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घड़े का पानी बना 'देसी सुपरड्रिंक': गर्मी में ठंडक के साथ पाचन सुधारे, इम्युनिटी बढ़ाए... फ्रिज से भी ज्यादा फायदे

By birendra vishwakarmaEdited By: Radha Krishna
Published: Fri, 03 Apr 2026 10:05 PM (IST)

Earthen Pot Water: गर्मी बढ़ने के साथ पटना में मिट्टी के घड़े के पानी की मांग बढ़ी है। लोग फ्रिज ...और पढ़ें

मिट्टी के घड़े की मांग तेजी से बढ़ी

मिट्टी के घड़े की मांग तेजी से बढ़ी

HighLights

  1. घड़े का पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा और स्वास्थ्यवर्धक होता है।

  2. यह पाचन सुधारे, गले को सुरक्षित रखे और पानी का स्वाद बढ़ाए।

  3. सस्ता, पर्यावरण-अनुकूल और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है।

जागरण संवाददाता, पटना। अप्रैल की शुरुआत के साथ ही तेज धूप और लू का असर दिखने लगा है। बाजारों में ठंडे पानी की मांग तेजी से बढ़ी है। इसी बीच मिट्टी के घड़े की वापसी ने ध्यान खींचा है। लोग फ्रिज के बजाय घड़े का पानी पीना पसंद कर रहे हैं।

गांव से लेकर शहर तक इसकी मांग बढ़ रही है। यह बदलाव सिर्फ परंपरा नहीं, समझदारी भी है।

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घड़े का विज्ञान, प्राकृतिक कूलिंग का असर

मिट्टी का घड़ा प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम पर काम करता है। इसमें मौजूद छोटे-छोटे छिद्र पानी को ठंडा करते हैं। वाष्पीकरण की प्रक्रिया से पानी का तापमान गिरता है।

यह ठंडक धीरे-धीरे और संतुलित तरीके से मिलती है। फ्रिज की तरह अचानक ठंडा नहीं होता। इससे शरीर पर झटका नहीं पड़ता।

स्वास्थ्य के लिहाज से क्यों बेहतर है घड़ा

घड़े का पानी शरीर के लिए अधिक अनुकूल माना जाता है। यह गले और पाचन तंत्र पर कम असर डालता है। फ्रिज का अत्यधिक ठंडा पानी कई बार नुकसान करता है।

गला खराब, सर्दी-जुकाम जैसी समस्याएं बढ़ती हैं। घड़े का पानी संतुलित तापमान बनाए रखता है। यह शरीर की प्राकृतिक जरूरत के करीब होता है।

स्वाद और मिनरल्स का भी है फर्क

मिट्टी के घड़े में पानी का स्वाद अलग होता है। यह हल्की मिठास और ताजगी का एहसास देता है। मिट्टी के गुण पानी में मिलकर उसे बेहतर बनाते हैं।

फ्रिज में रखा पानी स्वाद में सपाट हो जाता है। घड़ा पानी को जीवंत बनाए रखता है। यह प्राकृतिक अनुभव देता है।

सस्ता, टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल

घड़ा खरीदना बेहद सस्ता और आसान है। इसमें बिजली की कोई जरूरत नहीं होती। बिजली बचाने के लिहाज से यह बेहतर विकल्प है।

फ्रिज की तुलना में इसका कार्बन फुटप्रिंट शून्य है। पर्यावरण संरक्षण में भी यह सहायक है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी इससे बढ़ावा मिलता है।

परंपरा से आधुनिकता की ओर वापसी

आज के समय में लोग फिर से परंपरागत तरीकों की ओर लौट रहे हैं। मिट्टी का घड़ा उसी सोच का हिस्सा बन रहा है। यह सिर्फ एक बर्तन नहीं, जीवनशैली का प्रतीक है।

आधुनिकता और परंपरा का संतुलन इसमें दिखता है। गर्मी से राहत के साथ यह स्वास्थ्य भी देता है। शायद यही वजह है कि घड़ा फिर से घरों में जगह बना रहा है।