AI के क्षेत्र में बेंगलुरू-पूणे जैसा बन सकता है पटना, राज्यपाल ने कहा- बिहार भारत का कोर सेंटर
राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने कहा कि बिहार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को आंदोलन का रूप दिया जाए तो पटना अगला बेंगलुरु-पुणे बन सकता है। उन्होंने कृषि ...और पढ़ें

राज्यपाल सैयद अता हसनैन। फोटो जागरण
HighLights
पटना को AI क्षेत्र में बेंगलुरु-पुणे बनाने का लक्ष्य।
कृषि, चिकित्सा, शिक्षा में AI के महत्व पर राज्यपाल का जोर।
जल प्रबंधन, गुणवत्ता जांच में AI तकनीक का उपयोग।
जागरण संवाददाता, पटना। कृषि, चिकित्सा, शिक्षा के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI ) का काफी महत्व है। अगर इस क्षेत्र को बिहार में आंदोलन का रूप दिया जाए तो संभव है कि अगला बेंगलुरु-पुणे की तरह पटना भी बन हो सकता है।
बिहार में पिछले 20 वर्षों में बेहतर कार्य हुआ है, अब आइटी सेक्टर में बेहतर कार्य करने का मौका है। यह बातें राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने कहीं।
वह ऊर्जा ऑडिटोरियम में बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के सहयोग से आयोजित हो रहे AI समिट को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में AI का उपयोग होने से हमें फसल प्रबंधन में सहायता मिलेगी।
पानी का बेहतर प्रबंधन और मौसम की सटीक सूचना समय पर मिलने से कृषि को लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि बिहार सिविलाइजेशन की तरफ से भारत का बड़ा कोर सेंटर है।
चाणक्यगिरी यहीं से आई है। पुराने ज्ञान को नए ज्ञान परंपरा के साथ जोड़ने की जरूरत है। इसके लिए डेटा की जरूरत है। अब डाटा पर कार्य करने की जरूरत है। AI मेडिकल असिस्टेंट में काफी लाभदायी होगी।
ज्यादातर लोग डॉक्टर के पास जाते हैं, तो पहली बार में उनकी सलाह से खुश नहीं होते हैं। AI की काबिलियत है कि वह डीप डाटा को एनालाइज कर बेहतर सेकेंड ओपिनियन दे सकता है।
राज्यपाल का अनुभव
राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने भी इसको ट्राई किया था और डाटा एनालाइज को देखकर अचंभित रह गया था। उन्होंने कहा कि मैं नहीं कहता हूं कि आपको सेल्फ मेडिकेशन करना है, लेकिन नालेज के लिए यह बेहतर हो सकता है।
मोबाइल फोन से भी इसे आसानी से कर सकते है। शिक्षा के क्षेत्र में भी AI लाभकारी है। स्टार्टअप, इनोवेशन के माध्यम से बेहतर कार्य किया जा सकता है।
पानी की जांच में AI का उपयोग
कार्यक्रम में पीएचईडी मंत्री संजय कुमार सिंह ने कहा कि हर घर नल जल के माध्यम से घरों तक शुद्ध जल पहुंचाया जा रहा है। इसमें AI तकनीक का उपयोग कर आपूर्ति समस्या को दुरुस्त कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि इसकी गुणवत्ता जांच के लिए सिस्टम विकसित हुआ है, इससे गांव में ही AI के माध्यम से रियल टाइम डाटा मिल सकता है। जांच से लेकर लीकेज प्रूफ में AI माडल काफी लाभकारी होगा।
विधायकों और MLA को मिलेगी ट्रेनिंग
सीआइएमपी के निदेशक प्रो. राणा सिंह ने कहा कि AI के माध्यम से बिहार को तेजी से विकास कराने की दिशा में असीम संभावनाएं है। सीआइएमपी को नेशनल यूनिर्सिटी ऑफ सिंगापुर एवं IIT के साथ मिलकर राज्य के एमएलए व एमएलसी को AI के क्षेत्र में प्रशिक्षण की अनुमति दी गई है।
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सीआइएमपी में सवा आठ करोड़ की लागत से देश का पहला विकसित बिहार रणनीति कक्ष बनाया है। पांच हजार छात्रों को AI का प्रशिक्षण देने के लिए कार्य किया जा रहा है।
विशेष सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने दो दिवसीय कार्यक्रम की रूपरेखा बताई। मंच पर बीआइए अध्यक्ष रामलाल खेतान, आयोजन समिति के निखिल कुमार आदि मौजूद थे।
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