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    एंबुलेंस न मिलने पर ठेले पर लादकर भेजा कचरा चुनने वाले का शव, बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं की खुली पोल

    Updated: Sun, 09 Aug 2026 12:11 AM (IST)

    पटना में एंबुलेंस न मिलने के कारण एक मृतक के शव को ठेले पर लादकर अस्पताल भेजा गया, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खुल गई। ...और पढ़ें

    ठेले पर शव ले जाते हुए। (जागरण)

    ठेले पर शव ले जाते हुए। (जागरण)

    HighLights

    1. पटना में एंबुलेंस न मिलने पर शव ठेले पर ले जाया गया।

    2. पीएमसीएच सिर्फ एक किलोमीटर दूर था, फिर भी मदद नहीं मिली।

    3. यह घटना प्रशासनिक लापरवाही और मानवीय संवेदनाओं पर सवाल उठाती है।

    जागरण संवाददाता, पटना। बिहार की राजधानी पटना में स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं के दावों की पोल खोलती एक बेहद संवेदनशील तस्वीर सामने आई है।

    जहां महज एक किलोमीटर दूर स्थित पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल होने के बावजूद एक मृतक को एंबुलेंस या शव वाहन तक नसीब नहीं हुआ।

    लाचार पुलिस तंत्र को आखिरकार कचरा चुनने वाले एक युवक के शव को ठेले पर लादकर अस्पताल भेजना पड़ा। यह मामला पूरी प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यशैली और मानवीय संवेदनाओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

    पुलिस को बेसमेंट में एक युवक का शव मिलने की सूचना प्राप्त हुई थी। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने मृतक की पहचान सोनू के रूप में की, जो इलाके में कचरा चुनने का काम करता था।

    शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने के लिए पुलिस अधिकारियों ने लगातार आपातकालीन एंबुलेंस सेवा को फोन किया। काफी समय बीत जाने और बार-बार संपर्क साधने के बाद भी जब एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची, तो स्थिति काफी चिंताजनक हो गई।

    अस्पताल की दूरी महज एक किलोमीटर होने के बावजूद किसी भी प्रकार की सरकारी सहायता न मिल सकी।

    एंबुलेंस वाले लेते हैं ज्यादा पैसे 

    शव को ठेला पर भेजने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी लावारिस शव या फिर अन्य घटनाओं में मिले शव को पुलिस द्वारा ठेला पर भेजा जाता रहा है।

    पुलिस अधिकारी ने नाम न छांपने पर बताया कि सरकारी और निजी एंबुलेंस वाले को जैसे ही कहा जाता है कि शव ले जाना है। वह नहीं आता है। बहाना बनाने लगते हैं कि उन्हें इमरजेंसी में कहीं जाना है।

    निजी एंबुलेंस चालक इतना पैसा मांगते हैं कि उतना रुपये दे पाना संभव नहीं होता है। इस स्थिति में काफी देर तक शव को रखने पर हंगामा की आशंका बनी रहती है। इसलिए शव को जल्द से जल्द हटाने के लिए ठेला पर भेजा जाता है। ठेला चालक 500 से 100 रुपये में तत्काल वहां से शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया जाता है।

    नियमों की अनदेखी पर कार्रवाई का प्रावधान

    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और राज्य सरकार के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी लावारिस या दुर्घटनाग्रस्त शव के सम्मानजनक परिवहन के लिए शव वाहन अथवा एंबुलेंस की उपलब्धता प्राथमिकता पर होनी चाहिए।

    सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी व्यक्ति को मृत्यु के बाद भी गरिमापूर्ण व्यवहार का अधिकार प्राप्त है। एंबुलेंस सेवा या आपातकालीन नियंत्रण कक्ष द्वारा काल पर प्रतिक्रिया न देना घोर लापरवाही और दायित्वों के उल्लंघन की श्रेणी में आता है।

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    ऐसे मामलों में संबंधित एंबुलेंस सेवा प्रदाता एजेंसी पर अनुबंध रद करने की कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही, काल प्राप्त करने के बावजूद वाहन न भेजने वाले संबंधित कर्मियों और अधिकारियों पर विभागीय जांच बैठाकर निलंबन व सेवा समाप्ति जैसी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई का नियम है।

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