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    सर्किल रेट बढ़ते ही बदला जमीन कारोबार का गणित, पश्चिम चंपारण में खरीदार और डीलर दोनों उलझन में

    Updated: Wed, 24 Jun 2026 06:52 PM (IST)

    Circle Rate Hike Bihar: पश्चिम चंपारण में सर्किल रेट बढ़ने से जमीन की खरीद-बिक्री धीमी पड़ गई है, जिससे प्रॉपर्टी डीलर और खरीदार दोनों परेशान हैं। बढ़ ...और पढ़ें

    पहले से जमीन खरीदने का सौदा कर चुके लोग अतिरिक्त राशि के इंतजाम को लेकर परेशान। फाइल फोटो

    पहले से जमीन खरीदने का सौदा कर चुके लोग अतिरिक्त राशि के इंतजाम को लेकर परेशान। फाइल फोटो

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    जागरण संवाददाता, बेतिया (पश्चिम चंपारण)। West Champaran Property Market: भूमि एवं राजस्व विभाग द्वारा जमीन के न्यूनतम मूल्य दर (सर्किल रेट) में की गई बढ़ोतरी का असर अब पश्चिम चंपारण के जमीन कारोबार पर साफ दिखाई देने लगा है।

    सर्किल रेट बढ़ने के बाद जिले में जमीन की खरीद-बिक्री की रफ्तार धीमी पड़ गई है। प्रॉपर्टी डीलर जहां नए समीकरणों को समझने और ग्राहकों को साधने में जुटे हैं, वहीं पहले से जमीन खरीदने का सौदा कर चुके लोग अतिरिक्त राशि के इंतजाम को लेकर परेशान हैं।

    बाजार में तीन गुना तक उछले दाम

    सरकारी स्तर पर कई क्षेत्रों में सर्किल रेट में औसतन डेढ़ से दो गुना तक वृद्धि की गई है। इसके बाद बाजार में जमीन की कीमतों में और अधिक तेजी देखी जा रही है। बिचौलियों और भूमाफियाओं की सक्रियता के कारण कुछ इलाकों में जमीन के दाम तीन गुना तक पहुंच गए हैं।

    बेतिया, नरकटियागंज, बगहा और चनपटिया जैसे शहरी क्षेत्रों में आवासीय भूखंडों की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं ग्रामीण इलाकों में भी कृषि भूमि और सड़क किनारे के भूखंड महंगे हो गए हैं।

    निबंधन की रफ्तार आधी हुई

    बढ़ी कीमतों का असर निबंधन कार्यालयों में भी देखने को मिल रहा है। पहले जहां जिले में प्रतिदिन 100 से अधिक जमीन खरीद-बिक्री के दस्तावेजों का निबंधन होता था, वहीं अब यह संख्या घटकर 50 से 60 के बीच रह गई है।

    निबंधन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बढ़ी हुई लागत के कारण कई लोग फिलहाल जमीन खरीदने का फैसला टाल रहे हैं, जबकि कुछ खरीदार छोटे भूखंडों की ओर रुख कर रहे हैं।

    बढ़ा स्टांप शुल्क और निबंधन खर्च

    जमीन खरीदने की योजना बना रहे लोगों का कहना है कि पहले जिस बजट में उपयुक्त जमीन मिल जाती थी, अब उसी राशि में छोटा प्लॉट भी खरीदना मुश्किल हो गया है। सर्किल रेट बढ़ने से निबंधन शुल्क और स्टांप शुल्क में भी वृद्धि हुई है, जिससे जमीन खरीदने की कुल लागत काफी बढ़ गई है।

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    खरीदारों की बढ़ी चिंता

    सर्किल रेट में अचानक हुई बढ़ोतरी ने उन लोगों की परेशानी भी बढ़ा दी है, जिन्होंने पहले ही जमीन खरीदने का सौदा कर लिया था और विक्रेताओं को अग्रिम राशि दे चुके हैं।

    जमीन खरीदने के लिए पहले से समझौता कर चुके जितेंद्र तिवारी, शाकिर अंसारी और कुसुमलता देवी ने बताया कि अतिरिक्त राशि की व्यवस्था नहीं होने के कारण रजिस्ट्री की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। वहीं विक्रेता जल्द रजिस्ट्री कराने का दबाव बना रहे हैं।

    प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े लोगों पर असर

    जमीन निबंधन से जुड़े कार्यों में सहयोग करने वाले अंकित चौबे, पीसी पांडेय और प्रभु राम का कहना है कि सर्किल रेट बढ़ने के बाद जमीन निबंधन कराने आने वाले लोगों की संख्या में कमी आई है। इससे उनके कामकाज और आय पर भी सीधा असर पड़ा है।

    आम लोगों की बढ़ी मुश्किल

    जिला निबंधन कार्यालय के कर्मियों के अनुसार, सर्किल रेट का निर्धारण सरकार की नीति के अनुरूप बाजार मूल्य और सरकारी दरों के बीच संतुलन बनाने के उद्देश्य से किया जाता है। हालांकि आम लोगों का मानना है कि बढ़ी हुई कीमतों के कारण मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए जमीन खरीदना पहले की तुलना में कहीं अधिक कठिन हो गया है।