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    बिहार में सब्जी कारोबार को मिलेगी नई रफ्तार, 106 करोड़ की योजनाओं से खेत से बाजार तक मजबूत होगा पूरा नेटवर्क

    Updated: Sat, 08 Aug 2026 07:26 PM (IST)

    बिहार में सब्जी उत्पादन को खेत से बाजार तक जोड़ने के लिए सहकारिता विभाग ने 106.39 करोड़ रुपये की योजनाएं मंजूर की हैं। इन योजनाओं से संग्रहण, परिवहन औ ...और पढ़ें

    350 पंचायतों में बनेंगे सब्जी संग्रहण केंद्र

    350 पंचायतों में बनेंगे सब्जी संग्रहण केंद्र

    HighLights

    1. 106.39 करोड़ की योजनाओं को सहकारिता विभाग ने दी मंजूरी।

    2. 350 पंचायत स्तरीय सब्जी संग्रहण केंद्र, 50 प्रखंड स्तरीय बनेंगे।

    3. 534 पीवीसीएस को कार्यशील पूंजी, किसानों को बेहतर बाजार मिलेगा।

    राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार में सब्जी उत्पादन को सिर्फ खेत तक सीमित रखने के बजाय उसे मजबूत बाजार से जोड़ने की तैयारी तेज हो गई है। सहकारिता विभाग ने सब्जी क्षेत्र के लिए 106.39 करोड़ रुपये की विभिन्न योजनाओं को मंजूरी दी है।

    इन योजनाओं के जरिए सब्जियों के संग्रहण, परिवहन, आधारभूत संरचना और मार्केटिंग व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।

    मकसद है कि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बेहतर बाजार और सुविधाएं मिल सकें। इसके लिए पंचायत से लेकर प्रखंड स्तर तक सब्जी संग्रहण और आधारभूत ढांचा तैयार किया जाएगा। यानी अब खेत से मंडी तक सब्जियों की पूरी व्यवस्था को सहकारी नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी है।

    350 पंचायतों में बनेंगे सब्जी संग्रहण केंद्र

    योजना के तहत राज्य में 350 पंचायत स्तरीय सब्जी संग्रहण केंद्र बनाए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही 50 प्रखंड स्तरीय आधारभूत संरचनाओं के निर्माण की भी तैयारी है।

    इन केंद्रों के जरिए किसानों की उपज को एक जगह एकत्र करने और आगे बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। सब्जियों के संग्रहण की बेहतर व्यवस्था होने से किसानों को स्थानीय स्तर पर सुविधा मिलने की उम्मीद है।

    इससे सहकारी समितियों के जरिए सब्जियों के कारोबार को व्यवस्थित करने का रास्ता भी खुलेगा। सरकार की कोशिश पंचायत स्तर से ही सब्जी की सप्लाई चेन को मजबूत करने की है।

    534 समितियों को मिलेगी कार्यशील पूंजी

    सब्जी क्षेत्र से जुड़ी प्राथमिक सब्जी उत्पादक सहकारी समितियों यानी पीवीसीएस को भी योजना में अहम स्थान दिया गया है।

    राज्य की 534 पीवीसीएस को प्रति समिति दो लाख रुपये की कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने का प्राविधान किया गया है। इसके अलावा नौ सब्जी संघों को प्रति संघ 10 लाख रुपये की कार्यशील पूंजी दी जाएगी।

    इससे समितियों को सब्जी खरीद, संग्रहण और बाजार तक पहुंचाने के काम में आर्थिक मदद मिल सकेगी। सहकारी समितियों को मजबूत करने से किसानों के लिए सामूहिक रूप से बाजार तलाशने की क्षमता बढ़ सकती है। सरकार इसी नेटवर्क के जरिए किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है।

    किसानों को बेहतर बाजार दिलाना प्राथमिकता

    सहकारिता सचिव धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का बेहतर बाजार उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है।

    उन्होंने पीवीसीएस का विस्तार पंचायत और प्रखंड स्तर तक करने की जरूरत बताई। इससे अधिक से अधिक किसानों को सहकारी व्यवस्था से जोड़ने का रास्ता खुलेगा।

    किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बेहतर विकल्प उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है। सब्जी उत्पादन करने वाले किसानों को बाजार से जोड़ना इस पूरी योजना का अहम उद्देश्य है। इसके जरिए उत्पादन और बिक्री के बीच की दूरी कम करने की कोशिश होगी।

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    हर यूनियन में 5 नए पीवीसीएस खोलने का लक्ष्य

    बैठक में वेजफेड के प्रबंध निदेशक मनोज कुमार सिंह समेत संबंधित अधिकारी और पदाधिकारी मौजूद रहे। उन्होंने निर्देश दिया कि अगले 30 दिनों में प्रत्येक यूनियन में पांच नए पीवीसीएस को सुचारु रूप से संचालित किया जाए।

    इससे सहकारी नेटवर्क को तेजी से विस्तार देने की तैयारी साफ दिखाई दे रही है। नए पीवीसीएस के सक्रिय होने से स्थानीय स्तर पर सब्जी उत्पादकों को एक मंच मिलने की उम्मीद है।

    संग्रहण से लेकर परिवहन और विपणन तक की व्यवस्था को इसी नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। अगर यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से जमीन पर उतरती है तो बिहार के सब्जी किसानों के लिए खेत से बाजार तक का सफर आसान हो सकता है।