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ब‍िहार में 'जल प्रलय' की आहट! कोसी बराज के 33 गेट खुले तो आएगा 6 लाख क्यूसेक पानी, सुपौल-सहरसा से खाली कराए जा रहे गांव

Published: Fri, 25 Sep 2026 10:59 AM (IST)Updated: Fri, 25 Sep 2026 03:56 PM (IST)

Kosi River Flood Alert : कोसी नदी में जलस्तर बढ़ने से बिहार के सुपौल, सहरसा, खगड़िया और नवगछिया में बाढ़ ...और पढ़ें

कोसी नदी के कारण कटाव हो रहा है।

कोसी नदी के कारण कटाव हो रहा है।

HighLights

  1. कोसी बराज से 2.52 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया, बाढ़ का खतरा।

  2. अगले 24-48 घंटों में 6 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने की चेतावनी।

  3. सुपौल, सहरसा, खगड़िया के निचले इलाकों से गांवों को खाली करने का निर्देश।

जागरण टीम, भागलपुर। Kosi River Flood Alert: 'उत्तर बिहार का शोक' कही जाने वाली कोसी नदी एक बार फिर अपने विकराल और रौद्र रूप से तबाही मचाने पर आमादा है। बंगाल की खाड़ी में बने गहरे चक्रवातीय दबाव (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) और पड़ोसी देश नेपाल के पहाड़ी व मैदानी जलग्रहण क्षेत्रों में हो रही मूसलाधार बारिश ने कोसी बेसिन में जलप्रलय जैसी स्थिति उत्पन्न कर दी है।

वीरपुर स्थित कोसी बराज पर पानी की आवक इतनी तेज है कि शुक्रवार सुबह 9 बजे जहां जलस्राव 1.90 लाख क्यूसेक दर्ज किया गया था, वहीं दोपहर 3 बजे तक यह अप्रत्याशित रूप से उछलकर ढाई लाख (2.52 लाख) क्यूसेक के पार पहुंच गया।

बराज के कंक्रीट ढांचे पर बढ़ते प्रचंड दबाव को संतुलित करने और नदी के सुरक्षित निकास के लिए प्रशासनिक अधिकारियों ने बराज के कुल 56 में से 33 फाटकों को पूरी तरह खोल दिया है। जल संसाधन विभाग ने समूचे कोसी क्षेत्र में 'रेड अलर्ट' जारी करते हुए चेतावनी दी है कि अगले 24 से 48 घंटों के भीतर बराज से लगभग छह लाख क्यूसेक पानी का भारी डिस्चार्ज हो सकता है, जो पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड को तोड़ सकता है।

तटबंधों पर 24 घंटे अभियंताओं का पहरा

यदि बराज से छह लाख क्यूसेक पानी का प्रवाह डाउनस्ट्रीम में होता है, तो तटबंधों पर पानी का ऐसा दबाव बनेगा जो विनाशकारी साबित हो सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए पूर्वी और पश्चिमी कोसी तटबंधों की सुरक्षा के लिए इंजीनियरों और श्रमिकों की पूरी फौज को ग्राउंड पर उतार दिया गया है।

कोसी बराज व बाढ़ का ताजा बुलेटिन

  • वर्तमान जलस्राव (डिस्चार्ज): 2.52 लाख क्यूसेक पार (शुक्रवार दोपहर 3 बजे); सुबह 9 बजे यह 1.90 लाख था।

  • खुले फाटकों की अद्यतन स्थिति: बराज के 56 में से 33 फाटक ऊपर उठाए गए।

  • संभावित अधिकतम डिस्चार्ज (24–48 घंटे): 6,00,000 (छह लाख) क्यूसेक से अधिक।

  • अत्यधिक संवेदनशील बिंदु: मरौना (17.20 किमी स्पर), चन्द्रायण प्रमंडल के 96.60 किमी, 101.23 किमी और 103.30 किमी तटबंध बिंदु।

  • हाई अलर्ट जिले: सुपौल, सहरसा, खगड़िया और भागलपुर का नवगछिया पुलिस जिला।

  • खगड़िया में प्रभाव समय: बराज से छोड़ा गया पानी 36 घंटे में पहुंचेगा; नदी का जलस्तर 1 से 1.5 मीटर तक बढ़ने का अनुमान।

  • राहत व बचाव तैयारी: 120 बांध श्रमिक, लाखों सैंड बैग्स, जियो बैग्स, नावें अधिग्रहित, प्लास्टिक शीट वितरण।

बाढ़ नियंत्रण वीरपुर के मुख्य अभियंता ई. संजीव शैलेश के अनुसार, बराज की संरचना को किसी भी क्षति से बचाने के लिए पानी को बीचोंबीच वाले फाटकों से व्यवस्थित रूप से डाउनस्ट्रीम में बहाया जा रहा है।

लाखों सैंड बैग्स तैयार

उधर, चन्द्रायण डिविजन (सहरसा) के कार्यपालक अभियंता आलोक कुमार ने बताया कि तटबंध के चिह्नित अतिसंवेदनशील बिंदुओ- विशेष रूप से 96.60 किमी, 101.23 किमी और 103.30 किमी पर अभियंताओं की टीमें दिन-रात कैंप कर रही हैं। किसी भी संभावित कटाव को रोकने के लिए लाखों बालू भरे बोरों (सैंड बैग्स) और बोल्डर क्रेट्स का भंडारण पहले ही पूरा कर लिया गया है। सुपौल के मरौना में बीडीओ रचना भारतीय और सहायक अभियंता अरुण कुमार ने सर्वाधिक संवेदनशील 17.20 किमी स्पर का गहन मुआयना किया है।

लाउडस्पीकर से मुनादी

छह लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने की चेतावनी ने तटबंध के भीतर बसे सैकड़ों गांवों में अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया है। सुपौल, सहरसा, खगड़िया और नवगछिया (भागलपुर) के दियारा व निचले इलाकों में प्रशासनिक टीमों द्वारा लगातार लाउडस्पीकर से मुनादी कराई जा रही है।

मवेशियों और बच्चों को लेकर ऊंचे स्थानों की ओर भागे लोग

सीओ और बीडीओ स्तर के अधिकारी गांवों में घूम-घूमकर ग्रामीणों से अपने मवेशियों, सूखे अनाज और जरूरी कागजातों के साथ तत्काल सुरक्षित तटबंधों व ऊंचे सरकारी भवनों में जाने की अपील कर रहे हैं। सहरसा के महिषी अंचल के सीओ संजय कुमार और नवहट्टा की सीओ मौनी बहन ने राजस्व कर्मचारियों को फील्ड में मुस्तैद रहने का निर्देश दिया है।

आपात स्थिति के लिए सरकारी व निजी नावों को अधिग्रहित किया जा रहा है और विस्थापितों के लिए प्लास्टिक शीट का वितरण शुरू कर दिया गया है। सीमा पार नेपाल एपीएफ (सशस्त्र पुलिस बल) भी बराज के आसपास आम नागरिकों को नदी किनारे जाने से रोक रही है।

36 घंटे में खगड़िया पहुंचेगा बराज का पानी

कोसी बराज से छूटने वाले इस अथाह पानी का असर निचले मैदानी जिलों में भी दिखना तय है। बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-2, खगड़िया के कार्यपालक अभियंता मनीष कुमार ने बताया कि बराज से छोड़े जाने वाले पानी को खगड़िया की सीमा तक पहुंचने में करीब 36 घंटे का समय लगता है। इसे देखते हुए कोसी और बागमती के सभी तटबंधों पर बने सातों अस्थाई सुरक्षा कैंपों को 24 घंटे के लिए सक्रिय कर दिया गया है।

1.5 मीटर तक बढ़ेगा जलस्तर

मौके पर 120 अनुभवी बांध श्रमिक और कनीय अभियंता लगातार पेट्रोलिंग कर रहे हैं। कार्यपालक अभियंता के अनुसार, यदि छह लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज होता है, तो खगड़िया में कोसी का जलस्तर 1 से 1.5 मीटर तक बढ़ सकता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग पूरी तरह मुस्तैद है और लोगों को घबराने की नहीं, बल्कि सतर्क रहने की आवश्यकता है।

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