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    'AI और डिजिटल तकनीक अपनाएं विधायक-एमएलसी', विधानसभा में बोले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 01:32 AM (IST)

    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विधायकों और विधान पार्षदों से एआई और डिजिटल तकनीक अपनाने का आह्वान किया है। ...और पढ़ें

    सीएम सम्राट चौधरी। (सोशल मीडिया)

    सीएम सम्राट चौधरी। (सोशल मीडिया)

    HighLights

    1. एआई और डिजिटल तकनीक से विधायकों की क्षमता बढ़ेगी।

    2. विकास योजनाओं में एआई से लागत में बचत संभव है।

    3. बिहार में एक करोड़ लोगों को राशन कार्ड में एआई का उपयोग।

    राज्य ब्यूरो, पटना। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विधायकों और विधान पार्षदों का आह्वान किया है कि वे एआई और डिजिटल तकनीक से जुड़े।

    इसकी जानकारी न केवल उनकी क्षमता बढ़ाएगी, राज्य के विकास में भी इससे मदद मिलेगी। वे गुरुवार को विधानसभा के उप भवन में आयोजित प्रबोधन कार्यक्रम को उद्घाटन के बाद संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि एआई और डिजिटल तकनीक से विधायकों एवं विधान पार्षदों का क्षमता वर्द्धन होगा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल तकनीक शासन, प्रशासन तथा विकास की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुकी है।

    उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं के एस्टीमेट तैयार करने में भी एआई सहयोगी है। भवन निर्माण विभाग के एक एस्टीमेट की कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जांच करने पर पांच से सात प्रतिशत तक लागत में बचत हुई।

    इस राशि का उपयोग अन्य विकास कार्यों में किया जा सकता है। आज के डिजिटल युग में यदि हम एआई का उपयोग नहीं करेंगे तो विकास की दौड़ में पीछे रह जाएंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में सहयोग कार्यक्रम के संचालन तथा एक करोड़ पात्र लोगों को राशन कार्ड उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग हो रहा है।

    60 लाख किसानों को डिजिटल आईडी से जोड़ने का लक्ष्य

    60 लाख किसानों को डिजिटल आईडी से जोड़ने का लक्ष्य है। विद्यालयों में कंप्यूटर की शिक्षा दी जा रही है। मुजफ्फरपुर में आर्टिफिशियल इंटिलिजेंस और कम्प्यूटर साइंस विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है।

    सभी मंत्रियों, विधायकों एवं विधान पार्षदों के साथ-साथ उनके सहयोगियों को भी समय-समय पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता, कंप्यूटर एवं सोशल मीडिया के उपयोग का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।

    बिहार के सभी पंचायतों में मौसम केंद्र संचालित हैं। मौसम पूर्वानुमान 70 से 80 प्रतिशत तक सटीक सिद्ध हो रहा है। यह तकनीक कृषि एवं ग्रामीण विकास के लिए अत्यंत उपयोगी है।

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