सारण में प्राकृतिक खूबसूरती के बीच है यह प्राचीन शिवालय, बाबा कमलेश्वर नाथ से जुड़ी हैं कई मान्यताएं
सारण के अमनौर हरनारायण गांव में स्थित बाबा कमलेश्वर नाथ मंदिर धार्मिक आस्था, इतिहास और पर्यटन का संगम है। यह प्राचीन शिवालय बड़े पोखरे के किनारे प्राक ...और पढ़ें

कमलेश्वर नाथ मंदिर में सालभर रहता है भक्तों का जमावड़ा। जागरण
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अमनौर हरनारायण गांव में स्थित प्राचीन बाबा कमलेश्वर नाथ मंदिर।
धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक महत्व और पर्यटन स्थल के रूप में प्रसिद्ध।
बड़े पोखरे के किनारे प्राकृतिक वातावरण, मनोकामना पूर्ति की मान्यता।
सुरेश कुमार सिंह, अमनौर। अमनौर हरनारायण गांव स्थित बाबा कमलेश्वर नाथ मंदिर धार्मिक आस्था के साथ ऐतिहासिक और पर्यटन महत्व के लिए भी अपनी अलग पहचान रखता है।
अमनौर पर्यटन स्थल बड़े पोखरे के परिसर में प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित यह प्राचीन शिवालय वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है।
मान्यता है कि बाबा कमलेश्वर नाथ से मांगी गई मनोकामना पूरी होने के बाद श्रद्धालु यहां विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। सावन और महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। सड़क मार्ग से जुड़े होने के कारण यहां बस, आटो और टोटो से आसानी से पहुंचा जा सकता है।
मंदिर का इतिहास
बड़े पोखरे के परिसर में स्थित कमलेश्वर नाथ मंदिर के इतिहास को लेकर कई किवदंतियां प्रचलित हैं। ग्रामीणों और बुद्धिजीवियों के अनुसार इस प्राचीन मंदिर का संबंध पुराने संघर्ष काल से रहा है।
मान्यता है कि क्षत्रिय वीरों ने युद्ध में सफलता और विजय की कामना से यहां भगवान शिव की आराधना की थी। युद्ध में विजय प्राप्त करने के बाद उन्होंने अपना शासन स्थापित किया तथा पोखरे और मंदिर का निर्माण कराया।
समय के साथ मंदिर ने कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन इसकी धार्मिक और आध्यात्मिक गरिमा बनी रही। कालांतर में मंदिर का कई बार जीर्णोद्धार कराया गया।
मंदिर के वर्तमान स्वरूप को संवारने में स्वर्गीय विजय बाबू के योगदान को ग्रामीण विशेष रूप से याद करते हैं। उन्होंने ग्रामीणों से सहयोग जुटाकर मंदिर के विकास और संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 1969 के आसपास परिसर में लक्ष्मीनारायण मंदिर और बाद में हनुमान मंदिर का भी निर्माण कराया गया।
मंदिर की विशेषता
कमलेश्वर नाथ मंदिर की विशेषता इसकी धार्मिक आस्था के साथ आसपास का प्राकृतिक वातावरण भी है। बड़े पोखरे, हरियाली और शांत वातावरण के बीच स्थित मंदिर श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराता है।
वर्तमान में बड़े पोखरे को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किए जाने से मंदिर परिसर की सुंदरता और आकर्षण भी बढ़ा है। वन के दौरान यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है। वहीं फाल्गुन मास की महाशिवरात्रि पर भगवान शिव का विशेष शृंगार किया जाता है और भव्य मेले का आयोजन होता है।
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मंदिर जाने का रास्ता
मंदिर छपरा-रेवा एनएच-722 पर सोनहो और भेल्दी से करीब पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। शीतलपुर-सिवान एसएच-73 पर अमनौर एचआर महाविद्यालय के उत्तर दिशा से भी मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।
तरैया और मढ़ौरा से इसकी दूरी करीब सात किलोमीटर है। सड़क मार्ग से मंदिर तक नियमित बस, आटो और टोटो की सुविधा उपलब्ध रहती है।
भगवान कमलेश्वर नाथ की पूजा हमारे वंशज कई पीढ़ियों से करते आ रहे हैं। मंदिर काफी प्राचीन है और यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होने की मान्यता है। प्रखंड के दर्जनों गांवों से लोग नियमित रूप से पूजा करने पहुंचते हैं। महाशिवरात्रि पर विशेष शृंगार, धार्मिक अनुष्ठान और भव्य मेले का आयोजन होता है।
शिलानाथ उपाध्याय उर्फ गुरदेली बाबा, पुजारी
मंदिर का इतिहास काफी पुराना है। ग्रामीणों के सहयोग से मंदिर की देखरेख और व्यवस्था होती है। आज मंदिर परिसर की भव्यता लोगों को आकर्षित करती है। बड़े पोखरे के कारण यह स्थान पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बन गया है। यहां लोग पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन के साथ नौका विहार का आनंद लेते हैं।
सुधीर सिंह, श्रद्धालु

