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    यूरिया नहीं तो ड्रोन सही! 48 घंटे में गन्ने में लौटी हरियाली, बिहार के किसानों की बढ़ी उम्मीद

    Updated: Thu, 09 Jul 2026 05:36 PM (IST)

    बगहा के बड़गांव में यूरिया की कमी के कारण किसान ड्रोन से नैनो डीएपी और नैनो उर्वरक का छिड़काव कर रहे हैं। इस आधुनिक तकनीक से गन्ने की फसल में 48 घंटे ...और पढ़ें

    यूरिया के विकल्प के रूप में ड्रोन से नैनो डीएपी एवं नैनो उर्वरक का छिड़काव। जागरण

    यूरिया के विकल्प के रूप में ड्रोन से नैनो डीएपी एवं नैनो उर्वरक का छिड़काव। जागरण

    HighLights

    1. यूरिया की कमी से जूझ रहे बगहा के किसान।

    2. ड्रोन से नैनो डीएपी और नैनो उर्वरक का छिड़काव।

    3. 48 घंटे में गन्ने की फसल में लौटी हरियाली।

    संवाद सूत्र, बगहा (पश्चिम चंपारण) । यूरिया की किल्लत से जूझ रहे किसानों के लिए अब आधुनिक तकनीक राहत का माध्यम बन रही है। बगहा अनुमंडल के बड़गांव में गन्ने की फसल में यूरिया के विकल्प के रूप में ड्रोन के माध्यम से नैनो डीएपी एवं नैनो उर्वरक (28-28-0) का छिड़काव किया जा रहा है।

    फसल में तेजी से सुधार दिखाई दे रहा

    किसानों का कहना है कि इस तकनीक से फसल में तेजी से सुधार दिखाई दे रहा है और गन्ने का पीलापन कम होने लगा है।दरअसल, पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में यूरिया की कमी के कारण किसान परेशान थे। इसी बीच बड़गांव के कई किसान गन्ने की फसल में पीलापन एवं वृद्धि रुकने की समस्या लेकर अनुमंडल कृषि पदाधिकारी राजेश कुमार के पास पहुंचे।

    किसानों की समस्या सुनने के बाद कृषि पदाधिकारी ने यूरिया के विकल्प के रूप में ड्रोन से नैनो डीएपी एवं नैनो उर्वरक के छिड़काव की सलाह दी।कृषि विभाग के सुझाव के बाद गांव में ड्रोन के माध्यम से अभियान चलाकर 37 एकड़ भूमि पर छिड़काव किया गया।

    किसानों ने अपने-अपने लगभग दो-दो एकड़ खेत में ड्रोन से छिड़काव कराया

    बड़गांव निवासी किसान अखिलेश कुमार, चंदा देवी, अमित मिश्रा, रेखा देवी, मुन्ना साह, मुन्ना चौधरी, मंगल कुमार, संतोष कुमार एवं बृजेश कुमार सहित कई किसानों ने अपने-अपने लगभग दो-दो एकड़ खेत में ड्रोन से छिड़काव कराया। किसानों ने बताया कि ड्रोन से एक एकड़ में छिड़काव कराने का खर्च लगभग 1,500 रुपये आ रहा है।

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    हालांकि लागत कुछ अधिक है, लेकिन समय की बचत, समान रूप से दवा का छिड़काव और कम समय में बेहतर परिणाम मिलने के कारण किसान इसे लाभकारी मान रहे हैं। छिड़काव कराने वाले किसानों का कहना है कि मात्र 48 घंटे के भीतर गन्ने की फसल में सकारात्मक बदलाव दिखाई देने लगा है।

    पहले जहां पत्तियां पीली पड़ रही थीं, वहीं अब उनमें हरियाली लौट रही है और पौधों की बढ़वार भी बेहतर दिख रही है। इससे किसानों में नई उम्मीद जगी है।

    अनुमंडल कृषि पदाधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि वर्तमान परिस्थितियों में किसानों को वैज्ञानिक एवं आधुनिक खेती की ओर बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि नैनो उर्वरकों का संतुलित एवं वैज्ञानिक तरीके से उपयोग करने पर फसलों को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं और ड्रोन तकनीक के माध्यम से कम समय में बड़े क्षेत्र में समान रूप से छिड़काव संभव हो पाता है।

    उन्होंने किसानों से कृषि विभाग की सलाह के अनुरूप ही उर्वरकों एवं कीटनाशकों का प्रयोग करने की अपील की।यूरिया की कमी के बीच बड़गांव में ड्रोन आधारित इस प्रयोग ने किसानों को नई दिशा दी है।

    यदि इसके परिणाम आगे भी सकारात्मक रहे तो आने वाले दिनों में बगहा अनुमंडल के अन्य क्षेत्रों के किसान भी इस आधुनिक तकनीक को अपनाने के लिए प्रेरित हो सकते हैं।