पटना में 26,746 मकान बने दुकान-प्रतिष्ठान, नगर निगम को भनक तक नहीं! सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- निगरानी कहां थी?
पटना में 26,746 आवासीय मकानों के व्यावसायिक इस्तेमाल का खुलासा होने पर सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगम की निगरानी पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने पूर्व नग ...और पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट
HighLights
पटना में 26,746 आवासीय मकानों का व्यावसायिक इस्तेमाल मिला।
सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगम की निगरानी पर कड़ी नाराजगी जताई।
पूर्व नगर आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का आदेश।
विधि संवाददाता, पटना। पटना में आवासीय मकानों के बड़े पैमाने पर व्यावसायिक इस्तेमाल का मामला सामने आने के बाद नगर निगम की निगरानी व्यवस्था सवालों के घेरे में है। नगर निगम की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे के अनुसार सर्वे में 26,746 ऐसे मामले मिले, जहां आवासीय संपत्तियों का इस्तेमाल गैर-आवासीय या व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।
आंकड़ा सामने आने पर सुप्रीम कोर्ट ने निगम की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई।
सुप्रीम कोर्ट ने निगम की निगरानी पर उठाए सवाल
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि नगर निगम को इतने बड़े पैमाने पर हो रहे उल्लंघनों की जानकारी तब तक नहीं थी, जब तक मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने नहीं आया।
कोर्ट ने प्रथम दृष्टया इसे संबंधित नगर आयुक्तों की ओर से जिम्मेदारी से पूरी तरह मुंह मोड़ने का संकेत माना।
चार साल में सामने आए सिर्फ 500 मामले
कोर्ट के समक्ष दाखिल हलफनामे के अनुसार अनिमेष कुमार पराशर 26 नवंबर 2021 से 4 अक्टूबर 2025 तक करीब चार वर्ष पटना नगर निगम के नगर आयुक्त रहे।
इस दौरान नगर उपविधियों के उल्लंघन से जुड़े करीब 500 मामले सामने आए। इनमें 81 मामलों में स्वत: संज्ञान लिया गया और 129 मामलों में आदेश पारित हुए।
397 शिकायतों और 22 अन्य मामलों पर कार्रवाई
हलफनामे के अनुसार पराशर के कार्यकाल में 397 से अधिक शिकायतों और 22 अन्य मामलों पर भी कार्रवाई की गई। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने करीब चार वर्ष की अवधि के लिहाज से इन आंकड़ों को संतोषजनक नहीं माना।
कोर्ट ने कहा कि जमीनी स्तर पर हो रहे उल्लंघनों को लेकर तत्कालीन नगर आयुक्त की ओर से वास्तविक चिंता प्रथम दृष्टया दिखाई नहीं देती।
पूर्व नगर आयुक्त को खुद कोर्ट में देना होगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व नगर आयुक्त अनिमेष कुमार पराशर को नोटिस जारी किया है। उन्हें अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने का निर्देश दिया गया है।
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पीठ ने उनके कार्यकाल के दौरान नगर उपविधियों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में निगम की कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था की पड़ताल की।
26 हजार मामलों पर अब तक नोटिस नहीं
कोर्ट ने मौजूदा नगर आयुक्त की कार्रवाई पर भी असंतोष जताया। पीठ ने पाया कि सर्वे में चिन्हित अधिकांश उल्लंघनकर्ताओं को अब तक नोटिस तक जारी नहीं किया गया है। इतने बड़े पैमाने पर मामले सामने आने के बावजूद कार्रवाई की गति पर कोर्ट ने सवाल उठाया।
चार सप्ताह में सभी को नोटिस का आश्वासन
बिहार के महाधिवक्ता एसडी संजय ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि अधिकतम चार सप्ताह में सभी संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर दिए जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को चार सप्ताह के भीतर अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
15 सितंबर को फिर होगी सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को दोपहर दो बजे होगी। तब तक नगर निगम को चिन्हित मामलों में की गई कार्रवाई और जारी किए गए नोटिस से संबंधित अनुपालन रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष दाखिल करनी होगी।
वहीं पूर्व नगर आयुक्त को भी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखना होगा।