मिथिला हाट की तर्ज पर नालंदा हाट; DM उदिता सिंह का बड़ा प्लान, स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर भी होगा तैयार
नालंदा में मिथिला हाट की तर्ज पर 'नालंदा हाट' विकसित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य स्थानीय कला, संस्कृति और पर्यटन को बढ़ावा देना है। जिलाधिकारी उदित ...और पढ़ें

स्थल निरीक्षण करतीं जिलाधिकारी उदिता सिंह।
HighLights
मिथिला हाट की तर्ज पर नालंदा हाट का विकास।
स्थानीय कला, शिल्प और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा।
कमल सरोवर और पुष्करणी तालाब का भी होगा विकास।
संवाद सूत्र, सिलाव। नालंदा की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पर्यटन विरासत को नई पहचान देने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण पहल की है।
मधुबनी के मिथिला हाट की तर्ज पर नालंदा में नालंदा हाट विकसित करने की योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। इसी कड़ी में जिला पदाधिकारी उदिता सिंह ने प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण किया।
उन्होंने कहा कि यह हाट न केवल स्थानीय कला, शिल्प और संस्कृति को बढ़ावा देगा, बल्कि पर्यटन को नई गति देने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित करेगा।
स्थान चयन पर खास ध्यान
प्रस्तावित नालंदा हाट का स्थान इस प्रकार चयनित किया जा रहा है, जिससे पर्यटक एक ही मार्ग पर कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक आसानी से पहुंच सकें।
इसके लिए ह्वेनसांग मेमोरियल के समीप पहुंच मार्ग को चौड़ा और विकसित किया जा रहा है। इससे नालंदा महाविहार के खंडहर, ह्वेनसांग मेमोरियल, सूर्य मंदिर, बड़गांव तालाब और नालंदा हाट तक निर्बाध आवागमन की सुविधा मिलेगी।
यहां यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित नालंदा महाविहार, ह्वेनसांग मेमोरियल, विश्व प्रसिद्ध सूर्य मंदिर बड़गांव, बड़गांव स्थित सूर्य तालाब, कुंडलपुर, जिसे भगवान महावीर की जन्मस्थली माना जाता है।
सहित अनेक धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थल मौजूद हैं। बड़गांव स्थित सूर्य मंदिर में प्रत्येक वर्ष चैती और कार्तिक छठ के अवसर पर लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।
आधारभूत संरचनाओं और सुविधाओं की होगी व्यवस्था
इन सभी स्थलों को बेहतर आधारभूत संरचना और सुविधाओं से जोड़ने की योजना पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिले की प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
कमल सरोवर जैव विविधता का महत्वपूर्ण केंद्र है, जहां प्रतिवर्ष लगभग 235 प्रजातियों के प्रवासी एवं स्थानीय पक्षियों का आगमन होता है।
इस जलाशय के संरक्षण, सौंदर्यीकरण और इसे बर्ड वॉचिंग एवं इको-टूरिज्म के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में भी जिला प्रशासन प्रयासरत है। इससे प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी।
निरीक्षण के दौरान जिला पदाधिकारी ने कहा कि नालंदा हाट में बिहार की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पाद, लोक संस्कृति और खान-पान को एक ही परिसर में स्थान दिया जाएगा।
पुष्करणी तालाब परिसर में विकसित होगा स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर
यहां स्थानीय कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन एवं बिक्री का अवसर मिलेगा। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
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उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पर्यटन स्थलों के आसपास सड़क, प्रकाश व्यवस्था, पार्किंग, सौंदर्यीकरण, पेयजल, शौचालय एवं अन्य बुनियादी सुविधाओं का समुचित विकास सुनिश्चित किया जाए।
पुष्करणी तालाब में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की संभावनाओं पर भी कार्य किया जा रहा है।
इस अवसर पर अपर समाहर्ता, नालन्दा, विशेष कार्य पदाधिकारी, जिला गोपनीय शाखा, नालन्दा, कार्यपालक पदाधिकारी, नगर पंचायत नालन्दा , के अलावे अन्य पदाधिकारीगण, स्थानीय लोग उपस्थित थें।