Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    'हर टेंडर पर कमीशन फिक्स, सिंडिकेट के जरिए मची लूट'; तेजस्वी यादव का सम्राट सरकार पर बड़ा हमला 

    Updated: Sun, 28 Jun 2026 08:32 PM (GMT+05:30)

    राजद के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन, भ्रष्टाचार और टेंडर में धांधली का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अफसरों का सि ...और पढ़ें

    नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव। फोटो सोशल मीडिया

    नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव। फोटो सोशल मीडिया

    HighLights

    1. तेजस्वी ने बिहार सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन, भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।

    2. कहा, सरकारी टेंडरों में 2 से 30 प्रतिशत तक कमीशन फिक्स।

    3. अफसरों का सिंडिकेट लूट मचा रहा, सरकार बचा रही।

    राज्य ब्यूरो, पटना। राजद के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने रविवार को प्रेस-वार्ता कर वित्तीय कुप्रबंधन, भ्रष्टाचार और सरकारी टेंडर में धांधली के आरोपों के साथ कहा कि बिहार कंगाली के कगार तक पहुंच चुका है और सरकार के संरक्षण मेंं अफसरों का सिंडिकेट लूट मचाए हुए है।

    भ्रष्टाचार और रिशुश्री प्रकरण में उन्होंने सरकार से 20 प्रश्न पूछे तथा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और निवर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति कटु टिप्पणियां कीं।

    सृजन घोटाला, प्रश्नपत्र लीक और एस्टीमेट घोटाले की तरह टेंडर घोटाले पर भी लीपापोती किए जाने की आशंका जताई। उन्होंने कहा कि वित्तीय अराजकता ऐसी है कि सरकार को सामान्य खर्च के लिए आकस्मिकता निधि से 3660 करोड़ रुपये लेने पड़ रहे।

    टेंडर घोटाले में कार्रवाई पर सवाल

    तेजस्वी ने आरोप लगाया कि सरकार भ्रष्टाचार मेंं लिप्त प्रभावशाली लोगों को बचा रही है। कार्रवाई केवल अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारियों तक सीमित रहती है, जबकि बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार करने वालों को संरक्षण मिलता है।

    प्रश्न यह कि रिशुश्री से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान बिहार सरकार का वकील न्यायालय में उपस्थित क्यों नहीं हुआ? क्या रिशुश्री की कंपनियों को मिले टेंडरों की न्यायिक जांच होगी? जिन विभागों में घोटालों के आरोप लगे, उनके मंत्रियों ने नैतिक आधार पर त्यागपत्र क्यों नहीं दिया?

    खबरें और भी

    हर टेंडर पर कमीशन फिक्स

    तेजस्वी ने कहा कि सरकारी टेंडर और बिल पास करने हेतु दो से 3.5 प्रतिशत तक कमीशन तय है, जबकि ग्लोबल टेंडरिंग में यह कमीशन 30 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। बिहार में ऐसा सिंडिकेट सक्रिय है, जो ई-टेंडरिंग प्रक्रिया तक को प्रभावित कर रहा।

    कुछ अधिकारियों का नेटवर्क पूरे सिस्टम पर हावी है और उनके स्वजनों की कंपनियां तथा कंसल्टेंसी फर्म को सरकारी टेंडर मिल रहे। कोसी बेसिन परियोजना का टेंडर गुजरात की कंपनी को दिए जाने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई।

    यह भी पढ़ें- सम्राट 'अंगूठा छाप CM', नीतीश 'भ्रष्टाचार के भीष्म पितामह'; तेजस्वी यादव का सरकार पर तीखा हमला