Nayyi Navelli in Patna JFF : पटना में एक्ट्रेस यामी गौतम का खास अंदाज, नई फिल्म 'नई नवेली' से लेकर मां बनने तक साझा किए अनुभव
यामी गौतम धर ने पटना में जागरण फिल्म उत्सव में अपनी फिल्मी यात्रा, 'नई नवेली' और मातृत्व के अनुभवों को ...और पढ़ें

सिनेपोलिस में यशस्वी से बात करतीं यामी गौतम। जागरण
HighLights
यामी गौतम ने जागरण फिल्म उत्सव में अपनी यात्रा साझा की।
आगामी फिल्म 'नई नवेली' और मातृत्व के अनुभव बताए।
सिनेमा में महिलाओं के बदलते प्रतिनिधित्व पर राय रखी।
जागरण संवाददाता, पटना। रुपहले पर्दे पर कुछ चेहरे सिर्फ चमकते नहीं, बल्कि अपने शानदार अभिनय से दर्शकों के जेहन में हमेशा के लिए उतर जाते हैं।
चुनौतीपूर्ण किरदारों को चुनकर बड़े पर्दे पर उतारने वाली राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेत्री यामी गौतम धर शुक्रवार को जागरण फिल्म उत्सव में शामिल हुईं।
पीएंडएम माल के सिनेपोलिस में उद्घाटन के बाद फिल्मों की प्रस्तुति आरंभ होने से पहले दर्शकों से रूबरू हुईं अभिनेत्री ने अपनी फिल्मी यात्रा, कैमरे के पीछे की सच्चाई और अपनी उस ताकत पर खुलकर बात की, जिसने उन्हें यहां तक पहुंचाया।
नई नवेली के बारे में की चर्चा
आधी आबादी की जिम्मेदारियों, कामकाजी महिला के संघर्ष, परिवार के महत्व और सिनेमा के बदलते स्वरूप को केंद्र में रखते हुए उन्होंने कहा कि अब हीरोइन का नहीं, दमदार किरदारों का दौर है।
यशस्वी से बात करते हुए यामी ने आगामी फिल्म ''नई नवेली'' के विषय में दर्शकों को बताया। कामकाजी महिलाओं और माताओं के मुद्दे पर यामी ने कहा कि चाहे आप कामकाजी महिला हों या होममेकर, हर महिला अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करती है।
मुझे नहीं लगता कि हम महिलाएं वक्त को बांटती हैं, बल्कि हम उस वक्त को मल्टीप्लाई (गुना) करती हैं। एक नई मां के तौर पर अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि मैं सच कहूं तो बिना पारिवारिक सहयोग के हम कुछ नहीं कर सकते।

आज अगर मैं अपने घर और छोटे बेटे से इतनी दूर पटना में काम कर पा रही हूं, तो इसके पीछे मेरी मां का सबसे बड़ा हाथ है।
इसके साथ ही मेरे पति आदित्य का सपोर्ट भी बहुत मायने रखता है। मां बनने के बाद आपकी जिम्मेदारियां कभी खत्म नहीं होतीं।
कोई तय फारमेट नहीं, बस अच्छे किरदार चाहिए
सिनेमा में महिलाओं के बदलते प्रतिनिधित्व पर यामी ने बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि अब वक्त के साथ बदलना बहुत जरूरी है।
अब ऐसा कोई तय फारमेट नहीं रह गया है कि हिंदी फिल्म की एक एक्ट्रेस या हीरोइन को ऐसा ही दिखना चाहिए या वैसी ही फिल्में करनी चाहिए।
अब फिल्मों में किरदार होने चाहिए, उन किरदारों में बात होनी चाहिए। दर्शक भी अब अच्छी कहानियां और मजबूत किरदार देखना चाहते हैं।
बार-बार रीटेक करने से मैकेनिकल हो जाता है अभिनय
अपनी पिछली फिल्मों विक्की डोनर, बाला, अ थर्सडे, और आर्टिकल 370 से लेकर आगामी नई नवेली का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वे ऐसे किरदार चुनती हैं, जिससे महिलाएं खुद को जोड़ सकें।
सफलता को लेकर यामी ने अपना नजरिया साझा करते हुए कहा कि जब भी मैं किसी नई फिल्म की शूटिंग शुरू करती हूं, तो मुझे स्कूल के पहले दिन जैसा महसूस होता है।
मैं थोड़ी नर्वस और उत्साहित रहती हूं। आर्टिकल 370 को बहुत प्यार मिला, लेकिन मैं उसे भूलकर सेट पर एक नई ऊर्जा के साथ जाती हूं।
मेरी कोशिश रहती है कि मैं कामेडी जैसे मुश्किल जानर को भी पहले टेक में ही सही कर लूं, क्योंकि बार-बार रीटेक करने से अभिनय मैकेनिकल हो जाता है।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि काम के दौरान दर्शकों के समय का सम्मान करना सबसे अहम है, उन्हें कभी ग्रांटेड नहीं लेना चाहिए।
हर किरदार नई चुनौती लेकर आता है
यामी ने कहा कि कोई रोल सरल नहीं होता। हर किरदार नई चुनौती लेकर आता है। सबके लिए अलग ही प्रयत्न करना पड़ता है।
कलाकार को अपने सामने एक पर्सनालिटी को खड़ा करना है और फिर उसे जीना है। नए कलाकारों को सीख देते हुए अभिनेत्री ने कहा कि आप जितनी बार स्क्रिप्ट पढ़ेंगे, कुछ नया लगेगा।
इसी लिए मुझे अपनी हर तैयारी में कुछ न कुछ कमी जरूर लगती है। इससे सीखने की लालसा जगी रहती है। अंत में मुझे यही लगता है कि बेहतर करनी की संभावना खत्म नहीं होती, बनी रहती है। अभिनेत्री ने यह भी कहा कि फिल्म जिंदगी का हिस्सा हो सकती है, पूरी जिंदगी नहीं।
