राज्यसभा में अपनी दोनों सीटें गंवा सकता है राजद, AIMIM और बसपा से भी समर्थन मुश्किल
राजद बिहार में अपनी दोनों राज्यसभा सीटें गंवा सकता है, क्योंकि विधानसभा में उसके पास पर्याप्त विधायक नहीं हैं। एनडीए की मजबूत स्थिति के कारण राजद के ल ...और पढ़ें

राज्यसभा में अपनी दोनों सीटें गंवा सकता है राजद

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राज्य ब्यूरो, पटना। राज्यसभा में अपने हिस्से की दो सीटों पर राजद की वापसी संभव नहीं लग रही। कारण विधानसभा का संख्या बल है। एनडीए की उपस्थिति इतनी तगड़ी है कि एक अदद सीट के लिए भी राजद को हजार पापड़ बेलने पड़ेंगे।
एआईएमआईएम के पांचों विधायकों का साथ मिल जाए, तो भी दाल गलने से रही। इसके लिए भी महागठबंधन के सभी विधायकों को एकजुट रखना होगा, जो राजद के लिए कठिन चुनौती है।
ऐसी स्थिति में पांचों सीटों पर एनडीए की जीत लगभग तय-सी है। हालांकि, उसके यहां भी घटक दलों की अपेक्षाओं के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी।
पांच सीटों में से दो राजद की
बिहार से राज्यसभा की रिक्त हो रही पांच सीटों में से दो राजद की हैं। एक सीट अमरेंद्र धारी सिंह यानी एडी सिंह की है और दूसरी प्रेमचंद गुप्ता की। दो सीटें जदयू की हैं और एक राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के उपेंद्र कुशवाहा की।
जदयू से हरिवंश नारायण सिंह और रामनाथ ठाकुर का कार्यकाल पूरा हो रहा है। हरिवंश अभी राज्यसभा के उपसभापति हैं। अप्रैल में रिक्त हो रही इन पांचों सीटों के लिए एक साथ 16 मार्च को मतदान होना है। ऐसे में एक सीट भी मिलने की संभावना नहीं दिख रही।
एक सीट के लिए 41 विधायकों का समर्थन
कारण यह कि एक सीट के लिए भी 41 विधायकों का समर्थन चाहिए। इस बार तेजस्वी यादव सहित राजद के मात्र 25 विधायक हैं। कांग्रेस के छह, वामदलों के तीन और इंडियन इनक्लूसिव पार्टी (आईआईपी) के एकमात्र विधायक को जोड़कर महागठबंधन के विधायकों की कुल संख्या 35 की बनती है।
खबरें और भी
एनडीए से इतर छह विधायकों को जोड़कर बेशक यह संख्या 41 की बनती है, लेकिन उसमें एक विधायक बसपा का है, जिसका समर्थन मिलने की संभावना कम है।
दूसरों से सहयोग की गुंजाइश भी कम
विधानसभा में एनडीए और महागठबंधन के इतर छह विधायक (पांच एआईएमआईएम और एक बसपा) हैं। समर्थन हेतु महागठबंधन आशान्वित हो सकता है, लेकिन राजनीतिक परिस्थितियां वहां भी आड़े आएगी।
बसपा को रामगढ़ में जीत सतीश सिंह यादव ने दिलाई है। रामगढ़ में राजद प्रत्याशी के रूप में जगदानंद सिंह के पुत्र पराजित हुए हैं। बसपा समर्थन करे, तो हितों का टकराव होगा। वैसे भी बिहार में बसपा के विधायकों के सत्तारूढ़ गठबंधन के साथ चले जाने का रिकॉर्ड रहा है।
एआईएमआईएम बिना शर्त समर्थन देने से रहा, क्योंकि पिछली बार उसके चार विधायकों को राजद तोड़ चुका है। अपेक्षा के बावजूद राजद ने उसे महागठबंधन का हिस्सा भी नहीं बनाया, जबकि एआईएमआईएम उन्हीं पांच सीटों पर विजयी रहा है, जहां उसे 2020 में जीत मिली थी। स्वाभाविक है कि पूर्ववर्तियों का हश्र उसके विधायकों को सचेत करें।