विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

जन्म के कुछ घंटे बाद ही बाढ़ से जंग, टब में नवजात को लेकर पानी में उतरे पिता; ले गए वैशाली के अस्पताल

Published: Tue, 08 Sep 2026 11:00 AM (IST)

राघोपुर में बाढ़ के कारण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। नवजात को टीका लगवाने के लिए प्लास्टिक ...और पढ़ें

नवजात को टब में लेकर जाने की मजबूरी। जागरण

नवजात को टब में लेकर जाने की मजबूरी। जागरण

HighLights

  1. बाढ़ में नवजात को टब में रखकर टीका लगवाने ले गए।

  2. नाव नहीं मिलने पर परिजनों ने जुगाड़ का सहारा लिया।

  3. ग्रामीणों ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त नावों की मांग की।

रविकांत सिंह, राघोपुर। राघोपुर में बाढ़ का पानी लोगों के लिए आफत बन गया है। सड़कें और संपर्क मार्ग डूबने के बाद अब स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचना भी चुनौती बन गया है।

सोमवार को रामपुर श्यामचंद पंचायत में बाढ़ के बीच स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली की ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने हर किसी को झकझोर दिया।

पंचायत निवासी राहुल कुमार की पत्नी गायत्री देवी ने सोमवार की सुबह घर में ही बच्चे को जन्म दिया। प्रसव के बाद नवजात को टीका लगवाने के लिए स्वजन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र राघोपुर, फतेहपुर ले जाना चाहते थे।

नाव नहीं मिली तो प्लास्टिक के टब में रखकर ले गए नवजात

इसके लिए उन्होंने नाव की तलाश की, लेकिन काफी प्रयास के बाद भी नाव नहीं मिल सकी। नवजात को समय पर टीका लगवाने के लिए स्वजनों ने इसके बाद जुगाड़ का सहारा लिया।

फतेहपुर निवासी सुभाष ठाकुर, राजेश ठाकुर और गांव के जितेंद्र ठाकुर व सीमा देवी ने मिलकर नवजात को प्लास्टिक के टब में रखा। इसके बाद टब को सिर पर उठाकर कमर भर बाढ़ के पानी के बीच पैदल ही स्वास्थ्य केंद्र की ओर निकल पड़े।

बाढ़ के पानी को पार करते हुए सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र फतेहपुर पहुंचे। वहां नवजात को टीका लगवाने के बाद स्वजन उसी तरह वापस घर लौटे। इस दौरान नवजात को पानी से बचाने और सुरक्षित रखने के लिए विशेष सावधानी बरती गई।

Raghopur 2

(बच्चे को दी जा रही वैक्सीन।)

पर्याप्त नाव नहीं होने से बढ़ी परेशानी

स्थानीय लोगों का कहना है कि बाढ़ के कारण रामपुर श्यामचंद पंचायत समेत आसपास के इलाकों में आवागमन बुरी तरह प्रभावित है। इसके बावजूद प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त नाव उपलब्ध नहीं कराई गई है।

सुभाष ठाकुर और राजेश ठाकुर ने बताया कि नाव की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से ग्रामीणों को रोजमर्रा के जरूरी कामों के लिए भी बाढ़ के पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में तो लोग किसी तरह आवागमन कर लेते हैं, लेकिन किसी व्यक्ति के बीमार पड़ने या गर्भवती महिला अथवा बच्चे से जुड़ी आपात स्थिति में परेशानी कई गुना बढ़ जाती है। समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने की स्थिति में किसी की जान भी खतरे में पड़ सकती है।

आपात स्थिति में और भयावह हो सकते हैं हालात

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और बिहार सरकार से बाढ़ प्रभावित इलाकों में तत्काल पर्याप्त नाव उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि बाढ़ के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।

खासकर गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और गंभीर रूप से बीमार लोगों के लिए हर समय नाव की उपलब्धता जरूरी है। ग्रामीणों ने मांग की है कि पंचायत स्तर पर पर्याप्त संख्या में नाव और नाविकों की व्यवस्था की जाए।