहतर संपर्क मार्गों के अभाव में बच्चों की शिक्षा, मरीजों का उपचार, किसानों की आवाजाही और रोजमर्रा की जरूरतें सब कुछ प्रभावित हो जाती है। कई बार लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर नदियां पार करनी पड़ती है। 

    इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित वीडियो ने एक बार फिर उन बुनियादी सवालों को सामने ला दिया है, जिनका जवाब वर्षों से नहीं मिल पाया है। एक ओर शिक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर दोने क्षेत्र के बच्चे आज भी स्कूल पहुंचने के लिए उफनती नदियों से जूझ रहे हैं।

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