बिहार की नदियों की गाद अब बनेगी कमाई का जरिया, जिलावार सर्वे से खुलेगा खजाना; बाढ़ पर भी लगेगी लगाम
बिहार सरकार ने नदियों में जमा गाद को अब समस्या नहीं, बल्कि आय का जरिया बनाने की बड़ी तैयारी शुरू की है। इसके लिए जिलावार सर्वेक्षण कर गाद की नीलामी की ...और पढ़ें

गाद की होगी नीलामी
HighLights
नदी की गाद को संसाधन मानकर कमाई का जरिया बनाया जाएगा।
जिलावार सर्वेक्षण के बाद गाद की नीलामी से राजस्व मिलेगा।
गाद हटाने से बाढ़ नियंत्रण और निर्माण कार्यों में मदद मिलेगी।
सुनील राज, पटना। बिहार की नदियों में लगातार जमा हो रही गाद अब सरकार के लिए सिर्फ परेशानी नहीं रहेगी। सरकार ने नदी की गाद को संसाधन के रूप में इस्तेमाल करने की बड़ी तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए खान एवं भूतत्व विभाग ने संबंधित जिलों को जिला सर्वेक्षण प्रतिवेदन यानी डीएसआर तैयार करने का निर्देश दिया है।
सर्वे में यह पता लगाया जाएगा कि किस नदी के किस हिस्से में कितनी गाद जमा है। इसके साथ ही गाद की मात्रा, उसे निकालने की संभावना और उसके इस्तेमाल का भी आकलन होगा। यानी अब नदी की गाद हटेगी भी और उससे सरकार की कमाई भी होगी।
गंगा से महानंदा तक, इन नदियों पर खास नजर
खान एवं भूतत्व तथा जल संसाधन विभाग ने गाद की समस्या वाली कई प्रमुख नदियों को चिह्नित किया है। इनमें गंगा, कोसी, गंडक, बागमती और बूढ़ी गंडक प्रमुख हैं।
कमला-बलान और महानंदा के साथ सिकरहना, बलान और ललबकिया पर भी नजर है। इसके अलावा धोवा, पंचाने, सकरी, वाया, नून और कदाने जैसी नदियां भी सूची में शामिल हैं।
मसान, परमान और सुरसर जैसी नदियों में भी गाद प्रबंधन की जरूरत आंकी गई है। इन नदियों में जमा गाद का जिलावार सर्वे कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सर्वे के बाद गाद की होगी नीलामी
सरकार की योजना के तहत संबंधित जिलों में पहले गाद का विस्तृत सर्वेक्षण कराया जाएगा। इसके आधार पर जिला सर्वेक्षण प्रतिवेदन तैयार होगा और स्वीकृति के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
डीएसआर स्वीकृत होने के बाद समाहर्ता के माध्यम से गाद की नीलामी कराई जाएगी। इस तरह नदी से निकाली जाने वाली उपयोगी गाद को बेकार सामग्री नहीं माना जाएगा।
सरकार इसे आर्थिक संसाधन के तौर पर इस्तेमाल करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। नीलामी से मिलने वाला राजस्व सरकारी खजाने में जाएगा।
एक तीर से दो निशाने, गाद भी हटेगी और कमाई भी होगी
इस पूरी योजना में सरकार को दोहरा फायदा मिलने की उम्मीद है। एक तरफ गाद की नीलामी से राजस्व प्राप्त होगा, तो दूसरी ओर नदी की उड़ाही भी हो सकेगी।
नदी की तलहटी से गाद हटने पर पानी के प्रवाह में सुधार होने की संभावना है। जल प्रवाह बेहतर होने से बाढ़ के दौरान पानी की निकासी में भी मदद मिल सकती है।
इससे तटबंध और जलनिकासी से जुड़े कार्यों को भी सहूलियत मिलने की उम्मीद है। यानी गाद हटाने की योजना को अब राजस्व और आपदा प्रबंधन दोनों से जोड़कर देखा जा रहा है।
सड़क से तटबंध तक काम आएगी नदी की निकली गाद
नदी से निकलने वाली गाद का उपयोग विभिन्न निर्माण कार्यों में किए जाने की संभावना है। सड़क निर्माण और तटबंध तैयार करने में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
भराई और दूसरे आधारभूत ढांचे के निर्माण में भी गाद उपयोगी साबित हो सकती है। इससे निर्माण कार्यों के लिए स्थानीय स्तर पर सामग्री उपलब्ध कराने का एक विकल्प मिलेगा।
साथ ही नदी से निकली सामग्री को दोबारा उपयोग में लाने की व्यवस्था विकसित होगी। सरकार अब गाद को समस्या के बजाय उपयोगी संसाधन में बदलने की तैयारी कर रही है।
पहले भी हुई थी पहल, अब बड़े पैमाने पर तैयारी
जल संसाधन विभाग की ओर से गाद की समस्या वाली नदियों की उड़ाही के लिए पहले भी खान एवं भूतत्व विभाग के साथ समन्वय की पहल होती रही है।
हालांकि अब सरकार इसे व्यापक स्तर पर लागू करने की योजना बना रही है। जिलावार डीएसआर तैयार होने से गाद की मात्रा और उसके इस्तेमाल का व्यवस्थित आंकड़ा तैयार हो सकेगा।
इसके बाद नीलामी और उठाव की प्रक्रिया को भी बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा। सरकार की नजर खास तौर पर गंगा, कोसी, गंडक, बागमती, बूढ़ी गंडक, कमला-बलान और महानंदा जैसी नदियों पर है।
अब देखना होगा कि नदी की गाद से शुरू होने वाली यह योजना बिहार में कमाई के साथ बाढ़ नियंत्रण का कितना बड़ा मॉडल बन पाती है।