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    किन्नर मोनी और बिसिया ने रची बंटी की हत्या की साजिश, पटना में शराब पार्टी के बाद दिया वारदात को अंजाम

    Updated: Sun, 12 Jul 2026 11:29 PM (IST)

    पटना में बंटी की हत्या तीन किन्नरों को जेल भिजवाने के शक और देह व्यापार के विरोध के कारण की गई थी। ...और पढ़ें

    मृतक बंटी की फाइल फोटो।

    मृतक बंटी की फाइल फोटो।

    HighLights

    1. बंटी की हत्या किन्नरों को जेल भेजने के शक में हुई।

    2. देह व्यापार के विरोध के कारण भी बंटी को मारा गया।

    3. शराब पार्टी के बाद अपहरण कर बेरहमी से पीटकर हत्या।

    जागरण संवाददाता, पटना। तीन सहेली किन्नरों को जेल भिजवाने के शक और देह व्यापार के धंधे में लगातार मिल रहे विरोध का बदला लेने के लिए बंटी की हत्या की साजिश रची गई थी।

    बीते छह जुलाई को रविश समेत अन्य अपराधियों ने पहले शराब पार्टी की, फिर बंटी का अपहरण कर उसकी इतनी बेरहमी से पिटाई की कि उसकी मौत हो गई।

    साक्ष्य छुपाने के लिए आरोपितों ने शव को जमीन में दफना कर उसके पेट पर एक भारी पत्थर रख दिया, ताकि शव ऊपर न आ सके।

    पोस्टमार्टम के बाद बंटी का शव न्यू करबिगहिया स्थित उसके आवास पर लाया गया, जिसके बाद पटना के गुलबी घाट पर उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

    पुलिस सूत्रों से पता चला कि इस पूरी साजिश के पीछे मोनी नाम के एक किन्नर और रविश उर्फ बिसिया का हाथ है। पिछले महीने 15 जून को जक्कनपुर थाने की पुलिस ने माही और शिवानी समेत तीन किन्नरों को जेल भेजा था।

    किन्नर मोनी को यह पक्का शक था कि बंटी ने ही पुलिस से मुखबिरी कर उसकी सहेलियों को जेल भिजवाया है। मोनी अपनी सहेलियों की गिरफ्तारी का बदला लेना चाहती थी।

    मोनी और बिसिया के बीच पक्की दोस्ती, दोनों थे बंटी से परेशान

    किन्नर मोनी और बिसिया के बीच गहरी दोस्ती थी और दोनों मिलकर इलाके में देह व्यापार का धंधा चलाते थे। बंटी इस अवैध धंधे का लगातार विरोध करता था, जिससे मोनी और बिसिया दोनों काफी परेशान थे।

    मोनी को डर था कि बंटी उनके इस धंधे को पूरी तरह बंद करवा देगा, जिसे लेकर अक्सर बंटी और मोनी के बीच तीखी बहस होती थी। वहीं बिसिया की भी बंटी से पुरानी दुश्मनी थी और वह भी उससे बदला लेने की फिराक में था।

    घटना वाले दिन बंटी और बिसिया के बीच टाटा पार्क में जमकर मारपीट हुई थी। पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि वारदात से ठीक पहले आरोपितों ने शराब पार्टी की थी।

    इसी शराब पार्टी के दौरान बिसिया और मोनी ने बंटी को रास्ते से हटाने की पूरी प्लानिंग रची। इसके बाद बंटी को वहां बुलाया गया और नशे में धुत अपराधियों ने उसका अपहरण कर लिया। आरोपित उसे एक आटो में बैठाकर अथमलगोला की ओर ले गए और रास्ते में उसकी पीट-पीटकर बेरहमी से हत्या कर दी।

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    ऑटो यू-टर्न लेकर अपराधियों ने पुलिस को भटकाया

    हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने के लिए अपराधियों ने पुलिस को चकमा देने की शातिर चाल चली। अपराधी ऑटो से पटना से मोकामा वाले लेन में आगे बढ़े।

    पुलिस जब सीसीटीवी फुटेज खंगालते हुए और ऑटो का पीछा करते हुए आगे बढ़ी, तो उसे लगा कि आरोपित मोकामा की तरफ गए हैं और पुलिस दूसरे गांवों में खाक छानती रही।

    शातिर अपहरणकर्ताओं ने मोकामा पहुंचने से पहले ही यू-टर्न ले लिया और मोकामा से पटना आने वाली लेन में घुस गए। इसके बाद उन्होंने सूर्यपुरा गांव में जाकर बंटी के शव को जमीन में दफन कर दिया और पहचान व साक्ष्य मिटाने के लिए पेट पर भारी पत्थर रख दिया।

    ईंट-पत्थरों से चेहरे और शरीर को कूचा गया

    पोस्टमार्टम करने वाले डॉ. अजय कुमार सिंह ने बताया कि बंटी की गोली मारकर नहीं, बल्कि ईंट-पत्थरों से पीट-पीटकर बेरहमी से हत्या की गई है।

    पोस्टमार्टम में चेहरे और शरीर पर भारी चोटों की पुष्टि हुई है। वहीं मृतक के भाई मुकुल यादव ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया है। बताया कि छह दिनों से बंटी की तलाश में भटक रहे थे।

    अथमलगोला से लौटते समय भीड़ देखकर उन्होंने शव की पहचान की। उन्होंने खुद तीन अपराधियों को पकड़कर पुलिस के हवाले किया है, जिसमें बिसिया का भाई रवि, अजीत का भाई बजरंगी और रोहित शामिल है। बाकी पूरे मामले में मोनी, अजीत, बिसिया समेत अन्य अपराधी फरार चल रहे है।

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