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    सम्राट का विकास मंत्र शुरू: हरिहरनाथ से पुनवरा धाम तक कॉरिडोर, भोलेनाथ से मां जानकी मंदिर तक चर्चा में

    Updated: Sat, 25 Apr 2026 06:45 PM (IST)

    Bihar's Hariharnath-Punwara Dham Corridor: सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार सरकार हरिहरनाथ से पुनवरा धाम तक एक भव्य धार्मिक कॉरिडोर बनाने की योजना पर ...और पढ़ें

    एक भव्य धार्मिक कॉरिडोर बनाने की योजना

    एक भव्य धार्मिक कॉरिडोर बनाने की योजना

    HighLights

    1. हरिहरनाथ से पुनवरा धाम तक भव्य कॉरिडोर योजना।

    2. भोलेनाथ स्थलों को मां जानकी जन्मस्थल से जोड़ेगा।

    3. पर्यटन, रोजगार और क्षेत्रीय विकास को मिलेगा बढ़ावा।

    डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार की सियासत और विकास की दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। सम्राट चौधरी की अगुवाई में सरकार अब धार्मिक पर्यटन को केंद्र में रखकर नई रणनीति पर काम कर रही है।

    हरिहरनाथ मंदिर से लेकर पुनवरा धाम तक एक भव्य कॉरिडोर बनाने की योजना तैयार की गई है। यह सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि आर्थिक और सांस्कृतिक विकास का भी बड़ा मॉडल माना जा रहा है।

    भोलेनाथ से मां जानकी तक सीधा कनेक्शन

    सरकार की योजना के तहत भगवान शिव से जुड़े प्रमुख स्थलों को मां जानकी के जन्मस्थल से जोड़ा जाएगा। इससे श्रद्धालुओं को एक ही रूट में कई प्रमुख तीर्थों के दर्शन का अवसर मिलेगा।

    यह कॉरिडोर बिहार को एक बड़े धार्मिक सर्किट के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम कदम होगा, जिससे देश-विदेश से पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।

    पर्यटन के साथ रोजगार पर फोकस

    इस प्रोजेक्ट को सिर्फ आस्था से नहीं, बल्कि रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से भी जोड़ा जा रहा है। कॉरिडोर बनने से होटल, ट्रांसपोर्ट और छोटे व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।

    स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे, जिससे क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलेगी।

    नीतीश मॉडल से अलग दिखने की कोशिश

    राजनीतिक रूप से भी इस योजना को बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। ‘नीतीश मॉडल’ से अलग हटकर सम्राट सरकार अब विजिबल और बड़े प्रोजेक्ट्स पर जोर दे रही है।

    धार्मिक स्थलों के विकास के जरिए जनता से सीधे जुड़ने की रणनीति साफ नजर आ रही है।

    इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी रहेगा जोर

    कॉरिडोर के साथ-साथ सड़क, लाइटिंग, सुरक्षा और सुविधाओं का भी व्यापक विकास किया जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।

    इससे यात्रा आसान होगी और बिहार की छवि एक बेहतर पर्यटन राज्य के रूप में उभरेगी।

    सियासत और आस्था का संगम

    यह पूरा प्रोजेक्ट सियासत और आस्था के मेल का एक बड़ा उदाहरण बन सकता है। जहां एक तरफ धार्मिक भावनाओं को सम्मान दिया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ विकास का एजेंडा भी आगे बढ़ाया जा रहा है।

    सम्राट चौधरी का यह कदम आने वाले समय में राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर असर डाल सकता है।

    जमीन पर असर पर टिकी निगाहें

    हालांकि, किसी भी बड़े प्रोजेक्ट की तरह इसकी सफलता भी जमीन पर काम की रफ्तार और गुणवत्ता पर निर्भर करेगी।

    अगर यह योजना तय समय में पूरी होती है, तो बिहार के पर्यटन और विकास के लिए यह एक गेमचेंजर साबित हो सकती है।

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