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Janmashtami 2026: रोहिणी नक्षत्र के अद्भुत संयोग में मनेगी जन्माष्टमी, 46 मिनट के शुभ मुहूर्त में ऐसे करें पूजा

Published: Thu, 03 Sep 2026 08:37 PM (IST)

शुक्रवार को भाद्रपद कृष्ण अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र के संयोग में जन्माष्टमी धूमधाम से मनाई जाएगी। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ...और पढ़ें

रोहिणी नक्षत्र के अद्भुत संयोग में मनेगी जन्माष्टमी

रोहिणी नक्षत्र के अद्भुत संयोग में मनेगी जन्माष्टमी

HighLights

  1. शुक्रवार को अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र में जन्माष्टमी का पर्व।

  2. भगवान श्रीकृष्ण के पूजन से संतान और वैवाहिक सुख की प्राप्ति।

  3. निशीथ लग्न में विशेष पूजा का शुभ मुहूर्त 46 मिनट का।

जागरण संवाददाता, पटना। भाद्रपद कृष्ण उदय काल अष्टमी में शुक्रवार को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पावन पर्व जन्माष्टमी धूमधाम से मनेगी। गृहस्थ और वैष्णव के साथ साधु-संत एक साथ व्रत करेंगे। शुक्रवार को अष्टमी तिथि एवं रोहिणी नक्षत्र का संयोग रात्रि 11:22 बजे तक रहेगा।

उदया तिथि में अष्टमी होने से पूरे दिन जन्माष्टमी का पर्व मनेगा। जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल भगवान को पंचामृत एवं गंगाजल से अभिषेक कर नए वस्त्र, मोर पंख, बांसुरी, माला, इत्र से शृंगार कर पंजीरी, पंचमेवा, माखन-मिश्री, ऋतुफल का भोग फिर आरती होगी।

ज्योतिष आचार्य पंडित राकेश झा ने बताया कि जन्माष्टमी पर वृष राशि की चंद्रमा, रोहिणी नक्षत्र व मृगशिरा नक्षत्र का युग्म संयोग, हर्षण व व्रज योग का संयोग बना रहेगा। श्रीकृष्ण के साथ माता देवकी, वासुदेव, बलदेव, नन्द, यशोदा की भी पूजा-अर्चना होगी।

भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा एवं व्रत करने से श्रद्धालुओं को संतान सुख, वैवाहिक सुख, प्रेम की प्रगाढ़ता, सुख-समृद्धि, शांति, उन्नति, आपसी सद्भावना तथा तीन जन्म के पापों से मुक्ति मिल जाती है।

भविष्य पुराण के मुताबिक इस व्रत को करने से अकाल मृत्यु,गर्भपात,वैधव्य, दुर्भाग्य एवं कलह नहीं होते है। इस दिन रोहिणी नक्षत्र,अष्टमी तिथि के साथ सूर्य और चन्द्रमा उच्च राशि में रहेंगे।

ज्योतिष शास्त्र में रोहिणी नक्षत्र को उदार, मधुर, मनमोहक और शुभ नक्षत्र माना जाता है। रोहिणी शब्द विकास, प्रगति का सूचक है। जप, तप, साधना व नए एवं बहुमूल्य वस्तुओं की खरीदारी के लिए यह दिन उत्तम होता है।

मनोकामना पूर्ति के लिए उपाय

  • धन एवं वंश वृद्धि के लिए : पीला फूल में इत्र अर्पित करें।
  • वैवाहिक व न्यायिक कार्य में सफलता के लिए: हल्दी एवं केसर चढाएं।
  • स्वास्थ्य लाभ के लिए: गुड़ से निर्मित खीर व हलवा का भोग लगाएं।
  • सौंदर्य व निरोग काया के लिए : माखन एवं दूध से बनी वस्तु का भोग लगाएं।

इसका करें पाठ और जाप

  • पाठ- गोपाल सहस्त्रनाम, विष्णु सहस्त्रनाम, मधुराष्टंकम्
  • मंत्र- श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेव

जन्माष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त:

  • वृष लग्न: रात्रि 09:43 बजे से 11:40 बजे तक
  • निशीथ लग्न: मध्यरात्रि 11:26 बजे से 12:12 बजे तक
  • निशिता पूजा की अवधि: 46 मिनट