66.89 करोड़ की योजना रुकी; 6 माह बाद भी काम शुरू नहीं, रोहतासगढ़ रोड प्रोजेक्ट का मामला क्यों अटका?
रोहतासगढ़ किला और रोहितेश्वर धाम मंदिर तक सड़क निर्माण का कार्य वन विभाग की एनओसी के कारण रुका हुआ है। छह माह पूर्व शिलान्यास के बावजूद 66.89 करोड़ रु ...और पढ़ें

एनओसी के चक्कर में फंसी जनहित की बड़ी योजना।
HighLights
रोहतासगढ़ सड़क निर्माण वन विभाग की एनओसी के कारण अटका।
66.89 करोड़ की परियोजना छह माह बाद भी शुरू नहीं हुई।
पर्यटन और स्थानीय गांवों के विकास में बाधा, आवागमन कठिन।
संवाद सहयोगी, डेहरी ऑन-सोन (रोहतास)। कैमूर पहाड़ी पर अवस्थित ऐतिहासिक धरोहर रोहतासगढ़ किला तक सड़क निर्माण में वन विभाग के एनओसी का पेच फंस गया है।
पर्यटन के मानचित्र पर उपेक्षित रोहतासगढ़ किला और रोहितेश्वर धाम मंदिर तक पहुंच स्थापित करने के लिए रेहल से चौरासन मंदिर तक सड़क निर्माण को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने छह माह पूर्व ही शिलान्यास किया था।
15.5 किलोमीटर लंबी और 3.75 मीटर चौड़ी सड़क का निर्माण होना है। इसके लिए 66 करोड़ 89 लाख रुपये की लागत निर्धारित की गई है।
पथ निर्माण विभाग, प्रमंडल डेहरी द्वारा छह माह पूर्व ही निविदा प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। मेसर्स निरंजन शर्मा को निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सड़क निर्माण में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए वन विभाग और पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों ने संयुक्त सर्वे कर अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के लिए प्रस्ताव राज्य मुख्यालय भेज दिया है। हालांकि, अब तक एनओसी नहीं मिलने के कारण कार्य अधर में लटका हुआ है।
पर्यटन को बढ़ावा, आमजन का जीवन होगा सहज
सड़क निर्माण पूरा होने से जहां पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, वहीं वनवासी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। साथ ही नागाटोली, ब्रह्मदेवता, बभनतालाब, रानीबाग, भूलना समेत आधा दर्जन गांवों तक आवागमन सुगम हो जाएगा।
वर्तमान में इन गांवों के लोग 1580 फीट ऊंची घाटी के कठिन रास्तों से पैदल आवागमन करने को मजबूर हैं। कई बार मरीजों को डोली-खटोली से रोहतास प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक ले जाना पड़ता है।
सड़क के अभाव में रोहतासगढ़ किला और प्राचीन रोहितेश्वर धाम मंदिर तक पहुंचने में पर्यटकों और ग्रामीणों दोनों को काफी परेशानी होती है।
ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों की राय
पूर्व मुखिया कृष्णा सिंह यादव तथा बभनतालाब गांव निवासी रामलाल उरांव का कहना है कि सड़क नहीं होने से शिक्षा, चिकित्सा समेत सभी बुनियादी सुविधाएं प्रभावित हैं।
पहाड़ी पर बसे लोगों का जीवन कठिन हो गया है। निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी काम शुरू नहीं होने से लोगों में भ्रम की स्थिति है।
पंचायत समिति सदस्य मदन उरांव ने बताया कि यातायात के अभाव में वनवासियों का जीवन दुष्कर हो गया है। बच्चों की पढ़ाई और मरीजों के इलाज के लिए पहाड़ी रास्तों से पैदल उतरकर रोहतास जाना पड़ता है। सड़क बनने से आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा।
कहते हैं कार्यपालक अभियंता
कार्यपालक अभियंता प्रभाकर कुमार के अनुसार, 66 करोड़ 89 लाख रुपये की लागत से सड़क निर्माण की निविदा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
वन भूमि के बदले बिहार सरकार की जमीन चिह्नित कर विभाग को हस्तांतरित कर दी गई है। एनओसी मिलते ही प्राथमिकता के आधार पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।