सुपौल के वीर सेनानी: गदर की लड़ाई में कूद गए थे कोसी के रणबांकुरे, अंग्रेजों को चटाई थी धूल
यह लेख बिहार के कोसी क्षेत्र, विशेषकर सुपौल जिले के स्वतंत्रता सेनानियों के भारत की आजादी में दिए गए महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डालता है। इसमें पंडित ...और पढ़ें

HighLights
कोसी की धरती ने दिए आजादी के कई वीर सपूत।
पंडित राजेंद्र मिश्र, खूब लाल मेहता सुपौल के पहले सेनानी।
अनेक स्थानीय नायकों ने फिरंगियों से लोहा लिया।
संवाददाता, सुपौल। सपूतों के मामले में उर्वर रही है कोसी की धरती। वतन की आजादी से लेकर देश के निर्माण तक में अपनी सफल साझेदारी देने वालों को इस मिट्टी ने जन्म दिया है। गुलामी की बेड़ी को झटक देने को जब देश में क्रांति की मशाल जली तो कोसी के वीर बांकुरों ने भी हूंकार भरी और फिरंगियों को देश से निकाल बाहर करने में अपनी सफल साझेदारी दी।
आजादी के गदर में जीवन समर्पण करने वाले सपूतों की कुर्बानी को भुलाया नहीं जा सकता। जहां स्वतंत्रता के लिए जारी कई आंदोलनों की शुरुआत भी इस इलाके के मिट्टी से की गई। वहीं, कोसी के सपूतों ने फिरंगियों को धूल चटा दी।
पंडित राजेंद्र मिश्र उर्फ राजा बाबू एवं खूब लाल मेहता इस जिले के पहले स्वतंत्रता सेनानी हुए। जिले के कर्णपुर गांव निवासी शिव नारायण मिश्र उर्फ लाल बाबाजी ने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र के नाम न्योछावर कर दिया।
लहटन चौधरी अपने बाल्यकाल में ही स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े और आजादी मिलने तक संघर्ष करते रहे।
कर्णपुर के चंद्रकिशोर पाठक, भोगेंद्र पाठक, बलदेव चौधरी, नवीन पाठक, महेंद्र पाठक, साजेंद्र मिश्र, शशिधर मिश्र, रामजी चौधरी, तेज नारायण पाठक की भूमिका अविस्मरणीय है।
बलुआ के ललित नारायण मिश्र ने भी आजादी की लड़ाई में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। गढ़ बरुआरी के गंगा प्रसाद सिंह, सुखदेव झा, बरैल के शत्रुघ्न प्रसाद सिंह जैसे योद्धा जीवन भर फिरंगियों से लड़ते रहे। इन्होंने अपनी तमाम सुख सुविधाओं का परित्याग कर फिरंगियों से लोहा लिया।
खबरें और भी
सुखपुर के कामेश्वर झा, बमभोला चंद, बौकू कामत, अरूप नंदन सिंह, तारणी प्रसाद सिंह, रामेश्वर सिंह, कपिलेश्वर मिश्र, सीताराम सिंह, अवध नारायण सिंह, खगेशी झा, मल्हनी के काली प्रसाद सिंह, ठाकुर सिंह, हरिनारायण सिंह, महेश्वर सिंह, बतहन साफी, परसरमा के त्रिवेणी सिंह, यमुना प्रसाद सिंह, चंद्रशेखर मिश्र, जगदीश सिंह, रामभद्र मिश्र, अनंत चौधरी, युगल किशोर सिंह, रामावतार सिंह, वीणा और एकमा के दिगंबर ठाकुर, कृष्णकांत झा, विश्वंभर मिश्र, भूरा पासवान, सुरेश्वर झा, महानंद झा, अजगैबीनाथ झा, शैलेश्वर मिश्र, तारणीकांत झा, भुजंगी झा, बलहा के महेश्वर कामत, यमुना झा, वासुदेव झा, खुशीलाल भगत, लाली चौधरी, जगतपुर के जयवीर झा, कुलानंद मल्लिक, कुशेश्वर मल्लिक, जयराम मिश्र, नेमुआ के ढलाय चौधरी, मलाढ़ के कपिलेश्वर झा, मृत्युंजय झा, महुआ के मो.सफीक, सोल्हनी के रामेश्वर खां उर्फ बटुक खां की कुर्बानी को भुलाया नहीं जा सकता है। जदिया के सखीचंद मंडल, कुंजी लाल यादव, कुंज बिहारी मंडल, कुसुम लाल यादव, विद्यानंद मंडल, हरदी के मधुकर कामत, निर्मली के रसिक लाल धानुक, गंगा प्रसाद चौधरी, भीखू पैकार, सिताय संत, रामप्रताप मंडल, नंदन सिंह, पिपरा-खुर्द के ठीठर गोप, हटबरिया के हरिवल्लभ सिंह, फुलेश्वर सिंह, थरबिटिया के ढ़ोराय कामत, आनंदीपट्टी के पंचानन सिंह, नरसिंह प्रसाद सिंह, थुमहा के शिवनंदन झा, सोनी मंडल, लखीचंद मंडल, अमहा के हीरालाल कामत, हरदी के रामपाल यादव, कोरियापट्टी के शालिग्राम सिंह, सियाराम सिंह, बैकुंठ प्रसाद सिंह, डपरखा के सरोवर मंडल, माणिक लाल मंडल, बैरो के रामावतार सिंह, सरायगढ़ के रामदेव गुप्ता के योगदान को लोग राष्ट्रीय पर्व के मौके पर याद करना नहीं भूलते हैं।