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    बिहार में अब नहीं छिपेगी कोई संपत्ति, 264 नगर निकायों में जीआईएस से बनेगा टैक्स रजिस्टर

    Updated: Thu, 16 Jul 2026 07:23 PM (IST)

    बिहार के 264 नगर निकायों में संपत्ति कर व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए जीआईएस आधारित प्रॉपर्टी टैक्स रजिस्टर तैयार किया जाएगा। ...और पढ़ें

    घर-घर सर्वे कर होगा डिजिटल मानचित्रण(AI फोटो)

    घर-घर सर्वे कर होगा डिजिटल मानचित्रण(AI फोटो)

    HighLights

    1. 264 नगर निकायों में जीआईएस आधारित टैक्स रजिस्टर बनेगा।

    2. घर-घर सर्वे से संपत्तियों का डिजिटल मानचित्रण होगा।

    3. राजस्व संग्रह बढ़ेगा, कर विवादों में कमी आएगी।

    राज्य ब्यूरो, पटना। राज्य के 264 नगर निकायों में संपत्ति कर व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए शहरी विकास एवं आवास विभाग ने जीआइएस (जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम) आधारित प्रॉपर्टी टैक्स रजिस्टर तैयार कराने का निर्णय लिया है।

    इसके लिए विभाग निजी एजेंसी का चयन करेगा, जो सभी मकानों और अन्य संपत्तियों का जीआइएस आधारित बहुउद्देशीय घर-घर सर्वे करेगी।

    सरकार का उद्देश्य टैक्स व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए राजस्व संग्रह को मजबूत बनाना है।

    इस पहल से नगर निकायों में संपत्ति संबंधी आंकड़ों का सटीक और अद्यतन रिकॉर्ड तैयार हो सकेगा।

    घर-घर सर्वे कर होगा डिजिटल मानचित्रण

    सर्वे के दौरान प्रत्येक संपत्ति का डिजिटल मानचित्रण किया जाएगा। इसके साथ ही संपत्तियों से जुड़ी आवश्यक जानकारियां भी एकत्र की जाएंगी।

    संग्रहित आंकड़ों का विभाग और संबंधित नगर निकायों के मौजूदा अभिलेखों से मिलान किया जाएगा। इसके आधार पर एकीकृत और अद्यतन प्रॉपर्टी टैक्स रजिस्टर तैयार किया जाएगा।

    टैक्स के दायरे से बाहर संपत्तियों की होगी पहचान

    जीआइएस आधारित सर्वे के जरिए उन संपत्तियों की भी पहचान हो सकेगी, जो अब तक टैक्स के दायरे से बाहर हैं।

    इससे कर निर्धारण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनेगी। सरकार का मानना है कि इससे टैक्स संग्रह व्यवस्था अधिक प्रभावी और सटीक हो सकेगी। नगर निकायों की राजस्व प्राप्ति में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।

    कर विवादों में आएगी कमी

    विभाग के अनुसार डिजिटल और जीआइएस आधारित रिकॉर्ड तैयार होने से कर निर्धारण से जुड़े विवाद कम होंगे।

    संपत्तियों की वास्तविक स्थिति और विवरण उपलब्ध होने से किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति नहीं रहेगी।

    इससे नगर निकायों और करदाताओं दोनों को सुविधा मिलेगी। संपत्ति कर व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने में भी मदद मिलेगी।

    चयनित एजेंसी देगी तकनीकी सहयोग

    परियोजना के तहत चयनित एजेंसी नगर निकायों को तकनीकी सहयोग भी उपलब्ध कराएगी। विभाग ने इस कार्य को चरणबद्ध तरीके से पूरा कराने की तैयारी शुरू कर दी है।

    एजेंसी के चयन के बाद सभी 264 नगर निकायों में सर्वे का काम शुरू किया जाएगा।परियोजना पूरी होने के बाद संपत्ति कर से जुड़े अभिलेख पूरी तरह डिजिटल और जीआइएस आधारित हो जाएंगे।