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'कोई लुधियाना से आकर पटना में साइकिल नहीं बेचेगा', ऐसा क्यों बोले CM सम्राट चौधरी?

Published: Thu, 08 Oct 2026 07:35 PM (GMT+05:30)

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उद्यमी योजना कार्यक्रम में 'मेक इन बिहार' पर जोर दिया, कहा सरकार स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देगी।

'कोई लुधियाना से आकर पटना में साइकिल नहीं बेचेगा', ऐसा क्यों बोले CM सम्राट चौधरी

'कोई लुधियाना से आकर पटना में साइकिल नहीं बेचेगा', ऐसा क्यों बोले CM सम्राट चौधरी

जागरण संवाददाता, पटना। बापू सभागार में मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत चयनित लाभुकों के एक दिवसीय उन्मुखीकरण एवं प्रथम किस्त की राशि के वितरण कार्यक्रम में सम्राट चौधरी ने कहा कि चाहे वह स्टील खरीदना हो, कपड़ा हो या कोई अन्य कच्चा माल, यदि बिहार का कोई व्यक्ति मानक के अनुरूप उत्पादन करता है, तो सरकार उसी का सामान खरीदेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब कोई साइकिल बनाने वाला लुधियाना से आकर पटना में साइकिल नहीं बेचेगा, उसे यहीं उत्पादन करना होगा। इसी तरह दूसरे राज्यों में लगे स्टील प्लांट का सामान तब तक नहीं खरीदा जाएगा, जब तक बिहार में उसका उत्पादन मौजूद न हो।

सीएम ने कहा कि राज्य के उद्यमियों को सरकारी काम दिलाने के लिए टेंडर नियमों में भी संशोधन किया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि 50 करोड़ रुपये तक की सरकारी योजनाओं के टेंडर में यदि कोई बिहारी उद्यमी एल-2, एल-3 या एल-4 (एल 2, एल 3, एल 4) पर भी रहता है और वह एल-1 (एल1) की दर पर काम करने को तैयार होता है, तो काम उसी बिहारी उद्यमी को दिया जाएगा।

कार्यक्रम शुरू होने के पूर्व मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत उद्यमियों द्वारा लगाये गए स्टालों का मुख्यमंत्री ने निरीक्षण किया तथा उत्पाद, उसकी गुणवत्ता एवं लोगों के बीच उसकी मांग को लेकर जानकारी ली।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एमएसएमई के लिए पूरे देश को लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की राशि दी है, जिसका 10वां हिस्सा बिहार को मिलेगा।

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उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने कहा कि बिहार की बड़ी आबादी और युवा हमारी कमजोरी नहीं, बल्कि हमारी सबसे बड़ी ताकत और पूंजी हैं। मंत्री ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष (2025-26) में योजना के तहत 4,800 चयनित लाभार्थियों को दो लाख रुपये की दर से पहली किस्त दी जा रही है, जिस पर लगभग 96 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

इसके अलावा पूर्व के लाभार्थियों को दूसरी व तीसरी किस्त के रूप में 40 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य युवाओं और महिलाओं को सिर्फ रोजगार खोजने वाला नहीं, बल्कि उद्यमी बनाकर उनके सपने साकार करना है।

बिहार एमएसएमई नीति 2026 का मुख्य लक्ष्य एक करोड़ से अधिक प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार का सृजन करना और राज्य के साख जमा अनुपात (क्रेडिट डिपाजिट रेशियो) को सात प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत तक ले जाना है।

इसके साथ ही स्थानीय हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों को आधुनिक तकनीक और बड़े बाजार से जोड़ने के लिए 'मुख्यमंत्री क्लस्टर विकास योजना 2026' का भी लोकार्पण किया गया। इसके तहत 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन क्लस्टर' और 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट' को बढ़ावा दिया जाएगा।

अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मो. जमां खान ने कहा कि सरकार युवा एवं महिलाओं को रोजगार लेने वाला नहीं, देना वाला बनाना चाहती है। पिछड़ा वर्ग एवं अतिपिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री रमा निषाद ने लाभार्थियों से कहा कि मिली राशि का प्रयोग प्रदेश के विकास में करें।

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन ने कहा कि प्रदेश को समृद्ध बनाने के लिए लाभुक नए उद्यमियों को उत्साहित करें।

उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार ने कहा कि हमारा प्रयास है कि कोई भी लाभुक केवल वित्तीय सहायता प्राप्त करने तक सीमित न रहे, बल्कि वह सफलतापूर्वक अपना उद्यम स्थापित करे और उसे आगे बढ़ाए।

इस अवसर पर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के सचिव संदीप कुमार आर. पुडुकलकट्टी, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव मो. सोहैल, बियाडा के प्रबंध निदेशक नवीन कुमार, एमएसएमई के निदेशक अमन समीर, निदेशक उद्योग मुकुल कुमार गुप्ता सहित अन्य वरीय अधिकारीगण, उद्यमी एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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