आबकारी पुलिस की हिरासत से लापता युवक मामले में पटना हाईकोर्ट सख्त, CBI को सौंपी बिहिया कांड की जांच
आबकारी पुलिस की हिरासत से एक युवक के रहस्यमय ढंग से लापता होने के मामले में पटना हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने मामल ...और पढ़ें
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पटना हाई कोर्ट। (जागरण)
HighLights
युवक आबकारी पुलिस हिरासत से रहस्यमय ढंग से लापता हुआ।
पटना हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस जांच पर गंभीर सवाल उठाए।
बिहिया कांड की जांच तत्काल सीबीआई को सौंपने का आदेश।
जागरण संवाददाता, पटना। एक युवक को आबकारी पुलिस ने पकड़ा, फिर वह रहस्यमय तरीके से गायब हो गया। करीब एक साल तक राज्य पुलिस की जांच आगे नहीं बढ़ी।
आरोपित पुलिसकर्मी संदिग्ध बने रहे, युवक का मोबाइल भी कई दिनों तक पुलिसकर्मियों के पास रहा और महत्वपूर्ण साक्ष्यों को समय पर सुरक्षित नहीं किया गया।
इस पूरे घटनाक्रम पर पटना हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस की जांच की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाते हुए बिहिया थाना कांड संख्या 296/2025 की जांच तत्काल सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया है।
न्यायाधीश राजीव रंजन प्रसाद और अलोक कुमार सिन्हा की खंडपीठ ने कहा कि यह सामान्य मामला नहीं, बल्कि उन दुर्लभ और असाधारण मामलों में है, जहां राज्य की जांच एजेंसी पर भरोसा नहीं रह गया है।
कोर्ट ने अपने फैसले में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि ‘न्याय व्यवस्था की पूरी विफलता होगी अगर सच सामने नहीं आया’।
कोर्ट ने यह भी पाया कि आबकारी पुलिस के अधिकारियों की भूमिका होने के बावजूद जांच में गंभीर निष्क्रियता रही और करीब नौ महीने तक संदिग्धों से पूछताछ तथा वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने की दिशा में कोई सार्थक कदम नहीं उठाया गया।
क्या है मामला?
भोजपुर के बिहिया थाना क्षेत्र के गंज निवासी गौरी शंकर राम के बेटे सानोज कुमार के लापता होने का मामला है। कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक, 13 अगस्त 2025 की शाम करीब 6:35 बजे सानोज ने अपने परिवार को फोन कर बताया था कि उसे शराब पीने के आरोप में आबकारी पुलिस ने पकड़ लिया है।
इसके बाद फोन कट गया और उसका मोबाइल बंद हो गया। अगले दिन पिता ने बिहिया थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई। परिवार का आरोप था कि पुलिस हिरासत में सानोज के साथ मारपीट की गई और उसे वाहन में ले जाया गया।
मामले में स्थानीय लोगों और सीसीटीवी फुटेज से जुड़े साक्ष्यों का भी उल्लेख हुआ। जांच के दौरान सानोज का एक मोबाइल बाद में आबकारी पुलिसकर्मियों के पास से बरामद हुआ और उसकी लोकेशन जगदीशपुर आबकारी थाना क्षेत्र से जुड़ी पाई गई थी।
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'भाग गया' कहानी पर भी हाईकोर्ट ने उठाए सवाल
जांच के दौरान आबकारी पुलिस के अधिकारियों ने दावा किया कि गिरफ्तार लोगों में से एक वाहन की डिक्की खोलकर भाग गया था।
लेकिन हाईकोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज को देखने के बाद दर्ज किया कि जिस वाहन में युवक को रखा गया था, वह पूरी तरह बंद बोलेरो जैसा वाहन था और पीछे का दरवाजा खोले बिना उससे कूदकर भागना संभव प्रतीत नहीं होता।
कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि आबकारी पुलिस के अधिकारियों के बयान बदलते रहे और युवक का मोबाइल भी काफी समय तक उनके कब्जे में रहा। हाईकोर्ट ने इस कथित ‘भाग जाने’ की कहानी को बाद में सामने लाई गई कहानी के रूप में गंभीरता से देखा।
छह संदिग्ध हिरासत में, बयान बदलते रहे
2 जुलाई की सुनवाई में कोर्ट को बताया गया कि सात संदिग्धों में से छह को पुलिस ने हिरासत में लिया है। पूछताछ में सामने आया कि सानोज को अन्य लोगों के साथ आबकारी पुलिस ने हिरासत में लिया था।
अधिकारियों के बयान आपस में बदलते और असंगत पाए गए। कोर्ट ने इससे पहले ही जांच की गति पर नाराजगी जताते हुए कहा था कि सानोज आबकारी पुलिस की हिरासत में जाने के बाद गायब हुआ और यह पता लगाना जरूरी है कि वह भागा या उसके साथ कुछ और हुआ।
कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित किया कि महत्वपूर्ण गवाहों को सुरक्षा दी जाए। पिता ने अदालत में यह भी कहा था कि उन पर केस दबाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
हाईकोर्ट ने उन्हें और उनके परिवार को सुरक्षा देने तथा दबाव बनाने वालों की पहचान कर कानून के तहत कार्रवाई का निर्देश दिया।
कोर्ट ने कहा कि राज्य जांच एजेंसी की विश्वसनीयता ही सवालों के घेरे में है और उसकी निष्क्रियता से जांच में पक्षपात की आशंका के पर्याप्त ठोस कारण सामने आते हैं।
इसलिए यह मामला सीबीआई जांच के लिए उपयुक्त दुर्लभ और असाधारण श्रेणी में आता है। हाईकोर्ट ने भोजपुर एसपी को एक सप्ताह के भीतर पूरा रिकॉर्ड सीबीआई के पटना स्थित एसपी को सौंपने और सीबीआई को तत्काल जांच अपने हाथ में लेने का आदेश दिया है।