742 करोड़ की परियोजना पर नहीं बढ़ी बात; डेढ़ दशक से सिवान-सारण से यूपी तक रेल कनेक्टिविटी का सपना अधूरा
सिवान, सारण और पूर्वी यूपी को जोड़ने वाली 742 करोड़ की मांझी-लार रोड रेल परियोजना डेढ़ दशक से अधूरी है, जिससे लाखों लोगों का रेल कनेक्टिविटी का सपना अ ...और पढ़ें

सिवान, सारण और यूपी को जोड़ने वाली रेल परियोजना अधूरी। सांकेतिक तस्वीर
HighLights
मांझी-लार रोड रेल परियोजना डेढ़ दशक से लंबित।
742 करोड़ की लागत वाली परियोजना का सर्वे पूरा।
यूपी सरकार से भूमि न मिलने से निर्माण रुका।
शशि भूषण उपाध्याय, सिसवन। सिवान, सारण और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लाखों लोगों के लिए बहुप्रतीक्षित मांझी-लार रोड नई रेल परियोजना करीब डेढ़ दशक बाद भी धरातल पर नहीं उतर सकी है।
वर्ष 2010-11 में शुरू हुई इस परियोजना के तहत वर्ष 2011-12 में करीब 92.655 किलोमीटर लंबी प्रस्तावित रेल लाइन का सर्वे भी कराया गया था। बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं होने से अब भी फाइलों में ही सिमटी हुई है।
तत्कालीन सिवान सांसद ओमप्रकाश यादव ने रेल मंत्रालय के समक्ष मांझी स्टेशन को लार रोड स्टेशन से नई रेल लाइन के माध्यम से जोड़ने का प्रस्ताव रखा था।
इसके बाद रेल मंत्रालय ने परियोजना के सर्वे को मंजूरी दी थी। प्रस्तावित रेल लाइन के जरिए लार रोड, सोहगरा, गुठनी, दरौली, रघुनाथपुर, सिसवन और मांझी को जोड़ने की योजना थी। उस समय परियोजना की अनुमानित लागत करीब 741.94 करोड़ रुपये आंकी गई थी।
जनप्रतिनिधियों की कवायद भी नहीं ला सकी रंग
परियोजना को लेकर समय-समय पर जनप्रतिनिधियों ने पहल की, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। 24 जुलाई 2026 को विधायक विष्णु देव पासवान ने शून्यकाल के दौरान इस मामले को विधानसभा में उठाया।
उन्होंने सरकार का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि रेल परियोजना का सर्वेक्षण पूरा होने के बावजूद निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है। उन्होंने जल्द से जल्द निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की।
वहीं, वर्ष 2022 में सिवान की तत्कालीन सांसद कविता सिंह ने भी रेल मंत्री से मिलकर इस परियोजना को लेकर पत्र सौंपा था।
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लगातार उठ रही मांगों के बाद क्षेत्र के लोगों में एक बार फिर रेल लाइन निर्माण की उम्मीद जगी थी, लेकिन अभी तक स्थिति में कोई ठोस बदलाव नहीं आया है।
यूपी सरकार से मांगी गई थी मुफ्त जमीन
परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए रेलवे की ओर से उत्तर प्रदेश सरकार से मुफ्त में भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था।
साथ ही निर्माण लागत का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा उपलब्ध कराने की मांग की गई थी, ताकि परियोजना को आगे की मंजूरी के लिए रेल मंत्रालय के समक्ष भेजा जा सके।
हालांकि, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से इस संबंध में कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिलने के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी।
स्टेशनों के लिए स्थान भी किया गया था चिह्नित
सर्वे के दौरान प्रस्तावित रेल लाइन पर स्टेशन और हॉल्ट बनाने के लिए स्थान भी चिह्नित किए गए थे। इसके तहत ताजपुर, सिसवन, टारी, दरौली और गुठनी में स्टेशन या हॉल्ट बनाने की योजना थी।
सर्वे के दौरान विभिन्न स्थानों पर लगाए गए चिन्ह भी अब दिखाई नहीं देते हैं। कहीं खेती के दौरान इन्हें हटा दिया गया तो कहीं सड़क निर्माण के दौरान चिन्ह समाप्त हो गए।
रेल सुविधा मिलने से लोगों को होगी बड़ी सहूलियत
मांझी-लार रोड रेल लाइन का निर्माण होने से सिवान, सारण और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों को सीधा रेल संपर्क मिल सकेगा। इससे व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों के साथ-साथ आवागमन में भी काफी सहूलियत होने की उम्मीद है।
क्षेत्र के समाजसेवी एवं ग्रामीणों का कहना है कि दक्षिणांचल क्षेत्र के लोगों को वर्तमान में ट्रेन पकड़ने के लिए सिवान या छपरा जाना पड़ता है।
दूसरे प्रदेशों से लौटने वाले यात्रियों को भी सिवान या छपरा स्टेशन पर उतरना पड़ता है। रात की ट्रेन पकड़ने के लिए लोगों को दिन में ही घर से निकलना पड़ता है, जबकि रात में ट्रेन से उतरने के बाद घर पहुंचने के लिए कई बार सुबह होने का इंतजार करना पड़ता है।
समाजसेवियों ने सरकार और रेल मंत्रालय से मांग की है कि लंबे समय से लंबित मांझी-लार रोड रेल परियोजना को प्राथमिकता देते हुए निर्माण कार्य शुरू कराया जाए।
उनका कहना है कि यह रेल लाइन दक्षिणांचल क्षेत्र के लोगों के लिए आवागमन का महत्वपूर्ण साधन बनने के साथ ही क्षेत्र के आर्थिक विकास में भी अहम भूमिका निभाएगी।