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सारण तटबंध टूटने पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, निरीक्षण करने पहुंचे अधिकारियों को खदेड़ा

Published: Thu, 08 Oct 2026 08:22 AM (IST)

सारण तटबंध टूटने से बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का घेराव किया और अस्थायी मरम्मत पर ...और पढ़ें

निरीक्षण करने पहुंचे अधिकारियों को खदेड़ा (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

निरीक्षण करने पहुंचे अधिकारियों को खदेड़ा (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

HighLights

  1. बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों ने जल संसाधन अधिकारियों का विरोध किया।

  2. अस्थायी बालू बोरियों की मरम्मत पर ग्रामीणों ने सवाल उठाए।

  3. स्थायी मरम्मत के लिए मिट्टी और बोल्डर की तत्काल मांग।

संवाद सूत्र, मकेर (सारण)। सारण तटबंध टूटने से बाढ़ की मार झेल रहे ग्रामीणों का आक्रोश अब जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के सामने भी सामने आने लगा है। बुधवार को टूटे तटबंध का जायजा लेने पहुंचे जल संसाधन विभाग के अध्यक्ष नवल किशोर सिंह के नेतृत्व में अधिकारियों की टीम को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। 

बाढ़ में घर और सामान गंवा चुके ग्रामीणों ने अधिकारियों से मौके से वापस लौटने को कहा। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि तटबंध की मजबूत मरम्मत के लिए पर्याप्त मिट्टी और बोल्डर उपलब्ध कराए बिना केवल बालू भरी बोरियां लगाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा।

ग्रामीण अरुण सिंह, गोलू सिंह, सुमन सिंह, दिनेश राय, आकाश कुमार, लगन साह और अभिषेक सिंह समेत अन्य ने कहा कि तटबंध टूटने से उनके घरों में पानी घुस गया और कई आशियाने पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। ऐसे में वे दोबारा उसी तरह की स्थिति का जोखिम नहीं लेना चाहते।

बालू की बोरियों से मरम्मत पर सवाल 

ग्रामीणों का आरोप है कि टूटे तटबंध को तत्काल सुरक्षित करने के नाम पर बांस और बालू भरी बोरियों के सहारे काम चलाया जा रहा है। गंडक नदी के तेज बहाव और पानी के दबाव के बीच इस व्यवस्था की मजबूती को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए। 

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उनका कहना है कि यदि मजबूत सामग्री से समय रहते तटबंध को सुरक्षित किया जाता तो बाढ़ की स्थिति में नुकसान कम किया जा सकता था। तटबंध टूटने के बाद आसपास के कई घर पानी की चपेट में आकर ध्वस्त हो गए, जिससे प्रभावित परिवारों में नाराजगी है।

दो माह बाद स्थायी मरम्मत का आश्वासन  

ग्रामीणों के विरोध के बीच जल संसाधन विभाग के अध्यक्ष नवल किशोर सिंह ने बताया कि टूटे तटबंध की स्थायी मरम्मत करीब दो माह बाद कराई जाएगी। फिलहाल टूटे हिस्से के दोनों किनारों को बांस और बालू भरी बोरियों के माध्यम से सुरक्षित करने की अस्थायी व्यवस्था की जा रही है। इसका उद्देश्य तत्काल पानी के दबाव को नियंत्रित करना है।

मिट्टी और बोल्डर तत्काल उपलब्ध कराने की मांग  

ग्रामीणों ने कहा कि बाढ़ की विभीषिका में अपना घर गंवाने के बाद वे केवल अस्थायी उपाय पर भरोसा नहीं कर सकते। उन्होंने टूटे तटबंध की मजबूती के लिए पर्याप्त मात्रा में मिट्टी और बोल्डर तत्काल उपलब्ध कराने तथा तकनीकी मानकों के अनुरूप मरम्मत कराने की मांग की।

ग्रामीणों का कहना है कि औपचारिकता के बजाय ऐसी स्थायी व्यवस्था की जरूरत है, जिससे भविष्य में गंडक के तेज बहाव और पानी के दबाव से तटबंध सुरक्षित रह सके।

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