यूपी में बिछड़ी संगीता, बिहार में मां कर रही थी इंतजार, तीन साल बाद वीडियो कॉल पर भावुक मिलन
वाराणसी के मानसिक चिकित्सालय में तीन साल से उपचार करा रही संगीता पासवान का बिहार में अपनी मां से वीडियो कॉल पर भावुक मिलन हुआ। बीडीओ की पहल और अस्पताल ...और पढ़ें

वीडियो काल पर बात करने के बाद संगीता।
HighLights
तीन साल बाद संगीता पासवान का परिवार से भावुक मिलन।
वाराणसी के अस्पताल से वीडियो कॉल पर मां से मिली बेटी।
बीडीओ की पहल और सहयोग से बिछड़े परिवार का पुनर्मिलन।
संवाद सहयोगी, वारिसनगर (समस्तीपुर)। तीन साल से परिवार से दूर एक मां की बेटी को जब अचानक वीडियो काल पर अपनी मां की सूरत दिखाई दी तो भावनाओं का बांध टूट गया।
वाराणसी के मानसिक चिकित्सालय में उपचार करा रही संगीता पासवान अपनी मां को देखते ही रो पड़ी। दूसरी ओर, लंबे इंतजार के बाद बेटी को सामने देखकर मां की आंखों से भी आंसू छलक उठे। मोबाइल स्क्रीन पर हुई यह मुलाकात मां-बेटी के लिए भले कुछ पल की थी, लेकिन तीन साल के बिछोह का दर्द और अपनापन उसमें साफ झलक रहा था।
अस्पताल से आया एक फोन
वारिसनगर के प्रखंड विकास पदाधिकारी आमना वसी की पहल से करीब तीन वर्षों से परिवार से बिछड़ी संगीता को उसके परिजनों से जोड़ने की राह खुली। वाराणसी के पाण्डेयपुर स्थित मानसिक चिकित्सालय की मनोचिकित्सक डा. पालक खेमका ने दो-तीन दिन पूर्व बीडीओ से संपर्क किया। उन्होंने अस्पताल में उपचाराधीन महिला को उसके परिवार से मिलाने में सहयोग मांगा।
याद था सिर्फ भाई का नाम
अस्पताल में भर्ती संगीता अपने बारे में बहुत कम जानकारी बता पा रही थी। उसे सिर्फ अपने भाई का नाम संजीव पासवान और घर का नाम मकसूदपुर, वारिसनगर याद था। इतनी छोटी-सी जानकारी परिवार तक पहुंचने की एकमात्र कड़ी बनी।
पंचायतकर्मियों ने खोजा परिवार
बीडीओ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल स्थानीय स्तर पर परिवार की तलाश शुरू कराई। पंचायत स्तर के कर्मियों और स्थानीय लोगों की मदद से संगीता के परिजनों की पहचान करने में सफलता मिली। परिवार का पता चलने के बाद बीडीओ ने वीडियो काल के माध्यम से संगीता की उसके परिजनों से बातचीत कराई।
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मां को देखते ही रो पड़ी संगीता
वीडियो काल पर जैसे ही संगीता की नजर अपनी मां पर पड़ी, वह भावुक होकर रोने लगी। बेटी को सामने देखकर मां की आंखों से भी आंसू छलक पड़े। दोनों एक-दूसरे को निहारते रहे। मोबाइल स्क्रीन के उस पार से मां-बेटी का यह मिलन वहां मौजूद लोगों के लिए भी बेहद मार्मिक क्षण बन गया।
तीन साल का इंतजार हुआ कम
संगीता का परिवार करीब तीन वर्षों से उसके बारे में चिंतित था। अचानक अस्पताल से मिली जानकारी और प्रशासन की पहल ने परिवार को बेटी से दोबारा जुड़ने का मौका दिया।
संगीता को परिवार से जोड़ने की यह पहल न केवल मानवीय संवेदना की मिसाल बनी, बल्कि यह भी दिखाती है कि छोटी-सी जानकारी और सामूहिक प्रयास से बिछड़े लोगों को उनके अपनों तक पहुंचाया जा सकता है।